'तुम जन्मजात योगी हो'... अखबार से माता-पिता को मिली थी अजय बिष्ट के संन्यास की खबर! जन्मदिन पर जानें CM योगी के जीवन के रोचक किस्से

आज 5 जून को सीएम योगी आदित्यनाथ का जन्मदिन है. जानिए उनके जीवन की कहानी, कैसे अजय सिंह बिष्ट से वे योगी आदित्यनाथ बने, जब माता-पिता को अखबार से पता चला संन्यास का सच और उनके पहले चुनाव की कहानी.

CM Yogi

CM Yogi

यूपी तक

05 Jun 2026 (अपडेटेड: 05 Jun 2026, 01:02 PM)

follow google news

CM Yogi Success Story: आज यानी 5 जून को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जन्मदिन है. इस विशेष अवसर पर हम आपको उनके जीवन से जुड़े कई दिलचस्प किस्से और उनके अजय सिंह बिष्ट से लेकर देश के सबसे बड़े राज्य के मुख्यमंत्री और एक बड़े राजनेता बनने के सफर के तमाम रोचक पहलुओं से रूबरू कराने जा रहे हैं.

यह भी पढ़ें...

अजय सिंह बिष्ट से योगी बनने का पूरा सफर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम पहले अजय सिंह बिष्ट था. अजय सिंह बिष्ट का जन्म 5 जून 1972 को उत्तरकाशी जिले के मशालगांव में हुआ था, जहां उनके पिता आनंद सिंह बिष्ट की तैनाती थी. उनके पिता एक फॉरेस्ट रेंजर थे और मां सावित्री देवी एक गृहणी हैं. इस दंपती के परिवार में तीन बेटियां (पुष्पा बिष्ट, कौशल्या बिष्ट और शशि बिष्ट) और चार बेटे (मनेंद्र सिंह बिष्ट, अजय सिंह बिष्ट, शैलेंद्र सिंह बिष्ट और महेंद्र सिंह बिष्ट) हैं.

अजय अपने पैतृक गांव पंचूर (पौड़ी गढ़वाल) में पले-बढ़े. उनकी मां सावित्री देवी के अनुसार, बचपन से ही अजय को गायों से गहरा लगाव था और स्कूल से आने के बाद घर की गायों को चराने ले जाना उनके दैनिक जीवन का हिस्सा था. उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा थांगड़ के सरकारी प्राथमिक स्कूल से हासिल की, जो केवल 8वीं कक्षा तक था. इसके बाद 9वीं की पढ़ाई के लिए वह चमकोट और 10वीं के लिए टिहरी के गाजा स्थित सरकारी स्कूल में गए.

कॉलेज की पढ़ाई और छात्र राजनीति का किस्सा जानिए 

11वीं और 12वीं की पढ़ाई के लिए अजय ऋषिकेश के श्री भरत मंदिर इंटर कॉलेज गए, जहां उन्होंने पीसीएम (फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स) के साथ अंग्रेजी और हिंदी विषय चुने. वहां वह अपने बड़े भाई मनेंद्र के साथ रहते थे, जो उस समय ग्रेजुएशन कर रहे थे. इसके बाद साल 1989 में वह ग्रेजुएशन के लिए कोटद्वार के पीजी गवर्नमेंट कॉलेज चले गए, जहां वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) में शामिल होकर छात्र राजनीति में काफी सक्रिय हो गए.

जब महंत अवैद्यनाथ ने कहा- 'तुम जन्मजात योगी हो'

कोटद्वार से ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद अजय ने साल 1992 में ऋषिकेश के पंडित ललित मोहन शर्मा गवर्नमेंट पीजी कॉलेज में एमएससी में दाखिला लिया. साल 1993 की शुरुआत में जब अजय की मुलाकात गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मठ के महंत अवैद्यनाथ से हुई, तो महंत ने उनसे कहा था कि वह एक जन्मजात योगी हैं और एक दिन उनका वहां आना निश्चित है. इससे पहले वह 1990 में भी महंत अवैद्यनाथ से तब मिले थे, जब महंत 'राम जन्मभूमि मुक्ति' आंदोलन के सिलसिले में भारत भ्रमण पर थे.

छोड़ दी पढ़ाई और घर: महंत अवैद्यनाथ से प्रभावित होकर नवंबर 1993 में अजय ने अपना गांव, माता-पिता, दोस्त और अपनी पढ़ाई सब कुछ छोड़ दिया और गोरखपुर चले गए. वहां उन्होंने अवैद्यनाथ को अपना गुरु मान लिया. इसके बाद 15 फरवरी 1994 को महंत अवैद्यनाथ ने नाथ पंथ योगी के रूप में अजय का अभिषेक किया.

अखबार से माता-पिता को मिली संन्यास की खबर

अजय जब सब कुछ छोड़कर गोरखपुर गए, तो उनके माता-पिता को लगा कि वह रोजगार की तलाश में वहां गए हैं. लेकिन इसके दो महीने बाद उन्हें अखबार के जरिए अजय के संन्यास लेने की जानकारी मिली. यह खबर मिलते ही अजय के माता-पिता अगली ही ट्रेन से गोरखपुर मठ पहुंचे और बेटे को संन्यासी की वेशभूषा में देखकर हैरान रह गए. उस समय महंत अवैद्यनाथ शहर से बाहर थे, इसलिए अजय को ही अपने माता-पिता को शांत करना पड़ा. अजय ने फोन पर अपने गुरु की बात पिता से कराई. महंत अवैद्यनाथ ने उनके पिता को बताया कि उनका बेटा अजय अब योगी आदित्यनाथ बन चुका है और उन्होंने माता-पिता से उनके आगे के सफर के लिए अनुमति मांगी. शुरुआती विरोध के बाद आखिरकार माता-पिता मान गए.

चुनावी फॉर्म का दिलचस्प तथ्य: योगी आदित्यनाथ के बारे में एक दिलचस्प बात यह भी है कि वह अपने चुनावी फॉर्म में पिता के नाम के कॉलम में महंत अवैद्यनाथ का नाम लिखते हैं.

जब अपना पहला चुनाव हार गए थे अजय

साल 1992 में अजय अपने कॉलेज में छात्र निकाय के चुनावों में सचिव पद का चुनाव लड़ना चाहते थे. वह एबीवीपी से अपनी उम्मीदवारी तय करा सकते थे, लेकिन संगठन के एक अन्य छात्र पद्मेश बुदलाकोटी ने भी इसी पद के लिए टिकट मांग लिया. इस आंतरिक विवाद को सुलझाने के लिए एबीवीपी ने तीसरे छात्र दीप प्रकाश भट्ट को टिकट दे दिया. एबीवीपी से टिकट न मिलने पर अजय निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतर गए, लेकिन वे यह चुनाव हार गए. यह उनके जीवन का पहला चुनाव था.

संसदीय राजनीति से मुख्यमंत्री बनने तक का सफर

  • 1996: योगी आदित्यनाथ को पहली बार महंत अवैद्यनाथ के चुनाव प्रचार प्रबंधन का प्रभारी बनाया गया.
  • 1998: जब महंत अवैद्यनाथ ने सक्रिय राजनीति से संन्यास लिया, तब योगी आदित्यनाथ ने उनकी सीट गोरखपुर से अपना पहला लोकसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. इसके बाद वह लगातार 5 बार इस सीट से सांसद चुने गए.
  • 2017: जब वह पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने, तो उन्होंने विधानमंडल की सदस्यता की अनिवार्यता के तहत विधान परिषद (एमएलसी) का रास्ता चुना.
  • 2022: इसके बाद साल 2022 के विधानसभा चुनाव में वह सीधे विधायक बनकर विधानसभा पहुंचे.

अब एक 'ब्रैंड' के रूप में नजर आने लगे हैं योगी

योगी आदित्यनाथ अब एक 'ब्रैंड' के रूप में देखे जाने लगे हैं और उन्हें ‘बाबा बुल्डोजर’ का नया नाम भी मिल चुका है. एक मंझे हुए राजनेता की तरह योगी अब खुद को विशेषकर पार्टी के भीतर विनम्र दिखाने का प्रयास भी कर रहे हैं. वह पार्टी के शीर्ष-2 नेताओं की बार-बार प्रशंसा करते नजर आते हैं और साथ ही यह संदेश भी दे रहे हैं कि जीत के बाद जोश के साथ-साथ होश को बरकरार रखना भी बेहद जरूरी है. यही वजह है कि उन्हें निसंदेह भाजपा में भविष्य के एक बड़े नेता के रूप में देखा जा रहा है. हालांकि, इस मुकाम को बनाए रखने के लिए उन्हें एक बार फिर जनता की आकांक्षाओं पर खरा उतरना होगा, जो उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में आसान काम नहीं है.

(शांतनु गुप्ता की किताब ‘योगीगाथा’ के इनपुट्स के साथ)