Swami Prasad Maurya: दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन को अपनी जनता पार्टी ने समर्थन दिया है. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य खुद जंतर-मंतर पहुंचक प्रदर्शनकारी युवाओं से मुलाकात कर उनकी मांगों का समर्थन किया है. उन्होंने केंद्र सरकार पर देश के नौजवानों के भविष्य को अंधकार में धकेलने का आरोप लगाया है. स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि सरकार की नीतियों के कारण युवा बेरोजगार रहने पर मजबूर हैं. इसके साथ ही उन्होंने एलान किया है कि वे इस मुद्दे को लेकर 26 जुलाई को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में राज्यस्तरीय धरना प्रदर्शन करेंगे.
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सरकार से की इस्तीफे की मांग
जंतर-मंतर पर स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि देश के नौजवानों का भविष्य खतरे में है और सरकार उनके जीवन के साथ खिलवाड़ कर रही है. उन्होंने दावा किया कि इस आंदोलन के दौरान अब तक 20 लड़के-लड़कियों की जान जा चुकी है और हजारों युवाओं पर फर्जी मुकदमे दर्ज किए गए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस की बर्बरता के साथ-साथ सादे कपड़ों में लोगों ने छात्र-छात्राओं के साथ मारपीट की, जिससे कई बच्चों के हाथ और पैर टूट गए हैं. मौर्य ने मांग की है कि प्रधानमंत्री इस पर सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगें, केंद्रीय शिक्षा मंत्री अपना इस्तीफा दें, सभी फर्जी मुकदमे वापस लिए जाएं और पीड़ित परिवारों को पर्याप्त मुआवजा दिया जाए.
पेपर लीक को बताया सोची-समझी साजिश
विपक्ष के दौर में पेपर लीक होने के सवाल पर स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि पहले कभी-कभार कोई पर्चा लीक होता था, लेकिन अब लगातार पेपर लीक हो रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा आयोजित अब तक की 70 परीक्षाएं पर्चा लीक की शिकार हो चुकी हैं. मौर्य ने इसे एक सोची-समझी साजिश करार देते हुए कहा कि देश के नौजवानों को डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर, वकील, आईएएस, आईपीएस और वैज्ञानिक बनने से रोकने के लिए यह षड्यंत्र रचा गया है ताकि सरकार को युवाओं को नौकरियां न देनी पड़े.
26 जुलाई को लखनऊ में धरना
स्वामी प्रसाद मौर्य ने एलान किया कि दिल्ली के प्रदर्शन से लौटने के बाद वे 26 जुलाई को उत्तर प्रदेश के लखनऊ में प्रदेश स्तर पर एक बड़ा धरना आंदोलन करेंगे. उन्होंने बताया कि लखनऊ के प्रदर्शन के बाद उत्तर प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर भी आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी घोषणा वे 26 तारीख को करेंगे. उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों के कारण देश के करोड़ों नौजवानों की जिंदगी लाचारी और बदहाली में बीत रही है और उन्हें 5 किलो-10 किलो चावल पर निर्भर रहने के लिए मजबूर किया जा रहा है.
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