उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में बर्तन व्यापारी विनोद साहनी की मौत के बाद हुए प्रदर्शन और सड़क जाम मामले में पुलिस ने बड़ा एक्शन लिया है. समाजवादी पार्टी की नेता काजल निषाद, राजा निषाद समेत 50 से 60 अज्ञात लोगों के खिलाफ गोंडा के परसपुर थाने में FIR दर्ज की गई है. आरोप है कि 11 सितंबर को विनोद साहनी का शव सड़क पर रखकर यातायात बाधित किया गया था. इससे पहले पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचीं काजल निषाद का पुलिस अधिकारी के साथ तीखी बहस का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था जिसमें उन्होंने पुलिस कार्रवाई की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए थे.
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सड़क जाम करने और उपद्रव पर पुलिस का मुकदमा
परसपुर थाने के उपनिरीक्षक आकाशदीप की ओर से दर्ज कराई गई तहरीर के आधार पर 12 सितंबर को यह मुकदमा दर्ज किया गया. अपर पुलिस अधीक्षक (ASP) राधेश्याम राय ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में एफआईआर दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है. इसके अलावा नवाबगंज थाना क्षेत्र में विरोध स्वरूप निकाले गए कैंडल मार्च के मामले में भी 8 नामजद और करीब 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ एक अलग एफआईआर दर्ज की गई है.
बहस का वो वीडियो जिससे चर्चा में आईं काजल निषाद
विनोद साहनी की मौत के बाद परिजनों से मिलने पहुंचीं काजल निषाद की इंस्पेक्टर संतोष सिंह से तीखी नोकझोंक हुई थी. इस दौरान काजल निषाद ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा था 'अभी कोई यादव होता या मुसलमान होता, तो तुरंत एनकाउंटर हो जाता और बुलडोजर की कार्रवाई हो जाती.'
इसके जवाब में पुलिस अधिकारी ने संयम बरतते हुए कहा था कि पुलिस नियमानुसार कार्रवाई कर रही है और उन्हें अपना काम करने दिया जाए. यह संवाद सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में रहा.
क्या था गोंडा का पूरा घटनाक्रम?
9 सितंबर को परसपुर थाना क्षेत्र के शाहपुर धनोवा निवासी 45 साल के बर्तन व्यापारी विनोद कुमार साहनी पर कुछ लोगों ने पुरानी रंजिश में धारदार हथियारों से जानलेवा हमला कर दिया. गंभीर रूप से घायल विनोद को पहले परसपुर CHC फिर गोंडा जिला अस्पताल और अंत में लखनऊ के KGMU में भर्ती कराया गया जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.
मौत की खबर फैलते ही स्थानीय निषाद समाज का गुस्सा फूट पड़ा. पुलिस ने हत्या के इस मामले में तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था. लेकिन परिजन और प्रदर्शनकारी और सख्त सजा व तुरंत इंसाफ की मांग कर रहे थे.
घटनाक्रम पर तेज हुई पूर्वांचल की राजनीति
व्यापारी की मौत के बाद यह मामला पूरी तरह से राजनीतिक रूप ले चुका है. योगी सरकार में मंत्री डॉ. संजय निषाद पहले KGMU लखनऊ के बाहर और फिर गोंडा कलेक्ट्रेट में धरने पर बैठ गए थे. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर उठाया जिसके बाद पार्टी के नेता और कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए. इसी दौरान 11 सितंबर को शव रखकर सड़क जाम करने की घटना हुई थी.
पूर्वांचल में सपा का प्रमुख चेहरा हैं काजल निषाद
काजल निषाद पूर्वांचल की राजनीति में समाजवादी पार्टी की एक प्रमुख निषाद चेहरा मानी जाती हैं. 2021 में वे समाजवादी पार्टी में शामिल हुईं. साल 2022 में उन्होंने कैंपियरगंज विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा. 2023 में सपा ने उन्हें गोरखपुर नगर निगम में मेयर प्रत्याशी बनाया. लोकसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें गोरखपुर संसदीय सीट से उम्मीदवार बनाया था.
हालांकि इन चुनावों में उन्हें जीत नहीं मिल सकी. लेकिन पार्टी के भीतर और निषाद समाज से जुड़े मुद्दों पर उनकी राजनीतिक सक्रियता लगातार बनी हुई है. अब एफआईआर दर्ज होने के बाद सपा खेमे में नाराजगी और बढ़ गई है.
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