उत्तर प्रदेश की राजनीति से एक बेहद बड़ी खबर सामने आ रही है. बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के वरिष्ठ नेता और यूपी विधानसभा में पार्टी के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का निधन हो गया है. वह लंबे समय से कैंसर की बीमारी से जूझ रहे थे. उनकी मौत गुरूग्राम के फोर्टिस हॉस्पिटल में हुई. बलिया जिले की रसड़ा विधानसभा सीट से लगातार तीसरी बार विधायक चुने गए उमाशंकर सिंह बसपा के सबसे भरोसेमंद और बड़े चेहरों में से एक थे. उनके निधन की खबर से राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है और विभिन्न दलों के नेताओं ने उनके प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं.
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कौन थे उमाशंकर सिंह?
उमाशंकर सिंह का जन्म 2 जनवरी 1971 को बलिया जिले के खनवर गांव में हुआ था. उनके पिता घुरहू सिंह एक भूतपूर्व सैनिक थे. इंटरमीडिएट तक की शिक्षा प्राप्त करने वाले उमाशंकर सिंह ने समाज सेवा और व्यापार के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई.वे 'छात्र शक्ति कंस्ट्रक्शन कंपनी' और 'छात्र शक्ति सेवा संस्थान' से जुड़कर सामाजिक कार्यों में हमेशा सक्रिय रहे.
रसड़ा से जीत की हैट्रिक
उमाशंकर सिंह की राजनीतिक यात्रा बेहद शानदार रही. वे बलिया की रसड़ा विधानसभा सीट से लगातार तीन बार विधायक चुने गए.
2012: पहली बार 16वीं विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए.
2017: दूसरी बार 17वीं विधानसभा के लिए चुने गए.
2022: 18वीं विधानसभा चुनाव में जब बसपा को पूरे प्रदेश में भारी झटके का सामना करना पड़ा, तब भी उमाशंकर सिंह ने रसड़ा से अपनी सीट बचाकर जीत दर्ज की और विधानसभा में बसपा के इकलौते विधायक बने.
निजी जीवन और परिवार
उमाशंकर सिंह का विवाह 6 मार्च 2012 को पुष्पा सिंह के साथ हुआ था. उनके परिवार में एक बेटा और एक बेटी है. वे अपने पीछे बलिया के ग्राम खनवर नवादा का पैतृक आवास और लखनऊ के गोमती नगर स्थित आवास में भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं.
राजनीति के साथ-साथ उमाशंकर सिंह उद्योग और निर्माण क्षेत्र से भी जुड़े रहे.अपनी व्यावसायिक व्यस्तताओं के सिलसिले में उन्होंने जर्मनी और सिंगापुर जैसे देशों की यात्राएं भी कीं. समाज सेवा, अध्ययन और आम जनता से संवाद बनाए रखना उनकी विशेष अभिरुचियों में शामिल था.
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