UP Panchayat Chunav: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की राह देख रहे प्रत्याशियों और ग्रामीणों के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है. यूपी Tak के चर्चित शो 'पूर्वांचल की बात' में जब पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर से पंचायत चुनाव को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने इसके टलने का पूरा ठीकरा समाजवादी पार्टी पर फोड़ दिया. राजभर का दावा है कि सरकार चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार थी. लेकिन सपा से जुड़े लोगों ने कोर्ट जाकर मामला फंसा दिया. वहीं सियासी गलियारों में चल रही चर्चाओं की मानें तो अब उत्तर प्रदेश में प्रधानी के चुनाव इस साल नहीं बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद ही संभव हो पाएंगे.
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हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
दरअसल यूपी सरकार ने हाल ही में प्रदेश के प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने पर उन्हें 6 महीने का एक्सटेंशन देते हुए बतौर प्रशासक नियुक्त कर दिया था. सरकार के इस फैसले के खिलाफ अशोक प्रजापति नाम के एक व्यक्ति ने हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका दाखिल कर दी. याचिकाकर्ता का तर्क था कि चुने हुए प्रतिनिधियों का कार्यकाल इस तरह कैसे बढ़ाया जा सकता है? मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने भी टिप्पणी की और सरकार से सीधा सवाल पूछा कि 'आखिर पंचायत चुनाव कब कराए जाएंगे?' अदालत ने इस मामले में पंचायती राज विभाग से 10 जुलाई तक लिखित जवाब मांगा है.
सपा वालों ने कोर्ट में फंसाया मामला-ओपी राजभर
पंचायत चुनाव की तैयारियों और कोर्ट के नोटिस को लेकर जब कानपुर में यूपी Tak ने पंचायती राज मंत्री और सुभाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर से तीखे सवाल किए तो उन्होंने कहा 'हम तो चुनाव कराने के लिए बिल्कुल तैयार थे, बैलेट पेपर तक छप चुके थे. लेकिन सपा का एक आदमी हाईकोर्ट चला गया और पिछड़ा वर्ग आयोग को लेकर मामला कोर्ट में फंसा दिया. अब सब कुछ हाईकोर्ट के फैसले पर निर्भर है.'
प्रधानों को 6 महीने की मौज देने और विरोधियों की नाराजगी के सवाल पर राजभर ने कहा कि उत्तर प्रदेश के 57694 प्रधान इस फैसले से बेहद खुश हैं और सरकार को धन्यवाद दे रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि प्रधान इस मदद का अहसान साल 2027 के विधानसभा चुनाव में भरपूर वोट देकर चुकाएंगे.
क्या टलेंगे पंचायत चुनाव?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर पंचायत चुनाव होंगे कब? अंदरखाने की खबरों और राजनीतिक समीकरणों को देखें तो चुनाव तत्काल होते नहीं दिख रहे हैं. उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव नियत समय (फरवरी-मार्च) से पहले यानी जनगणना के चक्कर में इस बार दिसंबर या जनवरी में भी कराए जा सकते हैं. ऐसे में जब जुलाई में पंचायती राज विभाग कोर्ट में जवाब दाखिल करेगा, तो कानूनी प्रक्रिया में अगली तारीखें मिलना तय है. इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग और सरकार का पूरा ध्यान विधानसभा चुनाव पर केंद्रित हो जाएगा. यही वजह है कि उत्तर प्रदेश में अब पहले विधानसभा चुनाव होंगे और उसके बाद ही ग्राम प्रधान,बीडीसी और जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव कराए जाएंगे.
ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव पर राजभर का बड़ा दांव
यूपी Tak से बातचीत में ओम प्रकाश राजभर ने एक और बड़ा खुलासा किया. उन्होंने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को एक प्रस्ताव भेजा है. राजभर का कहना है कि ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनावों में जो धनबल और गाड़ियों का खेल होता है उसे बंद किया जाना चाहिए. राजभर ने मांग की है कि बीडीसी और जिला पंचायत सदस्यों के बजाय, अब ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव भी जनता के सीधे वोट से कराया जाए ताकि जनता खुद अपना अध्यक्ष चुन सके. अब देखना यह होगा कि राजभर का यह डायरेक्ट इलेक्शन वाला प्रस्ताव पास होता है या फिर पंचायत चुनाव की तरह यह भी सिर्फ एक हवाहवाई दावा ही बनकर रह जाता है.
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