यूपी चुनाव से पहले RLD को बड़ा झटका! प्रदेश अध्यक्ष रामाशीष राय ने दिया इस्तीफा, प्राथमिक सदस्यता भी छोड़ी

आशीष श्रीवास्तव

• 04:08 PM • 07 Aug 2026

यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले RLD को बड़ा झटका लगा है. प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामाशीष राय ने पद के साथ पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया.

Jayant Chaudhary and Ramashish Rai

Jayant Chaudhary and Ramashish Rai

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राष्ट्रीय लोकदल (RLD) को बड़ा संगठनात्मक झटका लगा है. पार्टी के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामाशीष राय ने अपने पद के साथ-साथ पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने अपने इस्तीफे में राजनीति में बढ़ते धनबल, परिवारवाद, जातीय विभाजन और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हो रहे प्रहार को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है.

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रामाशीष राय ने क्या कहा?

रामाशीष राय ने अपने पत्र में राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व सौंपे जाने के लिए आभार जताया. उन्होंने कहा कि इस जिम्मेदारी को निभाते हुए उन्होंने अपनी क्षमता के अनुसार संगठन को मजबूत करने का प्रयास किया. इसके लिए उन्होंने प्रदेश के अलग-अलग जनपदों का दौरा किया, कार्यकर्ताओं से संवाद किया और संगठन के विस्तार और सशक्तिकरण के लिए लगातार काम किया.

जेपी आंदोलन से राजनीति में आए थे

रामाशीष राय ने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि वह लोकनायक जयप्रकाश नारायण के 1974-75 के संपूर्ण क्रांति आंदोलन से प्रेरित होकर राजनीति में आए थे. उनके मुताबिक, उस समय भ्रष्टाचार, महंगाई, बेरोजगारी, लोकतांत्रिक संस्थाओं के क्षरण और शासन-प्रशासन की जवाबदेही जैसे मुद्दे राष्ट्रीय चिंता के विषय थे.

उन्होंने कहा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने 'संपूर्ण क्रांति' का आह्वान करते हुए व्यवस्था परिवर्तन का जो सपना देश के सामने रखा था, वह आज भी अधूरा दिखाई देता है.

'धनबल और प्रभावशाली वर्गों के नियंत्रण में सिमट रहा लोकतंत्र'

रामाशीष राय ने अपने पत्र में भारतीय लोकतंत्र को लेकर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र धीरे-धीरे धनबल और प्रभावशाली वर्गों के नियंत्रण में सिमटता दिखाई दे रहा है. उनके मुताबिक, समाज को जाति, उपजाति और संप्रदाय के आधार पर बांटने की प्रवृत्ति बढ़ रही है.

उन्होंने कहा कि किसान अपनी उपज का उचित मूल्य पाने के लिए संघर्ष कर रहा है, जबकि नौजवान बेरोजगारी और भविष्य की अनिश्चितता से जूझ रहा है. शिक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में बढ़ती निराशा जनमानस में असंतोष को जन्म दे रही है.

'जाति तोड़ो, समाज जोड़ो' का संदेश याद दिलाया

रामाशीष राय ने अपने पत्र में सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि देश के महापुरुषों ने सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और बंधुत्व की भावना मजबूत करने के लिए 'जाति तोड़ो, समाज जोड़ो' का संदेश दिया था.

उन्होंने आरोप लगाया कि सार्वजनिक जीवन में ऐसे लोग भी उच्च स्थानों पर हैं, जो सामाजिक विभाजन और जातीय उन्माद को बढ़ावा दे रहे हैं. उनके मुताबिक, यह प्रवृत्ति लोकतंत्र, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रहित के लिए घातक है.

अटल बिहारी वाजपेयी का भी किया जिक्र

RLD नेता ने अपने इस्तीफे में भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि वाजपेयी ने राजनीति और चुनावों में बढ़ते धनबल के प्रभाव को लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताया था.

रामाशीष राय के मुताबिक, आज उनकी आशंकाएं काफी हद तक सही साबित होती दिखाई दे रही हैं. उन्होंने कहा कि राजनीति में वैचारिक प्रतिबद्धता की जगह आर्थिक शक्ति और परिवारवाद का प्रभाव बढ़ रहा है, जिससे लोकतांत्रिक मूल्यों को लगातार नुकसान हो रहा है.

'संविधान और लोकतंत्र पर हो रहे प्रहार से लोकतंत्र खतरे में'

रामाशीष राय ने कहा कि संविधान, लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं पर हो रहे प्रहार से लोकतंत्र खतरे में है. इसी वैचारिक और नैतिक कारणों का हवाला देते हुए उन्होंने राष्ट्रीय लोकदल के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष पद और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से अपना इस्तीफा देने की बात कही है. उनके इस्तीफे के बाद विधानसभा चुनाव 2027 से पहले उत्तर प्रदेश में RLD के संगठन को लेकर चर्चा तेज हो गई है.