Rohaniya VidhanSabha 2027: उत्तर प्रदेश की राजनीति में वाराणसी की रोहनिया विधानसभा सीट का अपना एक अलग और बेहद अहम स्थान है. यह वही सीट है जिसने केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री और 'अपना दल (सोनेलाल)' की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल को पहली बार विधायकी का स्वाद चखाया और उनकी पार्टी को यूपी की राजनीति में एक बड़ी जीत से नवाजा. सोनेलाल पटेल के निधन के बाद इसी सीट से अपना दल के नए युग और बाद में भारतीय जनता पार्टी के साथ मजबूत गठबंधन की नींव पड़ी.
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आज रोहनिया सीट पर अपना दल (एस)के सुनील पटेल विधायक हैं जिन्होंने 2022 के चुनाव में जीत हासिल की थी. इससे पहले 2017 में भाजपा के सुरेंद्र नारायण सिंह, 2014 के उपचुनाव में सपा के महेंद्र सिंह पटेल और 2012 में अनुप्रिया पटेल यहां से विधायक चुनी गई थीं.
विकास कार्यों के बूते हैट्रिक का दावा
वर्तमान विधायक सुनील पटेल का कहना है कि उनकी पार्टी और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल लगातार क्षेत्र के विकास के लिए प्रयासरत हैं. उन्होंने बताया 'रमना, टिकड़ी और मोड़ा क्षेत्र के करीब 10 गांव बाढ़ से प्रभावित होते हैं जिसके तटबंध निर्माण के लिए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र लिखा गया था जिस पर आश्वासन मिल चुका है. इसके अलावा अखरी बाईपास से चुनार जाने वाली दो-लेन सड़क पर अत्यधिक दबाव को देखते हुए इसे फोर-लेन करने की परियोजना अंतिम चरण में है और जल्द ही इसकी मंजूरी मिलने जा रही है.'
किसानों के मुद्दों पर अपना दल (कमेरावादी) का हमला
दूसरी तरफ अपना दल (कमेरावादी) की नेता पल्लवी पटेल के गुट से 2022 में उपविजेता रहे गगन पटेल इस बार बदलाव का दावा कर रहे हैं. उनका कहना है कि 2022 में मामूली अंतर से मिली हार को इस बार जनता पाट देगी. उन्होंने आरोप लगाया कि रोहनिया में मल्टीनेशनल कंपनियों और पूंजीपतियों को जमीन देने के नाम पर किसानों की जमीनों का अधिग्रहण किया जा रहा है जिसके खिलाफ उनकी पार्टी लगातार आंदोलनरत है. पार्टी को उम्मीद है कि किसानों का यह आक्रोश 2027 में उन्हें जीत दिलाएगा.
जातीय समीकरण और सवर्ण-दलित वोट निर्णायक
रोहनिया सीट पर दोनों 'अपना दल' गुटों की नजर इसलिए है क्योंकि यहां का जातीय समीकरण कुर्मी मतदाताओं के इर्द-गिर्द घूमता है. करीब 4 लाख मतदाताओं वाली इस सीट पर लगभग 95,000 कुर्मी वोटर हैं. इसके अलावा करीब 55,000 दलित, 45,000 ब्राह्मण-भूमिहार, 35,000 यादव, 20,000 कुशवाहा, 20,000 वैश्य, 18,000 मुस्लिम और 15,000 क्षत्रिय मतदाता हैं.
स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अनुप्रिया और पल्लवी की लड़ाई के कारण कुर्मी और पिछड़ा वोट बंटना तय है. ऐसी स्थिति में ब्राह्मण, भूमिहार, दलित और यादव वोट निर्णायक भूमिका निभाएंगे. यदि पल्लवी पटेल का समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन बनता है, तो मुकाबला और अधिक रोचक हो जाएगा.
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