वाराणसी की इस पटेल बाहुल्य सीट पर क्या समाजवादी पार्टी कर पाएगी वापसी?

रजत सिंह

• 05:56 PM • 18 Sep 2026

सेवापुरी विधानसभा सीट पर 2027 से पहले सियासी हलचल तेज है. बीजेपी विधायक नील रतन पटेल और सपा के पूर्व विधायक सुरेंद्र पटेल के बीच मुकाबले के साथ जातीय समीकरण, विकास और गठबंधन की राजनीति अहम मुद्दे बन रहे हैं.

CM Yogi And Akhilesh Yadav

CM Yogi And Akhilesh Yadav (File Photo)

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की सेवापुरी विधानसभा सीट हमेशा से काशी की सियासत में अपनी खास पहचान रखती है. सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत पीएम द्वारा गोद लिए गए गांव (जयापुर, नागेपुर और बरियापुर) इसी क्षेत्र में आते हैं. लगभग छह दशक का लंबा इतिहास रखने वाली यह सीट कभी समाजवादियों, कांग्रेस और वामपंथियों का अभेद्य किला हुआ करती थी. लेकिन पिछले दो चुनावों (2017 और 2022) में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और 'अपना दल (सोनेलाल)' के गठबंधन ने यहां अपनी मजबूत पकड़ बना ली है.

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2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह सीट एक बार फिर बड़े सियासी घमासान का केंद्र बन गई है. एक तरफ अस्वस्थ चल रहे बीजेपी विधायक नील रतन पटेल की बेटी क्षेत्र में कमान संभाले हुए हैं तो दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक सुरेंद्र पटेल नए सियासी व जातीय समीकरणों के साथ वापसी की पुरजोर कोशिश में हैं.

छह दशक पुराना राजनीतिक इतिहास

सेवापुरी का राजनीतिक इतिहास बेहद दिलचस्प और संघर्षपूर्ण रहा है. 1952 के पहले विधानसभा चुनाव के समय वाराणसी में भदोही और चंदौली भी शामिल थे. करीब छह दशकों तक यह इलाका समाजवादी, कांग्रेसी और वामपंथी राजनीति का गढ़ रहा. महान क्रांतिकारी समाजवादी नेता राजनारायण ने यहां समाजवाद की मजबूत नींव रखी थी. 2012 के परिसीमन से पहले इसे 'गंगापुर विधानसभा क्षेत्र' के नाम से जाना जाता था. परिसीमन के बाद सेवापुरी नई सीट बनी.

16 चुनावों के इतिहास में भगवा खेमे को यहां केवल दो बार जीत मिली है जबकि एक बार अपना दल को सफलता मिली. 2012 में सेवापुरी अस्तित्व में आने पर सपा के सुरेंद्र पटेल ने चुनाव जीता था.

2017 और 2022 का बदलाव

पिछले दो चुनावों में सेवापुरी की राजनीति ने बड़ी करवट ली.

2017 की जीत: अपना दल (एस) और बीजेपी गठबंधन के उम्मीदवार नील रतन पटेल 'नीलू' ने सपा के सुरेंद्र पटेल को हराकर इतिहास रचा.

2022 की चुनौती: 2022 चुनाव से ठीक पहले नील रतन पटेल की तबीयत बेहद खराब हो गई. वह शारीरिक रूप से जनसंपर्क करने में असमर्थ थे.

पीएम मोदी की रैली: बीजेपी ने उन पर दोबारा भरोसा जताया और खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने सेवापुरी में उनके लिए जनसभा की. व्हीलचेयर पर रहते हुए भी नील रतन पटेल ने दोबारा सुरेंद्र पटेल को शिकस्त दी.

2027 से पहले के दावे और जमीनी हकीकत

आगामी चुनाव को लेकर दोनों ही खेमों की ओर से अपनी-अपनी दावेदारी पेश की जा रही है.

विधायक पक्ष (बीजेपी/अपना दल)

नील रतन पटेल की बेटी (जो उनके प्रतिनिधि के रूप में सक्रिय हैं) का कहना है कि विधायक जी पिछले 8 सालों से गंभीर रूप से अस्वस्थ हैं. लेकिन जनता का समर्थन उनके साथ हमेशा रहा है.  2027 के चुनाव की तैयारियों के तहत तहसील, एसडीएम और थाने स्तर पर लगातार जनसंपर्क कर जनता की समस्याओं का निवारण किया जा रहा है.

विपक्ष (समाजवादी पार्टी)

पूर्व विधायक सुरेंद्र पटेल का आरोप है कि सेवापुरी की जनता ने बहुत उम्मीदों के साथ बीजेपी को जिताया था. लेकिन उनके साथ धोखा हुआ है. नौजवान, किसान और छात्र खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं. विकास के नाम पर सड़कों की मरम्मत तक नहीं कराई जा रही और पीएम द्वारा गोद लिए गए गांवों में भी काम अधूरे पड़े हैं.

सामाजिक समीकरण: किस जाति का कितना वोट बैंक?

सेवापुरी में करीब 3 लाख 38 हजार कुल मतदाता हैं. यहां का सामाजिक ताना-बाना चुनावी नतीजे तय करने में निर्णायक भूमिका निभाता है.

पटेल (कुर्मी) वोटर: -85,000 (सबसे बड़ा वोट बैंक)

भूमिहार वोटर: -75,000

ब्राह्मण वोटर: -60,000

यादव वोटर: -50,000

अन्य जातियां: -68,000

2027 के लिए क्या बन रहे हैं नए सियासी समीकरण?

स्थानीय विश्लेषकों और पत्रकारों के अनुसार, 2027 में सेवापुरी सीट पर मुकाबला बेहद कड़ा होने वाला है.

गठबंधन और 'अजय राय' फैक्टर: यदि सपा और कांग्रेस का गठबंधन कायम रहता है तो कांग्रेस के यूपी प्रदेश अध्यक्ष अजय राय (जो भूमिहार समाज से आते हैं) का प्रभाव यहां देखने को मिल सकता है. 2024 के लोकसभा चुनाव में इस क्षेत्र के भूमिहार वोटरों का रुझान कांग्रेस की तरफ दिखा था.

पटेल + भूमिहार + यादव लामबंदी: यदि भूमिहार और पटेल वोटरों का एक बड़ा हिस्सा सपा-कांग्रेस गठबंधन के साथ आता है और यादव वोट बैंक एकजुट रहता है तो एनडीए (NDA) के लिए बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है.

एनडीए की टिकट की पहेली: नील रतन पटेल के अस्वस्थ होने के कारण क्या यह सीट फिर से 'अपना दल (एस)' के पास रहेगी या बीजेपी खुद का उम्मीदवार उतारेगी? क्या नील रतन पटेल की बेटी को टिकट मिलेगा? यह देखना भी काफी महत्वपूर्ण होगा.

मॉडल ब्लॉक के रूप में विकास: सेवापुरी को देश का पहला ऐसा मॉडल ब्लॉक बनाया गया है जहां से किसान अपनी सब्जियां और खाद्यान्न सीधे एयरपोर्ट तक भेज सकते हैं. पीएम मोदी की सीधी प्राथमिकताओं में शामिल होने के कारण बीजेपी यहां विकास कार्यों के दम पर चुनावी मैदान में उतरेगी.

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