UP BJP New Team List: उत्तर प्रदेश भाजपा ने अपनी नई प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा कर दी है. उपाध्यक्ष, महामंत्री और मंत्रियों के साथ-साथ पार्टी ने अपने छह प्रमुख मोर्चों के प्रदेश अध्यक्षों के नाम भी तय कर दिए हैं. खास बात यह है कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले इन मोर्चा अध्यक्षों पर अलग-अलग सामाजिक वर्गों तक पार्टी की पहुंच बढ़ाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी.
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कौन-कौन बने मोर्चा अध्यक्ष?
- युवा मोर्चा - रोहित मिश्रा
- पिछड़ा मोर्चा - प्रकाश पाल
- किसान मोर्चा - देवेंद्र सिंह
- अनुसूचित मोर्चा - अशोक रावत
- महिला मोर्चा - सरोज कुशवाह
- अनुसूचित जनजाति मोर्चा - विद्याभूषण गोंड
इन सभी को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
2027 चुनाव में क्यों अहम हैं मोर्चा अध्यक्ष?
भाजपा का संगठन सिर्फ प्रदेश और जिला इकाइयों तक सीमित नहीं है. पार्टी विभिन्न वर्गों और समुदायों तक पहुंच बनाने के लिए अलग-अलग मोर्चों के जरिए काम करती है.
2027 विधानसभा चुनाव से पहले ये मोर्चा अध्यक्ष अपने-अपने वर्गों के बीच अभियान चलाएंगे, बैठकें करेंगे, नए कार्यकर्ताओं को जोड़ेंगे और सरकार की योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने का काम करेंगे. पार्टी के लिए जमीनी स्तर पर फीडबैक जुटाने की जिम्मेदारी भी इन्हीं के पास होती है.
आखिर मोर्चा क्या होता है?
राजनीतिक दलों में "मोर्चा" एक विशेष संगठनात्मक इकाई होती है, जो किसी खास वर्ग या समूह के बीच काम करती है.
उदाहरण के लिए:
- युवा मोर्चा - युवाओं के बीच संगठन मजबूत करता है.
- महिला मोर्चा - महिलाओं से जुड़े मुद्दों और कार्यक्रमों पर काम करता है.
- किसान मोर्चा - किसानों के बीच पार्टी की पहुंच बढ़ाता है.
- पिछड़ा मोर्चा - अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) समुदाय के बीच काम करता है.
- अनुसूचित मोर्चा - अनुसूचित जाति (SC) वर्ग से जुड़े मुद्दों पर फोकस करता है.
- अनुसूचित जनजाति मोर्चा - जनजातीय समाज के बीच संगठन को मजबूत करता है.
मोर्चा अध्यक्ष क्या करता है?
मोर्चा अध्यक्ष अपने मोर्चे का सबसे बड़ा प्रदेश स्तरीय पदाधिकारी होता है. उसकी प्रमुख जिम्मेदारियां होती हैं; जैसे- पूरे प्रदेश में संगठन का विस्तार करना, जिला और मंडल स्तर की टीम बनाना, सदस्यता अभियान चलाना, वर्ग विशेष के मुद्दों को पार्टी नेतृत्व तक पहुंचाना, चुनाव के दौरान बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना और सरकार और पार्टी की नीतियों का प्रचार करना.
यानी सरल शब्दों में कहें तो मोर्चा अध्यक्ष किसी एक सामाजिक वर्ग और पार्टी संगठन के बीच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होता है. इसी वजह से भाजपा समेत लगभग सभी बड़े राजनीतिक दल चुनाव से पहले मोर्चों को मजबूत करने पर विशेष जोर देते हैं.
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