नहीं रहे आजमगढ़ के 'सादगी वाले नेता' आलम बदी आजमी, 90 साल की उम्र में ली अंतिम सांस...अखिलेश यादव ने भावुक होकर क्या कहा?

यूपी तक

• 11:19 AM • 23 Jul 2026

Alam Badi Azmi Death: आजमगढ़ की निजामाबाद विधानसभा से पांच बार विधायक रहे समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आलम बदी आजमी का 90 साल की उम्र में निधन हो गया. सादगी, ईमानदारी और जनसेवा के लिए पहचाने जाने वाले आलम बदी आजमी को नेताओं और समर्थकों ने भावुक श्रद्धांजलि दी.

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Alam Badi Azmi Death: उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक सादगी भरा और सम्मानित चेहरा अब हमेशा के लिए खामोश हो गया है. आजमगढ़ की निजामाबाद विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के पांच बार विधायक रहे आलम बदी आजमी का 90 साल की उम्र में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया. उनके निधन की खबर से पूरे पूर्वांचल में शोक की लहर दौड़ गई है. सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक तमाम नेताओं ने उनके निधन पर दुख जताया है.

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अंतिम दर्शन के लिए रखा गया पार्थिव शरीर

आलम बदी आजमी का पार्थिव शरीर उनके मातबरगंज स्थित आवास पर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है, जहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं. सोशल मीडिया पर भी उनके समर्थक और राजनीतिक साथी भावुक संदेशों के जरिए उन्हें याद कर रहे हैं.

समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं में उनके निधन को लेकर गहरा शोक है. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी आलम बदी आजमी के निधन पर दुख जताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी.

अखिलेश यादव ने जताया शोक

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा, "समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं आजमगढ़ की निजामाबाद विधानसभा से लोकप्रिय विधायक जनाब आलम बदी साहब का इंतकाल अत्यंत दुखद है. दिवंगत आत्मा को शांति दे भगवान और शोकाकुल परिजनों को यह असीम दुख सहने की शक्ति प्रदान करें. भावभीनी श्रद्धांजलि."

वहीं अन्य नेताओं ने भी उन्हें याद करते हुए कहा कि आलम बदी आजमी का जाना समाज और राजनीति के लिए बड़ी क्षति है. उनकी सेवा और सादगी को हमेशा याद किया जाएगा.

पांच बार विधायक बनने के बाद भी जीवन बेहद साधारण

आलम बदी आजमी की पहचान एक ऐसे नेता के रूप में थी, जिन्होंने सत्ता को कभी सुविधाओं का जरिया नहीं बनाया. पांच बार विधायक रहने के बावजूद उन्होंने बेहद साधारण जीवन जिया. वह पुराने मकान में रहते थे और हमेशा आम लोगों के बीच नजर आते थे.

सुबह से शाम तक लोगों की समस्याएं सुनना, अधिकारियों से सवाल करना और क्षेत्र के विकास कार्यों की निगरानी करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था. यही वजह थी कि आम जनता के बीच उनकी अलग पहचान और भरोसा कायम हुआ.

नौकरी छोड़कर चुना राजनीति का रास्ता

मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले आलम बदी आजमी ने नौकरी छोड़कर राजनीति को जनसेवा का माध्यम बनाया था. अपने पूरे राजनीतिक जीवन में उन्होंने सादगी, ईमानदारी और जनता से जुड़ाव को सबसे ज्यादा महत्व दिया. उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं था. उन्हें प्रदेश के सबसे कम संपत्ति वाले विधायकों में भी गिना जाता था.

स्कूटर, रोडवेज बस और साधारण फोन से बनी पहचान

आज के दौर में जहां नेताओं की पहचान बड़े काफिले, आलीशान बंगले और सुरक्षा घेरे से जुड़ी होती है, वहीं आलम बदी आजमी अपनी सादगी के लिए जाने जाते थे.

वह कई बार स्कूटर से विधानसभा पहुंच जाते थे. गांवों में लोगों से मिलने के लिए रोडवेज बसों से सफर करना या पैदल पहुंच जाना उनके लिए आम बात थी. उनके पास न कोई बड़ा सुरक्षा घेरा था और न ही दिखावे की राजनीति. साधारण कुर्ता-पायजामा, चप्पल, कान में सुनने की मशीन और एक सामान्य मोबाइल फोन उनकी पहचान बन चुके थे.

जनता का भरोसा था सबसे बड़ा प्रचार

आलम बदी आजमी चुनाव प्रचार में दिखावे और धनबल पर भरोसा नहीं करते थे. उनका मानना था कि जनता का विश्वास ही सबसे बड़ा प्रचार है. यही वजह रही कि उन्होंने लंबे समय तक निजामाबाद की जनता के बीच अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी.

करीब 90 साल की उम्र में भी उनका जनसंपर्क और सक्रियता लोगों के लिए प्रेरणा बनी रही. कुछ महीने पहले उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में जब वह स्कूटर की पिछली सीट पर बैठकर पहुंचे थे, तो उनकी तस्वीरें काफी चर्चा में रही थीं.

लंबे समय से चल रहा था इलाज

आलम बदी आजमी लंबे समय से बीमार चल रहे थे. तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें 14 अप्रैल को लखनऊ के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इसके बाद मई, जून और जुलाई महीने में भी उनका इलाज जारी रहा. इस दौरान अखिलेश यादव अस्पताल पहुंचकर उनका हालचाल लेने भी गए थे.

ऐसा रहा राजनीतिक सफर

आलम बदी आजमी ने साल 1996 में पहली बार समाजवादी पार्टी के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीता था. इसके बाद उन्होंने 2002, 2012, 2017 और 2022 में भी जनता का विश्वास हासिल किया.

हालांकि साल 2007 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन उन्होंने वापसी करते हुए दोबारा अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की. लगातार चुनाव जीतकर उन्होंने निजामाबाद क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई.

आजमगढ़ और पूर्वांचल की राजनीति को बड़ी क्षति

आलम बदी आजमी का निधन समाजवादी पार्टी के साथ-साथ आजमगढ़ और पूरे पूर्वांचल की राजनीति के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है. राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम लोगों ने उनकी सादगी, ईमानदारी और जनसेवा को याद करते हुए श्रद्धांजलि दी है.