UP Political News: यूपी Tak का खास शो 'आज का यूपी' राज्य की राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों का एक विश्वसनीय मंच है, जिसमें हम राज्य की तीन बड़ी खबरों का विस्तृत विश्लेषण करते हैं. आज के इस अंक में पहली बड़ी खबर समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव के 2027 चुनाव को लेकर टिकट बंटवारे के उस सीक्रेट 'पर्सनालिटी सर्वे' और थ्री-लेयर फॉर्मूले की है, जिसके जरिए वे जिताऊ उम्मीदवार चुनने के काम में जुटे हैं. दूसरी बड़ी खबर अखिलेश यादव और चुनावी रणनीतिकार एजेंसी आईपैक के बीच टूटे संबंधों और पश्चिम बंगाल में पड़े छापों के बाद आए यू-टर्न को लेकर है. वहीं, आज की तीसरी बड़ी खबर 2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर सपा की उस अंदरूनी रणनीति की है, जिसके तहत कांग्रेस को 60 से 70 सीटों के भीतर समेटने का प्लान तैयार किया गया है ताकि बारगेनिंग की गुंजाइश को कम किया जा सके.
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क्या है अखिलेश यादव का 2027 टिकट फॉर्मूला?
समाजवादी पार्टी के लिए आगामी 2027 का विधानसभा चुनाव 'करो या मरो' की लड़ाई जैसा है, क्योंकि पार्टी दो बार से सत्ता से बाहर चल रही है. इस बार अखिलेश यादव 2024 के लोकसभा चुनाव वाले प्रदर्शन को दोहराने और बीजेपी को उत्तर प्रदेश में सत्ता से बेदखल करने के लिए बेहद संजीदा हैं. इसके लिए उन्होंने उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया काफी पहले से शुरू कर दी है.
पार्टी के भीतर इस समय बेहद गोपनीय तरीके से पर्सनालिटी सर्वे चलाया जा रहा है. इस सर्वे की खास बात यह है कि एजेंसियां किसी विशेष नेता के नाम पर नहीं, बल्कि विधानसभावार सबसे पॉपुलर चेहरों (चाहे वह समाज सेवी हो या किसी अन्य दल का) की रेटिंग निकाल रही हैं. जिसका स्कोर सबसे ऊपर होगा, उसे टिकट मिलने की संभावना सबसे प्रबल होगी.
अखिलेश यादव टिकट तय करने के लिए 3 अहम रास्तों का मिलान कर रहे हैं:
- एजेंसियों द्वारा किया जा रहा सीक्रेट पर्सनालिटी सर्वे और उसकी रेटिंग.
- जिलों के कार्यकर्ताओं और नेताओं से बैठकों में मिल रहा सीधा जमीनी फीडबैक.
- पार्टी के बड़े सीनियर नेताओं द्वारा की जाने वाली सिफारिशें.
इस पूरे अकादमिक और अंदरूनी सर्वे के काम को पार्टी के भीतर एक विशेष सेल देख रहा है. चर्चा है कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव और सीनियर रिटायर्ड IAS अधिकारी आलोक रंजन बैकएंड से इस पूरे सर्वे की मॉनिटरिंग कर रहे हैं. इसके अलावा शो टाइम जैसी एजेंसियों को कई जिलों के मुद्दों, जमीनी हकीकत और पीडीए (PDA) फॉर्मूले को सूट करने वाले चेहरों को खोजने का काम सौंपा गया है.
आईपैक से क्यों टूटा अखिलेश यादव का नाता?
लखनऊ: उत्तर प्रदेश चुनाव में कभी समाजवादी पार्टी के रणनीतिक साझेदार के रूप में चर्चा में रही मशहूर चुनावी मैनेजमेंट एजेंसी 'आईपैक' (I-Pac) को लेकर भी बड़ा खुलासा हुआ है. दरअसल, एक समय अखिलेश यादव आईपैक के साथ मिलकर 2027 की चुनावी बिसात बिछाने की तैयारी में थे, लेकिन बीच में ही सपा को आईपैक से अपने सारे संबंध पूरी तरह तोड़ने पड़े.
संबंध टूटने की मुख्य वजह पश्चिम बंगाल में आईपैक के ठिकानों पर पड़ा छापा था. बंगाल में हुई इस बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई के बाद अखिलेश यादव ने किसी भी राजनीतिक विवाद या बदनामी से बचने के लिए आईपैक से तत्काल दूरी बना ली.
आईपैक से नाता टूटने के बाद अखिलेश यादव ने चुनावी सर्वे और रणनीति का काम शो टाइम नामक एजेंसी को सौंप दिया है. शो टाइम के रणनीतिकार इस समय यूपी के कई जिलों में जमीन पर उतरकर मुद्दों की टोह ले रहे हैं और सपा के लिए जिताऊ उम्मीदवारों के नामों की सूची तैयार कर सीधे नेतृत्व को भेज रहे हैं.
कांग्रेस को लेकर सपा का सीक्रेट गेम प्लान, 60 से 70 सीटों पर रोकने की रणनीति
लोकसभा चुनाव 2024 में 'इंडिया गठबंधन' की सफलता के बाद उत्तर प्रदेश में सपा और कांग्रेस के रिश्तों को लेकर भी कई कयास लगाए जा रहे हैं. 'आज का यूपी' के अंदरूनी विश्लेषण में यह बात साफ हुई है कि समाजवादी पार्टी 2027 में कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ने के पक्ष में तो है, लेकिन वह अपने इस साथी को लेकर अत्यधिक उत्साह दिखाने से बच रही है.
सपा के शीर्ष रणनीतिकारों का मानना है कि यदि कांग्रेस को लेकर ज्यादा ढिलाई बरती गई, तो वह चुनाव के समय सीटों के बंटवारे में बड़ा दबाव बना सकती है. इस बारगेनिंग से बचने के लिए अखिलेश यादव का प्लान बेहद स्पष्ट है. सपा अंदरूनी तौर पर कांग्रेस को 60 से 70 सीटों के बीच ही रोकने की तैयारी कर रही है. पार्टी नेतृत्व चाहता है कि बड़े भाई की भूमिका में रहते हुए समाजवादी पार्टी खुद अधिकांश सीटों पर लड़े ताकि सरकार बनाने की स्थिति में वह पूरी तरह आत्मनिर्भर रह सके.
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