पूर्वांचल की पॉलिटिक्स को पलट देंगे अखिलेश यादव के करीबी सांसद राजीव राय? खूब है इनकी चर्चा

Who is Rajeev Rai: मऊ-घोसी से सपा सांसद राजीव राय इन दिनों राजनीतिक विवादों के केंद्र में हैं. जानिए उनका राजनीतिक सफर, ए.के. शर्मा के साथ बढ़ा टकराव, पुलिस विवाद, भूमिहार राजनीति में उनकी पकड़ और अखिलेश यादव से करीबी रिश्तों की पूरी कहानी.

Rajeev Rai Story

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सुषमा पांडेय

21 Jun 2026 (अपडेटेड: 21 Jun 2026, 09:24 AM)

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Who is Rajeev Rai: उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल की सियासत इस समय पूरी तरह गर्माई हुई है. इस सियासी भूचाल के केंद्र में हैं समाजवादी पार्टी के एक ऐसे सांसद जो न सिर्फ जमीन पर बल्कि सोशल मीडिया पर भी बेहद एक्टिव रहते हैं. हम बात कर रहे हैं मऊ-घोसी से सपा सांसद राजीव राय की. राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले लोग जानते हैं कि इस समय पूर्वांचल की भूमिहार पॉलिटिक्स किस तरह राजीव राय के इर्द-गिर्द घूम रही है. हाल ही में एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान कैबिनेट मंत्री ए.के. शर्मा के साथ शुरू हुआ उनका 'क्रेडिट वॉर' अब पुलिस को खुलेआम धमकाने और करीबियों पर एफआईआर तक पहुंच गया है. मामला इतना बढ़ चुका है कि इसकी गूंज मऊ से लेकर लखनऊ तक सुनाई दे रही है. आइए जानते हैं कि आखिर उस दिन मंच पर क्या हुआ था और कौन हैं अखिलेश यादव के सबसे भरोसेमंद माने जाने वाले सांसद राजीव राय.

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भयंकर गुस्से में दिखे सांसद

हाल ही में सोशल मीडिया पर राजीव राय का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें वे भारी गुस्से में पुलिसकर्मियों को धमकाते नजर आ रहे हैं. सांसद का आरोप है कि मऊ में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम में बीजेपी के 'गुंडों' को पुलिस का पूरा संरक्षण मिला, जिसकी वजह से सपा कार्यकर्ताओं को डराया-धमकाया गया.

वीडियो में राजीव राय सीधे तौर पर कहते दिखे कि 'यह मेरी शालीनता थी कि मंत्री जी आ रहे थे तो हम अपने संस्कार के मुताबिक रुक गए थे. अगर मैं एक इशारा कर दूं तो समाजवादी पार्टी के लोग इन्हें सीधा कर देंगे. इन अपराधियों को अगर मैं छोड़ दूं तो समाजवादी इन्हें दौड़ा-दौड़ा कर मारेंगे.'

क्या है पूरा विवाद?

दरअसल, मऊ में रेलवे परियोजनाओं के शिलान्यास और विकास कार्यों की सौगात का एक कार्यक्रम था. पिछले काफी समय से सोशल मीडिया पर ए.के. शर्मा (बीजेपी) और राजीव राय (सपा) के समर्थकों के बीच इस बात का 'क्रेडिट गेम' चल रहा था कि मऊ के विकास का असली हीरो कौन है? बीजेपी समर्थक इसे 'डबल इंजन' सरकार का कमाल बता रहे थे, तो सपा समर्थक दावा कर रहे थे कि सांसद जी ने दिल्ली तक को हिलाकर यह काम करवाया है.

जब दोनों नेता मंच पर आमने-सामने आए तो नीचे समर्थकों में भी नारेबाजी और टकराव की स्थिति बन गई. माहौल तब और बिगड़ गया जब मंच से मीडिया को संबोधित करते हुए मंत्री ए.के. शर्मा ने 'भू-माफिया' और भूमि कब्जाने का जिक्र किया. सपा समर्थकों का मानना था कि यह सीधा निशाना राजीव राय पर था, जिसके बाद कार्यक्रम में भारी हंगामा हो गया.

पुलिसि एक्शन और अखिलेश यादव का स्टैंड

इस पूरे बवाल के बाद पुलिस ने लॉ एंड ऑर्डर बिगड़ने की आशंका के तहत राजीव राय के बेहद करीबी कार्यकर्ताओं पर सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की है. इस पर राजीव राय भड़क गए हैं और उनका कहना है कि 'उल्टा चोर कोतवाल को डांटे'. वे इसे एकतरफा कार्रवाई बताकर बड़े आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं.

इस मामले में खुद सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव भी कूद पड़े हैं. अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरों को बकायदा सर्कल करके पोस्ट किया और दावा किया कि बीजेपी ने जानबूझकर बाहर से हुड़दंगियों को माहौल बिगाड़ने के लिए भेजा था. हालांकि स्थानीय सूत्रों के अनुसार, हुटिंग करने वाले लोग बाहर के नहीं बल्कि मऊ और आसपास के जिलों के ही बीजेपी कार्यकर्ता थे.

ओम प्रकाश राजभर का बड़ा दावा

राजीव राय सिर्फ ए.के. शर्मा से ही नहीं बल्कि सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर से भी सीधे मोर्चे पर हैं. राजभर लगातार दावा कर रहे हैं कि समाजवादी पार्टी के सांसदों में जल्द ही बड़ी टूट होगी. जब ऐसा होगा, तो बीजेपी के खेमे में जाने वाले पहले सांसद राजीव राय और बलिया के सनातन पांडे होंगे. हालांकि राजीव राय इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए राजभर पर जमकर बरस रहे हैं. गौरतलब है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में राजीव राय ने राजभर के बेटे को ही घोसी सीट पर करारी शिकस्त दी थी.

कौन हैं राजीव राय 

राजीव राय उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के सुरही गांव के रहने वाले हैं। वे एक किसान के बेटे हैं. राजनीति के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में इनका बड़ा कारोबार है. वे बेंगलुरु के प्रसिद्ध एवी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस और इम्पैक्ट ग्रुप के संस्थापक और अध्यक्ष हैं जो इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट और नर्सिंग के कॉलेज चलाते हैं. 2024 के चुनावी हलफनामे के मुताबिक, उनकी कुल संपत्ति लगभग 49 करोड़ रुपये है.

राजीव राय ने साल 2005 में सपा की सदस्यता ली थी. वे पार्टी के राष्ट्रीय सचिव और आधिकारिक प्रवक्ता भी रह चुके हैं. उन्हें अखिलेश यादव की कोर लीडरशिप का हिस्सा और बेहद भरोसेमंद माना जाता है.

भूमिहार राजनीति के बड़े चेहरे कैसे बने? 

साल 2021 में राजीव राय के घर पर आयकर विभाग की बड़ी रेड पड़ी थी. उस वक्त चर्चा थी कि वे घोसी से विधानसभा चुनाव लड़ने वाले हैं. इस रेड के बाद पूर्वांचल में एक बड़ा 'भूमिहार सेंटीमेंट' जागा जिसे लोगों ने समाज को दबाने की कोशिश के रूप में देखा. अखिलेश यादव ने तुरंत उन्हें लखनऊ बुलाकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की और इसे सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग बताया. इस घटना ने राजीव राय को एक बड़े भूमिहार नेता के तौर पर स्थापित कर दिया जिसका फायदा उन्हें 2024 के चुनाव में मिला.