उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां अभी से तेज हो गई हैं. इसी कड़ी में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने पूर्वांचल क्षेत्र में अपनी राजनीतिक जमीन को और मजबूत करने के लिए एक बड़ा दांव खेला है. सुभासपा ने पूर्वांचल की 32 महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों पर अपने प्रभारी और सह-प्रभारियों की नियुक्ति कर दी है. राजभर का यह कदम संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ आगामी चुनाव में सीट शेयरिंग को लेकर गठबंधन के सहयोगियों, विशेषकर भाजपा (BJP) पर रणनीतिक दबाव बनाने के तौर पर देखा जा रहा है.
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गाजीपुर, जौनपुर और बनारस सहित कई जिलों में मौजूदगी बढ़ाने पर जोर
सुभासपा ने इस बार उन जिलों को विशेष प्राथमिकता दी है, जहां पिछले चुनावों में उनकी स्थिति बेहद मजबूत थी या वे बेहद करीबी अंतर से चुनाव हारे थे:
- मुख्य फोकस वाले जिले: पार्टी ने गाजीपुर, जौनपुर, बनारस (वाराणसी), चंदौली और भदोही जैसे हाई-प्रोफाइल जिलों की सीटों पर रणनीतिक रूप से प्रभारियों की तैनाती की है.
- दावेदारी की मजबूत तैयारी: हालांकि ओम प्रकाश राजभर ने सीधे तौर पर सीटों को लेकर कोई बड़ा दावा नहीं ठोका है, लेकिन चुनाव से काफी पहले 32 सीटों पर प्रभारियों की यह घोषणा साफ संकेत देती है कि बीजेपी को भी सुभासपा की इस दावेदारी के लिए मानसिक रूप से तैयार रहना होगा.
पिछली बार 17 में से जीती थीं 6 सीटें, इस बार बूथ स्तर पर कड़ा पहरा
सुभासपा इस बार अपने पुराने चुनावी रिकॉर्ड को और बेहतर बनाने के इरादे से मैदान में उतर रही है:
- संगठन का पुनर्गठन: पार्टी नेतृत्व द्वारा यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि केवल विधानसभा स्तर ही नहीं, बल्कि बूथ स्तर तक संगठन के ताने-बाने को मजबूत किया जाए ताकि मतदाताओं तक सीधी और प्रभावी पहुंच बनाई जा सके.
- स्ट्राइक रेट सुधारने पर नजर: पिछले विधानसभा चुनाव में सुभासपा ने 17 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिनमें से 6 सीटों पर उसे कामयाबी हासिल हुई थी. इस बार पार्टी अपने स्ट्राइक रेट को बढ़ाने और अधिक सीटें जीतने की उम्मीद के साथ जमीन पर उतर चुकी है.
'सीटों की संख्या के लिए नहीं, जीत के लिए लड़ेंगे'- राजभर
ओम प्रकाश राजभर ने चुनावी तैयारियों के बीच अपनी पार्टी का रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है:
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