90 हजार मुस्लिम वोटों वाली जौनपुर सदर सीट पर क्या हैट्रिक लगा पाएंगे बीजेपी विधायक मंत्री गिरीश चंद्र यादव?

रजत सिंह

• 02:09 PM • 09 Aug 2026

UP Kiska: जौनपुर सदर विधानसभा सीट पर 2027 का मुकाबला बेहद दिलचस्प होने के आसार हैं. बीजेपी के मंत्री गिरीश चंद्र यादव के सामने सपा-कांग्रेस गठबंधन की चुनौती होगी. मुस्लिम, कुशवाहा-मौर्य और ओबीसी वोटों का समीकरण चुनावी नतीजों में अहम भूमिका निभाएगा.

Jaunpur Sadar Vidhan Sabha 2027

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Jaunpur Sadar Vidhan Sabha 2027: उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले की सदर विधानसभा सीट प्रदेश की सबसे दिलचस्प और हाई-प्रोफाइल सीटों में से एक है. जौनपुर सदर में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या लगभग 90 हजार के करीब है जो किसी भी एक जाति या समुदाय में सबसे ज्यादा है. इसके बावजूद पिछले दो चुनावों (2017 और 2022) से यहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता और योगी सरकार में मंत्री गिरीश चंद्र यादव विधायक बनते आ रहे हैं. 2022 के कड़े मुकाबले में गिरीश चंद्र यादव ने करीब 8,000 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी. अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या 2027 के विधानसभा चुनाव में गिरीश चंद्र यादव अपनी हैट्रिक लगा पाएंगे या समाजवादी पार्टी-कांग्रेस गठबंधन उनका किला ढहाने में कामयाब होगा?

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मुस्लिम वोटों का बिखराव और बीजेपी की जीत का रास्ता

जौनपुर सदर सीट पर 2022 के चुनाव में विपक्ष की ओर से सपा, कांग्रेस और बसपा तीनों ने ही मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में उतारे थे. विपक्षी खेमे में मुस्लिम वोटों के इस तीन-तरफा बंटवारे का सीधा फायदा बीजेपी प्रत्याशी गिरीश चंद्र यादव को मिला और वे अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे. इससे पहले 2002 में बीजेपी के सुरेंद्र प्रताप सिंह, 2007 में सपा के जावेद अंसारी और 2012 में कांग्रेस के नदीम जावेद यहां से चुनाव जीत चुके हैं.

जौनपुर सदर का अनुमानित जातीय गणित

मुस्लिम: 90,000

दलित: 50,000

वैश्य: 40,000

मौर्य / कुशवाहा: 37,000

यादव: 33,000

क्षत्रिय / राजपूत: 26,000

राजभर: 26,000

ब्राह्मण: 22,000

गैर-यादव ओबीसी (कुशवाहा/मौर्य वोट) है सबसे बड़ा 'एक्स फैक्टर'

स्थानीय विश्लेषण और आंकड़ों के अनुसार, इस सीट पर मौर्य/कुशवाहा समाज का वोट बेहद निर्णायक भूमिका निभाता है.

नगर पालिका चुनाव: बीजेपी की मनोरमा मौर्य को जीत मिली.

2024 लोकसभा चुनाव: सपा-कांग्रेस (INDIA) गठबंधन के प्रत्याशी बाबू सिंह कुशवाहा ने जौनपुर सदर विधानसभा क्षेत्र में अकेले बीजेपी के खिलाफ लगभग 24,000 वोटों की बड़ी बढ़त बनाई.

यही वजह है कि 2027 में यदि सपा किसी गैर-यादव ओबीसी चेहरा (खासकर मौर्य/कुशवाहा) को मैदान में उतारती है तो बीजेपी के लिए मुकाबला बेहद कठिन हो सकता है.

मंत्री गिरीश चंद्र यादव (BJP) का पक्ष

राज्य मंत्री गिरीश चंद्र यादव का कहना है कि उन्होंने 2022 में जनता से किए गए अपने वादों को शत-प्रतिशत पूरा किया है. जौनपुर में रिंग रोड का निर्माण, ओवरब्रिज/फ्लाईओवर, केंद्रीय विद्यालय की स्थापना, खेल इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास, स्वास्थ्य और पर्यटन सुविधाओं में सुधार जैसे ऐतिहासिक काम उनके कार्यकाल में हुए हैं. उन्हें पूरा विश्वास है कि जनता उनके विकास कार्यों के आधार पर उन्हें तीसरी बार भी अवसर देगी.

समाजवादी पार्टी (SP) का पक्ष

सपा जिलाध्यक्ष के अनुसार, 2022 में पार्टी बहुत कम अंतर से हारी थी. लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने अपनी कमियों को दूर कर जौनपुर सदर सीट से बीजेपी को 24,000 वोटों से पछाड़ा था. सपा का दावा है कि 2024 में ही उन्होंने मुकाबला खत्म कर दिया है और 2027 में पार्टी भारी बहुमत के साथ यह सीट जीतकर अपनी पुरानी वापसी करेगी.

निष्कर्ष और 2027 की संभावित राह

स्थानीय पत्रकारों का मानना है कि 2027 का चुनाव जौनपुर सदर में उम्मीदवारों के चयन पर बहुत हद तक निर्भर करेगा. यदि सपा और कांग्रेस का गठबंधन बरकरार रहता है और मुस्लिम वोटों का बिखराव रुकता है, तो बीजेपी को कड़ी चुनौती मिलेगी. हालांकि बसपा (BSP) और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी (AIMIM) की मौजूदगी भी इस सीट के नतीजों को तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है.