लखनऊ के अलीगंज स्थित पुरनिया इलाके में हुए भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की मौत के बाद सियासत भी तेज हो गई है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने घटना स्थल का दौरा किया और योगी सरकार पर कई सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि अगर सुरक्षा नियमों का पालन हुआ होता तो इतना बड़ा हादसा नहीं होता.
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अखिलेश यादव ने कहा, "मुख्यमंत्री जी कहते थे कि 24 घंटे में बुलडोजर चल जाएगा. क्या उस बिल्डिंग पर आज तक बुलडोजर चला? ये सरकार अहंकार में चूर है. उन्हें न कुछ दिखाई देता है और न ही कुछ समझ में आता है."
हादसे क्यों नहीं रुकते: अखिलेश
अखिलेश यादव ने सरकार की ओर से एसआईटी गठन पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि पिछले 10 साल में हर बड़े हादसे के बाद एसआईटी बनाई जाती है, लेकिन सवाल है कि ऐसी घटनाएं बार-बार क्यों हो रही हैं.
उन्होंने कहा, "हर घटना में एसआईटी बन जाती है. ऐसा लगता है जैसे सरकार है ही नहीं. अगर सरकार है तो नियमों का पालन क्यों नहीं कराया जाता? भवन का नक्शा और दूसरी मंजूरियां तभी मिलती हैं जब फायर एनओसी मिलती है. फिर यह एनओसी किस आधार पर दी गई? किन लोगों ने अपनी जेबें भरीं?"
सपा प्रमुख ने हादसे में जान गंवाने वाले युवाओं को परिवारों का सहारा बताते हुए कहा कि यह सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि कई परिवारों के भविष्य के खत्म होने जैसा है. उन्होंने कहा, "सबसे बड़ा दुख परिवार के किसी सदस्य को खोने का होता है. अगर सुरक्षा मानकों का पालन हुआ होता तो इतने लोगों की जान नहीं जाती. जो बच्चे और युवा मारे गए हैं, वे अपने परिवारों का भविष्य थे."
एक करोड़ रुपये मुआवजे की मांग
अखिलेश यादव ने मृतकों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की. साथ ही उन्होंने कहा कि सभी घायलों का इलाज सरकार पूरी तरह मुफ्त कराए. उन्होंने कहा, "सरकार अगर मदद नहीं करेगी तो कौन करेगा? घायलों का मुफ्त इलाज होना चाहिए और जिन परिवारों ने अपने लोगों को खोया है, उन्हें कम से कम एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जानी चाहिए."
क्या है पूरा मामला?
अलीगंज के पुरनिया इलाके में सोमवार को एक व्यावसायिक इमारत में भीषण आग लग गई थी. हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हुए. घटना के बाद सरकार ने एसआईटी का गठन किया है. पुलिस ने मामला दर्ज कर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है. वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर बिजली विभाग, फायर विभाग और लखनऊ विकास प्राधिकरण के चार अधिकारियों को निलंबित किया गया है. मामले की जांच जारी है.
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