बसपा के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह के निधन के बाद मायावती ने किया था एक वादा, क्या है वो?

कुमार अभिषेक

• 08:19 AM • 07 Aug 2026

यूपी तक के खास शो 'आज का यूपी' में जानें राज्य की तीन बड़ी खबरें। बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के निधन पर भावुक हुईं मायावती, सपा का 2027 चुनाव के लिए ब्राह्मणों को साधने वाला नया नारा और अयोध्या सीट से पवन पांडेय को सपा प्रत्याशी बनाए जाने का राजनीतिक विश्लेषण.

Mayawati reaction on Umashankar Singh

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यूपी तक के खास शो 'आज का यूपी' में राज्य की तीन बड़ी खबरों का विस्तृत विश्लेषण किया गया है. आज की प्रमुख खबरों में बलिया की रसड़ा सीट से बसपा के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का निधन और उन पर मायावती की भावुक प्रतिक्रिया से जुड़ी है.  दूसरी खबर 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए ब्राह्मणों को साधने के लिए समाजवादी पार्टी द्वारा गढ़ा गया नया नारा, और तीसरी खबर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा अयोध्या विधानसभा सीट से तेज नारायण पांडेय उर्फ पवन पांडेय को प्रत्याशी घोषित किए जाने का राजनीतिक दांव से संबंधित है.

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1. बसपा विधायक उमाशंकर सिंह का निधन: मायावती हुईं भावुक, बेटे को राजनीति में आगे बढ़ाने का वादा

उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए एक दुखद खबर सामने आई, जब बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के वरिष्ठ नेता और बलिया की रसड़ा विधानसभा सीट से लगातार तीन बार के विधायक उमाशंकर सिंह का लंबे समय तक कैंसर से जूझने के बाद निधन हो गया. वर्तमान उत्तर प्रदेश विधानसभा में वह बसपा के एकमात्र विधायक थे. उनके पार्थिव शरीर के लखनऊ स्थित आवास पहुंचने पर बसपा सुप्रीमो मायावती उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचीं.

आयरन लेडी के रूप में जानी जाने वाली मायावती इस दौरान बेहद भावुक दिखीं. उन्होंने उमाशंकर सिंह को अपना सगा भाई बताते हुए कहा कि जब बुरे वक्त में कई बड़े नेताओं और अपनों ने पार्टी का साथ छोड़ दिया, तब भी उमाशंकर सिंह चट्टान की तरह उनके साथ खड़े रहे. मायावती ने याद किया कि वह हर साल रक्षाबंधन पर उन्हें राखी बांधती थीं. इस दुख की घड़ी में बसपा प्रमुख ने उनके परिवार को सांत्वना देते हुए घोषणा की कि यदि परिवार और क्षेत्र की जनता चाहेगी, तो वह उमाशंकर सिंह के बेटे को राजनीति में पूरा मौका देंगी और आगे बढ़ाएंगी.

2. 'ब्राह्मण देगा जनादेश, मुख्यमंत्री होंगे अखिलेश': बसपा की तर्ज पर सपा ने गढ़ा नया नारा

2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए राजनीतिक बिसात बिछनी शुरू हो गई है. समाजवादी पार्टी ने बहुजन समाज पार्टी के 2007 वाले सोशल इंजीनियरिंग फार्मूले की तर्ज पर ब्राह्मणों को अपने पाले में लाने की बड़ी कवायद शुरू की है. जिस तरह 2007 में बसपा ने 'ब्राह्मण शंख बजाएगा, हाथी बढ़ता जाएगा' का नारा दिया था, ठीक उसी तर्ज पर अब सपा के राज्य मुख्यालय में आयोजित 'ब्राह्मण सम्मेलन' से नया नारा गूंज उठा है "ब्राह्मण देगा जनादेश, मुख्यमंत्री होंगे अखिलेश."

सपा नेताओं का मानना है कि प्रदेश का ब्राह्मण समाज वर्तमान सरकार से उपेक्षित महसूस कर रहा है. अपने 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फार्मूले में 'पी' का मतलब पंडित जोड़ते हुए सपा अब इस वर्ग को अपने साथ मजबूती से जोड़ने में जुट गई है. हालिया उपचुनावों के रुझानों को देखते हुए सपा इस रणनीति के जरिए 2027 के सत्ता समीकरण को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है.

3. 2027 का शंखनाद: अखिलेश यादव ने अयोध्या से पवन पांडेय को बनाया सपा उम्मीदवार

उत्तर प्रदेश की सबसे हाई-प्रोफाइल सीटों में से एक अयोध्या (सदर) विधानसभा क्षेत्र को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बहुत बड़ा राजनीतिक दांव खेला है. अखिलेश यादव ने लखनऊ में आयोजित सम्मेलन के दौरान ऐलान किया कि पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडेय उर्फ 'पवन पांडेय' 2027 के चुनाव में अयोध्या से पार्टी के प्रत्याशी होंगे.

छात्र राजनीति से उभरे पवन पांडेय 2012 में भी बीजेपी के कद्दावर नेता लल्लू सिंह को हराकर अयोध्या से विधायक रह चुके हैं. अखिलेश यादव ने विश्वास जताया कि पवन पांडेय इस बार फिर अयोध्या से बड़ी जीत दर्ज करेंगे. श्रीराम जन्मभूमि मंदिर क्षेत्र के इसी विधानसभा के अंतर्गत आने के कारण चुनाव से काफी पहले उम्मीदवार की घोषणा कर सपा ने बीजेपी को उसके गढ़ में सीधी चुनौती देने का संदेश दिया है.

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