महाराजगंज सदर सीट पर 2027 की जंग हुई दिलचस्प, जानिए पूर्वांचल की इस दलित बाहुल्य सीट पर कौन मारेगा बाजी!

यूपी तक

• 11:38 AM • 27 Jul 2026

Maharajganj Sadar Assembly Seat: महाराजगंज सदर विधानसभा सीट पर 2027 के चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है. बीजेपी, सपा और बीएसपी अपनी-अपनी रणनीति में जुटी हैं.

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Maharajganj Sadar Assembly Seat: उत्तर प्रदेश की महाराजगंज सदर विधानसभा सीट का सियासी मिजाज हर चुनाव में बदलता रहा है. जनता ने इस सीट पर कभी किसी एक पार्टी को अपना स्थायी गढ़ नहीं बनने दिया है. चुनाव हमेशा स्थानीय समीकरणों और मुद्दों पर लड़े जाते हैं. अब 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से सियासी सरगर्मी तेज हो गई है. बीजेपी जहां इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखना चाहती है, वहीं समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) भी जीत की कोशिशों में जुट गई हैं.

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सीट का पुराना सियासी इतिहास

महाराजगंज सदर सीट पर पिछले दो दशकों से मुख्य मुकाबला बीजेपी और सपा के बीच ही देखने को मिला है. साल 1993, 1996 और 2002 में बीजेपी के चंद्र किशोर यहां से लगातार विधायक रहे. लेकिन साल 2007 में सपा के श्रीपति आजाद ने बीजेपी के इस किले को ढहा दिया. 2012 में भी सपा के सुदामा प्रसाद ने जीत दर्ज की. इसके बाद 2017 में बीजेपी के जय मंगल कनौजिया ने वापसी की और 2022 में भी जीत हासिल कर वह लगातार दूसरी बार विधायक बने.

बीजेपी और सपा के अपने दावे

मौजूदा बीजेपी विधायक जय मंगल कनौजिया का कहना है कि 2017 और 2022 में जनता ने विकास के नाम पर उन्हें आशीर्वाद दिया है. उनका दावा है कि सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बेहतर कानून व्यवस्था के कारण 2027 में भी बीजेपी जीतेगी. दूसरी तरफ, सपा नेता का कहना है कि पार्टी बूथ स्तर पर अपनी तैयारी मजबूत कर रही है. उनका दावा है कि अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा इस बार मजबूती से चुनाव लड़ेगी और जरूर वापसी करेगी.

सीट का जातीय समीकरण क्या है?

इस सुरक्षित विधानसभा सीट पर करीब 4 लाख 28 हजार कुल वोटर हैं. इनमें सबसे ज्यादा 1 लाख 93 हजार वोटर अनुसूचित जाति के हैं. इसके बाद पिछड़ी जाति के करीब 1 लाख 44 हजार, मुस्लिम समाज के 83 हजार और ब्राह्मण समाज के लगभग 48 हजार वोटर शामिल हैं. यहां दलित और मुस्लिम वोटर मिलकर किसी भी पार्टी की हार-जीत तय करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं. दलित बाहुल्य होने के बावजूद बीएसपी यहां अब तक खाता नहीं खोल पाई है.

चुनाव में क्या होंगे अहम मुद्दे?

स्थानीय पत्रकारों के मुताबिक, इस सीट पर कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा के मामले में बीजेपी का पलड़ा भारी दिखता है. वहीं मौजूदा विधायक भी विकास कार्यों को लेकर क्षेत्र में काफी सक्रिय हैं. हालांकि, बीते समय में पेट्रोल-डीजल की किल्लत जैसी समस्याओं से किसानों में थोड़ी परेशानी भी रही है. इसके अलावा, युवाओं के लिए रोजगार एक बहुत बड़ा मुद्दा बना हुआ है. ऐसे में 2027 के चुनाव में युवाओं का वोट निर्णायक साबित होगा और यहां कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है.