यूपी Tak के खास शो 'आज का यूपी' में हम राज्य की तीन बड़ी खबरों का विश्लेषण करते हैं. आज के शो में पहली बड़ी खबर गाजीपुर में हुए कमलेश बिंद के एनकाउंटर से जुड़ी है जिसने पूर्वांचल की सियासत को पूरी तरह गर्मा दिया है और समाजवादी पार्टी इस पर खुलकर योगी सरकार को घेर रही है. दूसरी खबर गाजीबाद एनकाउंटर को लेकर सपा की रहस्यमयी चुप्पी पर है, जहां कैमरे पर हुई हत्या के आरोपी असद के ढेर होने पर विपक्ष ने मौन साध लिया है. वहीं तीसरी बड़ी खबर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जन्मदिन के मौके पर आए उनके एक तीखे बयान की है जिसमें नल-जल योजना के बहाने किए गए कटाक्ष पर अखिलेश यादव बुरी तरह भड़क गए हैं और दोनों नेताओं के बीच की राजनीतिक व निजी तल्खी खुलकर सामने आ गई है.
ADVERTISEMENT
1. गाजीपुर एनकाउंटर: कमलेश बिंद की मौत पर पूर्वांचल में सियासी उबाल
गाजीपुर में दो दिन पहले हुए एक एनकाउंटर ने उत्तर प्रदेश की सियासत में नया मोड़ ला दिया है. दरअसल होटल कारोबारी विनीत राय की उनके दफ्तर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 1 लाख रुपये के इनामी बदमाश कमलेश बिंद को एक मुठभेड़ में ढेर कर दिया. इस मामले में कुल चार लोग (दो ब्राह्मण, एक यादव और एक बिंद) नामजद थे जिनमें से मुख्य आरोपी कमलेश बिंद का एनकाउंटर हुआ है.
परिजनों और सपा ने उठाए सवाल
कमलेश बिंद का शव जब उसके घर पहुंचा, तो स्थानीय लोगों और परिजनों ने भारी हंगामा करते हुए पुलिस पर पथराव कर दिया, जिसके बाद पूरा इलाका छावनी में तब्दील हो गया. मात्र एक महीने पहले (27 अप्रैल को) ब्याही गई कमलेश की पत्नी और उसके परिजनों का सीधा आरोप है कि यह एक 'फेक एनकाउंटर' है. पुलिस ने उसे घर से उठाया था और 5 दिन कोतवाली में रखने के बाद जंगल में ले जाकर मार दिया.
समाजवादी पार्टी ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ लिया है. देश से बाहर होने के बावजूद अखिलेश यादव ने इस पर ट्वीट किया. वहीं मैनपुरी में डिंपल यादव ने साफ कहा कि 'जब पुलिस मुजिरम को आसानी से पकड़ सकती थी तो एनकाउंटर क्यों किया गया? भारतीय जनता पार्टी नियम-कानून से सरकार नहीं चलाना चाहती.' राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिंद (निषाद/मल्लाह) बिरादरी का इस इलाके में बड़ा वोट बैंक है, जिसे बीजेपी से दूर करने के लिए सपा इसे एक बड़ा सियासी हथियार बना रही है. हालांकि पुलिस का कहना है कि कमलेश बिंद एक शातिर हिस्ट्रीशीटर था और उस पर पहले से 7 मुकदमे दर्ज थे.
2. गाजियाबाद एनकाउंटर: आरोपी असद की मौत पर आखिर क्यों चुप है सपा?
गाजीपुर एनकाउंटर पर जहां समाजवादी पार्टी पूरी तरह मुखर और हमलावर नजर आ रही है. वहीं हाल ही में गाजियाबाद में हुए एक अन्य एनकाउंटर पर उसकी चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है. गाजियाबाद में असद नाम के एक आरोपी ने अपने ही दोस्त सूर चौहान की दिनदहाड़े चाकुओं से गोदकर बेरहमी से हत्या कर दी थी. पुलिस ने इस घटना के महज 24 घंटे के भीतर मुस्तैदी दिखाते हुए आरोपी असद को एक मुठभेड़ में ढेर कर दिया.
चुप्पी के पीछे की वजह
सियासी गलियारों में चर्चा है कि गाजियाबाद और गाजीपुर के एनकाउंटर को लेकर सपा का रुख एकदम अलग क्यों है? इसका मुख्य कारण यह है कि असद का गुनाह और उसकी चाकूबाजी की पूरी वारदात कैमरे में साफ कैद हुई थी, जिसे पूरी दुनिया ने नंगी आंखों से देखा था. साक्ष्य इतने पुख्ता थे कि वहां किसी भी तरह की राजनीति की गुंजाइश नहीं थी. इसके विपरीत गाजीपुर मामले में जातिगत समीकरण (बिंद समाज) और परिवार के आरोपों ने सपा को एक ऐसा मौका दे दिया जिसके जरिए वह पूर्वांचल में योगी सरकार की एनकाउंटर पॉलिसी और कानून व्यवस्था की घेराबंदी कर सके.
3. सीएम योगी का जन्मदिन: एक 'कटाक्ष' से भड़के अखिलेश, निजी तल्खी हुई चरम पर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जन्मदिन के मौके पर सुबह से ही उन्हें बधाई देने वालों का तांता लगा रहा जिसमें बसपा सुप्रीमो मायावती भी शामिल थीं. लेकिन राजनीतिक हलकों में सबसे ज्यादा ध्यान अखिलेश यादव के रुख ने खींचा. अखिलेश यादव की तरफ से जन्मदिन की शुभकामनाओं के बजाय मुख्यमंत्री और सरकार के खिलाफ एक के बाद एक तीन तीखे ट्वीट्स सामने आए.
बयान जिसने बढ़ाई कड़वाहट
इस तल्खी की असल वजह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का वह बयान माना जा रहा है जो उन्होंने अपने एक भाषण के दौरान दिया था. सीएम योगी ने 'हर घर नल योजना' की प्रगति पर बात करते हुए टोटी/नल की चोरी को लेकर एक ऐसा तीखा कटाक्ष कर दिया जिसे सीधे तौर पर अखिलेश यादव से जोड़कर देखा गया (याद दिला दें कि पूर्व में सरकारी आवास खाली करने के समय अखिलेश यादव पर टोटियां ले जाने के आरोप उथले स्तर पर उछाले गए थे). सीएम के इस बयान पर कार्यक्रम में जमकर ठहाके भी लगे.
अखिलेश यादव का पलटवार
इस कटाक्ष से बिफरे अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर तीखा पलटवार करते हुए लिखा 'लत से गलत की ओर... वनस्पति विवेक छीन लेती है और निर्दोष लोगों की हत्याओं का खौफ रातों की नींद छीन लेता है. पूरे होश में इतने ऊंचे पद पर बैठकर इतना निकृष्ट बयान कोई नहीं देता. कुछ लोग अपनी असफलता के लिए दूसरों को दोषी ठहराते हैं. यह हार की हताशा बोल रही है, क्योंकि अब कुदरत का बुलडोजर घूम गया है.'
इस पूरी बयानबाजी से साफ है कि उत्तर प्रदेश के दो शीर्ष नेताओं के बीच की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता अब निजी तल्खी के उस स्तर पर पहुंच चुकी है, जहां शिष्टाचार के नाते दी जाने वाली जन्मदिन की शुभकामनाएं भी दूर की कौड़ी साबित हो रही हैं.
ADVERTISEMENT










