धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी बने नए शिक्षा मंत्री, नई जिम्मेदारी मिलते ही ये क्या कह दिया?

यूपी तक

• 01:25 PM • 26 Jul 2026

Dharmendra Pradhan Resignation: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है. इसके साथ ही जंतर-मंतर पर चल रहा छात्र आंदोलन भी समाप्त हो गया है.

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Dharmendra Pradhan Resignation: दिल्ली में लंबे छात्र आंदोलन के बाद 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनका इस्तीफा तुरंत स्वीकार कर लिया, जिसके बाद जंतर-मंतर पर चल रहा धरना-प्रदर्शन समाप्त करने का एलान कर दिया गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर अब शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को अतिरिक्त प्रभार के रूप में सौंपी गई है. धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर जश्न का माहौल रहा और प्रदर्शनकारी छात्र खुशी मनाते हुए अपने घरों की ओर वापस लौटने लगे.

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प्रह्लाद जोशी को मिला अतिरिक्त प्रभार

शिक्षा मंत्रालय की नई जिम्मेदारी मिलने के बाद प्रह्लाद जोशी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद व्यक्त किया है. उन्होंने कहा कि वे इस जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और विनम्रता के साथ निभाएंगे. प्रह्लाद जोशी ने बीते वर्षों में केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की भी सराहना की है. वर्तमान में प्रह्लाद जोशी कर्नाटक के धारवाड़ से सांसद हैं और उनके पास उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का प्रभार भी बना रहेगा.

नए शिक्षा मंत्री के सामने चुनौतियां

लंबे समय तक चले आंदोलन के बाद अब नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं. सबसे मुख्य चुनौती देशभर के छात्र-छात्राओं के बीच दोबारा विश्वास कायम करना है. इसके साथ ही शिक्षा प्रणाली में जरूरी सुधार लाना और पूरी परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना भी उनके लिए एक बड़ी जिम्मेदारी होगी.

जंतर-मंतर पर छा गया सन्नाटा

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर की पूरी तस्वीर बदल चुकी है. प्रदर्शन खत्म होने की घोषणा होते ही छात्र अपने-अपने घरों की तरफ लौटने लगे हैं. जंतर-मंतर और आसपास का इलाका, जो पहले छात्रों की भारी भीड़ से भरा रहता था, वहां अब सुनसान नजारा है. मंच से कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने खुशी जताते हुए इसे लोकतंत्र की जीत बताया और कहा कि छात्रों के एकजुट संघर्ष के आगे सरकार को झुकना पड़ा.