Charcha Mein: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव इस समय जमीन खरीद-फरोख्त और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर विपक्ष के निशाने पर हैं. लेकिन इस सियासी घमासान के बीच एक चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब यूपी के विपक्षी नेता और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मोहन यादव का खुला समर्थन कर दिया. अखिलेश ने इसे बीजेपी की अंदरूनी साजिश करार दिया. अखिलेश के इस बयान के बाद सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने उन पर तीखा हमला बोला है. राजभर ने इस पूरे विवाद में दो अहम किरदारों सपा के कद्दावर नेता चंद्रपाल सिंह यादव और आईएएस अधिकारी भरत यादव का नाम घसीटते हुए सपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं.
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मोहन यादव को बदनाम करने की बीजेपी की साजिश - अखिलेश यादव
मुख्यमंत्री मोहन यादव पर लग रहे आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर एक बयान दिया, जो तेजी से वायरल हो रहा है. अखिलेश ने कहा 'मोहन यादव जी को बदनाम करने के लिए यह खुद बीजेपी ने ही साजिश रची है ताकि उन्हें सीएम की कुर्सी से हटाया जा सके.' अखिलेश ने आगे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पर भी निशाना साधा और कहा कि अगर मोहन यादव पर आरोप हैं, तो यूपी के मुख्यमंत्री ने भी 300-600 एकड़ जमीन ली है. उन्होंने मोहन यादव का बचाव करते हुए कहा कि वह राजनीति में आने से पहले रियल एस्टेट का काम करते थे, इसलिए जमीन लेना कोई नई बात नहीं है.
राजभर का पलटवार
अखिलेश यादव के इस बयान पर यूपी के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने तीखा पलटवार किया. राजभर ने दावा किया कि अखिलेश यादव की तिलमिलाहट की असली वजह आईएएस अधिकारी भरत यादव हैं. राजभर के मुताबिक, भरत यादव ने अखिलेश और अपने करीबियों से उन जमीनों में भारी निवेश करवाया है जहां से हाईवे गुजरने वाले हैं. क्योंकि हाईवे का रूट वही तय करते हैं. राजभर ने सैफाई परिवार पर आरोप लगाते हुए कहा कि इन्होंने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे के निर्माण में भी यही खेल किया था और अपने फायदे के लिए एक्सप्रेस-वे को अनावश्यक रूप से घुमाकर 30 किलोमीटर बढ़ा दिया था.
कौन हैं चर्चा में आए ये दो अहम किरदार?
इस पूरे सियासी विवाद के केंद्र में दो नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं. आइए जानते हैं वो कौन हैं?
1. चंद्रपाल सिंह यादव
चंद्रपाल सिंह यादव झांसी के रहने वाले हैं और बुंदेलखंड क्षेत्र में समाजवादी पार्टी के सबसे मजबूत स्तंभों में से एक माने जाते हैं. वह मुलायम सिंह यादव के बेहद विश्वासपात्र रहे हैं और सपा संगठन में कोषाध्यक्ष की बड़ी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं.
संसदीय और विधायी करियर: वह 1996 से 2001 तक सपा के विधायक रहे. इसके बाद साल 2004 से 2009 तक झांसी लोकसभा सीट से सपा के सांसद रहे. पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भी भेजा, जहां वह 2014 से 2020 तक सांसद रहे.
वर्तमान में वह कृषक भारतीय कोऑपरेटिव लिमिटेड (कृभको) के वाइस चेयरमैन हैं. इसके अलावा वह नाफेड (NAFED) और इफको (IFFCO) के डायरेक्टर भी रह चुके हैं. उनकी बेटी प्रियंका यादव की शादी आईएएस अधिकारी भरत यादव से हुई है.
भरत यादव कौन हैं
भरत यादव 2008 बैच के मध्य प्रदेश कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं. वह मूल रूप से एमपी के ही रहने वाले हैं. उन्होंने ग्वालियर यूनिवर्सिटी से इंग्लिश लिटरेचर में बीए और जीवाजी यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में एमए किया है. वह होशंगाबाद में असिस्टेंट कलेक्टर, नरसिंहपुर जिला पंचायत में सीईओ, और सिवनी, ग्वालियर, जबलपुर व बालाघाट जैसे अहम जिलों के कलेक्टर रह चुके हैं.
सीएम मोहन यादव से नजदीकी: भरत यादव को मुख्यमंत्री मोहन यादव की 'हार्डकोर टीम' का हिस्सा और बेहद विश्वस्त अधिकारी माना जाता है. वह सीएम के सचिव भी रहे. हालांकि सत्ता पक्ष के कुछ मंत्रियों और विपक्ष की शिकायतों के बाद कथित तौर पर उनका ट्रांसफर कर दिया गया था. मौजूदा समय में भरत यादव 'मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन' (MPRDC) के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) हैं. इसके साथ ही वह शहरी विकास विभाग में ओएसडी कम कमिश्नर और हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट विभाग में एडिशनल सेक्रेटरी का अहम कार्यभार संभाल रहे हैं. संयोग से यह वही विभाग हैं जो राज्य के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और हाईवे प्रोजेक्ट्स को नियंत्रित करते हैं.
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