यूपी Tak का खास शो 'आज का यूपी' राज्य की राजनीतिक और सामाजिक हलचलों का सबसे सटीक आईना है. आज के अंक में हम राज्य की तीन बड़ी खबरों का विस्तार से विश्लेषण करेंगे. पहली खबर उत्तर प्रदेश की विधानसभा और लोकसभा सीटों में होने वाली ऐतिहासिक बढ़ोतरी से जुड़ी है, जिसमें हम जानेंगे कि क्या 2027 में विधायकों की संख्या 600 के पार पहुंच जाएगी. दूसरी खबर में हम कांग्रेस सांसद के उस वायरल बयान की चर्चा करेंगे जिसमें उन्होंने एक खास वर्ग को अंधभक्त कहकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है. वहीं, तीसरी खबर में हम अतीक अहमद के उस खौफनाक दौर की पड़ताल करेंगे जब उसके माफिया राज की वजह से भारतीय रेलवे को अपना पूरा सेटअप प्रयागराज से झांसी शिफ्ट करना पड़ा था.
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यूपी में बढ़ेगी विधायकों और सांसदों की संख्या, 2027 या 2029?
उत्तर प्रदेश में सीटों के परिसीमन को लेकर चर्चाएं तेज हैं. आगामी 16 अप्रैल से संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है, जिसमें नारी शक्ति वंदन अधिनियम और परिसीमन बिल पर चर्चा की उम्मीद है. परिसीमन लागू होने के बाद उत्तर प्रदेश में विधानसभा सीटों की संख्या 403 से बढ़कर 606 और लोकसभा सीटों की संख्या 80 से बढ़कर 120 होने का अनुमान है.
नए कानून के तहत 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी हाल ही में चुटकी लेते हुए कहा था कि महिला आरक्षण लागू होने पर कई दिग्गजों की सीटें महिला उम्मीदवारों के खाते में जा सकती हैं.
कब होगा लागू?
हालांकि परिसीमन एक लंबी प्रक्रिया है, इसलिए 2027 के विधानसभा चुनाव में 606 विधायक नजर आना मुश्किल है. लेकिन 2029 के लोकसभा चुनाव में 120 सांसदों और महिला आरक्षण का असर जरूर दिखाई देगा. इसके लिए सरकार को 84वें संविधान संशोधन के नियमों में बदलाव करना होगा.
कांग्रेस सांसद का अंधभक्त वाला बयान वायरल, ब्राह्मणों पर टिप्पणी से गरमाई राजनीति
सीतापुर के कांग्रेस सांसद राजेश राठौर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जबरदस्त तरीके से वायरल हो रहा है. एक प्रदर्शन के दौरान उन्होंने कुछ खास जातियों को संबोधित करते हुए उन्हें बीजेपी का अंधभक्त करार दिया.
सांसद ने कहा कि देश की जनता इन अंधभक्तों के कारण ही परेशान हो रही है. उत्तर प्रदेश में पहले से ही ब्राह्मणों की नाराजगी और उनके राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर बहस छिड़ी हुई है, ऐसे में कांग्रेस सांसद का यह बयान आग में घी डालने का काम कर रहा है. सोशल मीडिया पर लोग इस बयान को लेकर बंटे हुए हैं और इसे आगामी चुनावों के मद्देनजर एक बड़ी राजनीतिक चूक या रणनीति के तौर पर देख रहे हैं.
अतीक अहमद का माफिया राज, जब रेलवे को भी मांगनी पड़ी पनाह
अतीक अहमद की कहानी सिर्फ जमीनों के कब्जे तक सीमित नहीं थी. एक दौर वह भी था जब प्रयागराज में अतीक का इतना खौफ था कि भारतीय रेलवे को अपने स्क्रैप (कबाड़) के काम को बचाना मुश्किल हो गया था. अतीक अहमद रेलवे स्क्रैप के ठेकों पर एकछत्र राज करता था. उसकी गुंडागर्दी और माफिया तंत्र से परेशान होकर रेलवे को अपना कबाड़ का गोदाम और पूरा काम इलाहाबाद से झांसी शिफ्ट करना पड़ा था.
लालू यादव के रेल मंत्री बनने के बाद स्क्रैप का काम कम हुआ, तो अतीक ने अपना ध्यान लैंड माफिया बनने की ओर मोड़ा. गंगा कछार से लेकर सिविल लाइंस तक, करोड़ों की जमीनें उसने महज कुछ लाख रुपयों में डरा-धमका कर अपने नाम लिखवा लीं. अतीक और राजू पाल के बीच की दुश्मनी की मुख्य वजह भी लस्ट ऑफ लैंड (जमीन की भूख) और राजनीतिक वर्चस्व था, जिसका अंत एक खौफनाक हत्याकांड के रूप में हुआ.
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