UP Kiska: झांसी सदर सीट पर सालों से जीत की सिर्फ कोशिश कर रही सपा, क्या 2027 में बदलेगा समीकरण?

Jhansi Sadar Vidhan Sabha: झांसी सदर विधानसभा सीट पर भाजपा का दबदबा लगातार कायम है. तीन बार से विधायक रवि शर्मा इस सीट को पार्टी का मजबूत गढ़ बताते हैं, जबकि सपा 2027 में पीडीए रणनीति के दम पर चुनौती देने की तैयारी में है.

Akhilesh Yadav and CM Yogi

रजत सिंह

• 07:29 PM • 30 May 2026

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Jhansi Sadar Vidhan Sabha: उत्तर प्रदेश के झांसी जिले की 'झांसी सदर' विधानसभा सीट भारतीय जनता पार्टी का एक ऐसा अभेद्य किला बन चुकी है जिसे ढहा पाना विपक्ष के लिए पिछले तीन चुनावों से नामुमकिन साबित हुआ है. साल 2002 के बाद से आज तक समाजवादी पार्टी इस सीट पर कभी जीत का स्वाद नहीं चख सकी है. जब से इस सीट पर भाजपा की मजबूत एंट्री हुई है तब से यहां कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी जैसी मुख्य विपक्षी पार्टियां भी हाशिए पर चली गई हैं. 'यूपी किसका' सीरीज के इस खास अंक में आज हम बात करेंगे झांसी सदर सीट के दिलचस्प सियासी इतिहास, जातीय गणित और साल 2027 के महामुकाबले को लेकर जारी शह और मात के खेल की.

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तीन बार के भाजपा विधायक रवि शर्मा का दावा

झांसी सदर सीट पर साल 2012, 2017 और 2022 के चुनावों में लगातार भाजपा के रवि शर्मा ने जीत दर्ज कर हैट्रिक बनाई है. अपनी लगातार जीतों और क्षेत्र में पकड़ को लेकर तीन बार के भाजपा विधायक रवि शर्मा का कहना है कि उनकी जीत के पीछे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियां और जनता का अटूट विश्वास है. रवि शर्मा ने कानून व्यवस्था को अपनी जीत का सबसे बड़ा आधार बताते हुए कहा कि 'यह वही उत्तर प्रदेश है जिसे कभी अराजकता और सांप्रदायिक दंगों का प्रदेश बोला जाता था, जहां महिलाएं और व्यापारी खुद को असुरक्षित महसूस करते थे. आज आदरणीय मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में प्रदेश की कानून-व्यवस्था पूरी तरह चुस्त-दुरुस्त है. जब सुरक्षा बढ़ती है तो आम जनता संतुष्ट होती है. झांसी के ऐतिहासिक विकास और प्रदेश की बदली हुई तस्वीर के दम पर हम आगामी चुनाव भी भारी बहुमत से जीतेंगे.'

सपा का पलटवार

दूसरी तरफ, पिछले चुनाव में रनर-अप रही समाजवादी पार्टी इस बार भाजपा के इस गढ़ को भेदने के लिए पूरी तरह कमर कस चुकी है. पिछले चुनाव में सपा की प्रत्याशी रहीं सीमा कुशवाहा की ओर से बात रखते हुए सपा के जिला अध्यक्ष ने सत्ताधारी दल पर गंभीर आरोप लगाए. सपा जिला अध्यक्ष का कहना है कि 'बीजेपी सिर्फ झूठ बोलकर और जनता को गुमराह करके साम-दाम-दंड-भेद के जरिए चुनाव जीतती आई है. हमारी पिछली कुछ चूक यह रही कि हम समाजवादी पार्टी की विचारधारा और विकास कार्यों को जनता तक सही तरीके से समझा नहीं पाए. लेकिन साल 2024 के लोकसभा चुनावों में हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा बनाई गई पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति ने कमाल दिखाया और सपा को यूपी में 37 सीटें मिलीं. इसी सफल पीडीए रणनीति के तहत हम पूरी तैयारी के साथ 2027 में झांसी सदर सीट पर विजय हासिल करेंगे.'

क्यों भारी पड़ता है भाजपा का पलड़ा?

इस सीट पर करीब 4 लाख मतदाता हैं. यहां का एक खास सामाजिक और जातीय कॉम्बिनेशन हमेशा से भाजपा के पक्ष में माहौल बनाता रहा है. झांसी सदर मुख्य रूप से ब्राह्मण और दलित बाहुल्य क्षेत्र है.

सियासी गणित: इस सीट पर जब भी ब्राह्मण, वैश्य और गैर-यादव ओबीसी (विशेषकर कुशवाहा) मतों का कॉम्बिनेशन एक साथ आता है, तो भाजपा बेहद आसानी से चुनावी वैतरणी पार कर लेती है.

क्या कहते हैं स्थानीय पत्रकार?

क्या साल 2027 के चुनाव में भी पुराना इतिहास दोहराया जाएगा? इस सवाल को लेकर जब स्थानीय वरिष्ठ पत्रकारों से बात की गई, तो मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आईं. स्थानीय पत्रकारों का विश्लेषण है कि झांसी सदर पूरी तरह से एक शहरी अंचल (शहरी क्षेत्र) है। पारंपरिक रूप से शहरी क्षेत्रों में भारतीय जनता पार्टी की संगठनात्मक पकड़ बेहद मजबूत रहती है, जिसका सीधा फायदा उन्हें मिलता रहा है. हालांकि पिछले चुनाव में भाजपा का वोट प्रतिशत थोड़ा गिरा था. लेकिन वह हार-जीत के अंतर को प्रभावित नहीं कर सका.

एंटी-इनकंबेंसी का खतरा

चूंकि भाजपा यहां लगातार शासन में है, इसलिए स्वाभाविक रूप से 'एंटी-इनकंबेंसी' (सत्ता विरोधी लहर) का थोड़ा-बहुत असर देखने को मिल सकता है. जब कोई सरकार लंबे समय तक सत्ता में रहती है तो जनता की नाराजगी और गिले-शिकवे भी उसी से होते हैं. अगर विपक्ष किसी बेहद मजबूत और बेदाग उम्मीदवार को जमीनी मुद्दों के साथ मैदान में उतारने में कामयाब रहा तो भाजपा को कड़ी चुनौती मिल सकती है.