Mayawati on NEET Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे CJP आंदोलन और छात्रों के विरोध प्रदर्शन को लेकर अब पूरे देश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव और चंद्रशेखर आजाद समेत विपक्ष के कई बड़े नेता लगातार सरकार पर हमला बोल रहे हैं. इसी बीच जिस प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा था, वह भी सामने आ गई है. बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने इस पूरे मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लगातार कई पोस्ट किए.
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मायावती ने क्या कहा?
मायावती ने अपने पोस्ट में कहा कि नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले कई दिनों से चल रहा आंदोलन खासकर NEET जैसी परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य कथित गड़बड़ियों से प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों की पीड़ा से जुड़ा हुआ है. उन्होंने कहा कि इस आंदोलन के कारण सड़क से लेकर संसद तक भारी हंगामा देखने को मिल रहा है और इसका राजनीतिकरण होने से मामला सरकार और आंदोलनकारियों के बीच सीधे टकराव की स्थिति में पहुंच गया है.
उन्होंने कहा कि इस स्थिति से देश को बाहर निकालना जरूरी है, क्योंकि इसका असर केवल दिल्ली तक सीमित नहीं बल्कि कई राज्यों के सामान्य जनजीवन पर भी पड़ रहा है.
पेपर लीक को भ्रष्टाचार से जोड़ा
अपने दूसरे पोस्ट में मायावती ने कहा कि चाहे अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े विवाद हों या फिर राष्ट्रीय और राज्य स्तर की परीक्षाओं में पेपर लीक के मामले, ये सभी घटनाएं हर स्तर पर फैल रहे भ्रष्टाचार का परिणाम हैं. उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं केवल प्रशासनिक विफलता नहीं बल्कि व्यवस्था में गहराई तक फैली भ्रष्ट मानसिकता की ओर इशारा करती हैं.
संवैधानिक नैतिकता पर दिया जोर
मायावती ने अपने तीसरे पोस्ट में संवैधानिक नैतिकता (Constitutional Morality) का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि इसके अभाव में देश को नुकसान पहुंच रहा है. उन्होंने बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर का हवाला देते हुए कहा कि अच्छे शासन के लिए संवैधानिक नैतिकता को सर्वोच्च महत्व दिया जाना चाहिए.
सरकार और अदालतों से पहल की अपील
अपने अगले पोस्ट में मायावती ने कहा कि देश और जनहित से जुड़े इस गंभीर मामले का सौहार्दपूर्ण समाधान निकालने के लिए सरकार और न्यायालय जैसी संवैधानिक संस्थाओं को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए.
आंदोलन के राजनीतिकरण और हिंसा पर जताई आपत्ति
अपने अंतिम पोस्ट में मायावती ने कहा कि CJP के आंदोलन को विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा अपने-अपने स्वार्थ के लिए इस्तेमाल करना और सड़क से लेकर संसद तक टकराव व हिंसा की स्थिति पैदा करना उचित नहीं है. उन्होंने सरकार और आंदोलनकारियों दोनों से अपील की कि वे जल्द से जल्द शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण समाधान निकालें.
क्या है पूरा मामला?
बता दें कि प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर संसद तक मार्च का ऐलान किया गया था. इसी के तहत जंतर-मंतर पर हजारों छात्र और प्रदर्शनकारी जुटे थे. इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प की खबरें भी सामने आईं और कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए. विपक्ष का आरोप है कि छात्रों की आवाज दबाई जा रही है, जबकि सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं. फिलहाल जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है और मायावती की प्रतिक्रिया को इस पूरे विवाद में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक हस्तक्षेप माना जा रहा है.
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