UP Political News: उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारे में इस समय समय से पहले विधानसभा चुनाव होने की अटकलें बेहद तेज हो गई हैं. जनगणना विभाग की तैयारियों और चुनाव आयोग के बीच चल रही कथित चर्चाओं के बीच अब समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव ने मोर्चा संभाल लिया है. उन्होंने अपनी पार्टी के नेताओं और जमीनी कार्यकर्ताओं को एक बेहद महत्वपूर्ण और कड़ा संदेश जारी कर चुनावी मोड में आने का निर्देश दिया है.
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उत्तर प्रदेश में वैसे तो विधानसभा चुनाव साल 2027 में प्रस्तावित हैं. लेकिन हालिया प्रशासनिक घटनाक्रमों ने सूबे की सियासत में भारी हलचल पैदा कर दी है. सूत्रों के हवाले से खबर सामने आई है कि जनगणना विभाग की टीम ने चुनाव आयोग को सूचित किया है कि फरवरी से मार्च के बीच पूरे देश में बड़े स्तर पर जनगणना का कार्य किया जाना तय हुआ है. चूंकि इस राष्ट्रीय कार्य में बहुत बड़ी संख्या में प्रशासनिक अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों की ड्यूटी लगेगी, इसलिए यह अटकलें तेज हो गई हैं कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव अपने निर्धारित समय से पहले कराए जा सकते हैं. हालांकि, इस पूरे मामले पर अभी तक चुनाव आयोग की तरफ से कोई भी आधिकारिक मुहर या बयान सामने नहीं आया है.
अखिलेश यादव का संदेश- 'सरकार कभी भी ले सकती है फैसला, हर वक्त रहें तैयार'
जैसे ही चुनावी कार्यक्रम के समय से पहले होने की सुगबुगाहट तेज हुई, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तुरंत अपनी रणनीतिक तैयारी शुरू कर दी. सूत्रों के मुताबिक, अखिलेश यादव ने हाल ही में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की. इस बैठक में उन्होंने कार्यकर्ताओं को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि सरकार कभी भी समय से पहले चुनाव कराने का फैसला ले सकती है, इसलिए किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं को हर वक्त और हर परिस्थिति के लिए पूरी तरह तैयार रहने का कड़ा निर्देश जारी किया है, ताकि चुनाव चाहे जब हों, समाजवादी पार्टी पूरी मजबूती से मैदान में उतरे.
बीजेपी खेमे में भी मंथन
अखिलेश यादव की इस मुस्तैदी के बीच भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के भीतर भी अंदरूनी सुगबुगाहट और रणनीतिक मंथन का दौर तेज हो गया है. बीजेपी संगठन भी इस बात को लेकर लगातार चर्चा कर रहा है कि अगर चुनाव समय से पहले होते हैं, तो पार्टी को पोलिंग बूथ से लेकर राज्य स्तर तक पूरी तरह चाक-चौबंद रहना होगा. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर फरवरी और मार्च के दौरान स्टाफ की कमी के चलते चुनावी कार्यक्रम में बदलाव होता है, तो इसका असर केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा. कयास लगाए जा रहे हैं कि ऐसी स्थिति में उत्तर प्रदेश समेत कुल 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव एक साथ प्रभावित हो सकते हैं. फिलहाल इन तमाम कयासों और अटकलों के बीच सभी राजनीतिक दलों की नजरें चुनाव आयोग के अगले कदम पर टिकी हुई हैं.
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