मुलायम सिंह यादव ने दुनिया छोड़ने से 2 दिन पहले पोती अदिति को दिया था आखिरी आशीर्वाद... सिर पर हाथ रख कही थी ये बात

साल 2022 में निधन से ठीक दो दिन पहले मेदांता अस्पताल में मुलायम सिंह यादव ने अपनी लाडली पोती अदिति यादव से क्या कहा था? सैफई के प्रधान रामफल वाल्मीकि ने सुनाया नेताजी का वो आखिरी भावुक किस्सा.

Aditi Yadav

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सुषमा पांडेय

• 08:20 AM • 14 Jun 2026

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मुलायम सिंह यादव के परिवार की तीसरी पीढ़ी की बेटी अदिति यादव इन दिनों चर्चा में हैं. दरअसल, सोशल मीडिया पर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव की बेटी अदिति यादव के खिलाफ कुछ लोगों द्वारा अभद्र पोस्ट और गलत टिप्पणियां की गईं, जिसमें शब्दों की मर्यादाओं को लांघा गया. उन पर चोरी तक के इल्जाम लगाए गए. महज 23 साल की अदिति यादव के खिलाफ इस्तेमाल की गई इस अभद्र भाषा के बाद समाजवादी पार्टी के समर्थकों और लोगों में भारी गुस्सा देखा जा रहा है. इस मामले को लेकर जगह-जगह सड़कों पर प्रदर्शन भी देखने को मिल रहे हैं.

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इस पूरे प्रकरण में प्रतापगढ़ में एफआईआर दर्ज करवाई गई है, जबकि कानपुर में भी तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर जब भी अखिलेश यादव और शिवपाल यादव से सवाल पूछा गया, तो वे काफी गुस्से में नजर आए. उन्होंने इस मामले पर सरकार और पुलिस को कोसा है और कई सवाल उठाए हैं.

इस पूरे विवाद के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सामने आए हैं और उन्होंने आश्वासन दिलाया है कि बेटी सबका सम्मान है और जो कुछ भी अदिति के साथ हुआ है, उसके गुनहगारों को बख्शा नहीं जाएगा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जैसे ही यह मामला उनके संज्ञान में आया, उन्होंने तुरंत एफआईआर दर्ज करने के आदेश दे दिए. मुख्यमंत्री का यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिस पर जनता और समर्थकों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. 

कौन हैं अदिति यादव? नेताजी की थीं सबसे दुलारी

अदिति यादव के करीबियों और सैफई के प्रधान रामफल वाल्मीकि से मिली जानकारी के अनुसार, मुलायम सिंह यादव (नेताजी) के परिवार में कोई बेटी नहीं थी, जिसका नेताजी को बड़ा दुख था. लेकिन जब उनके घर पोती का जन्म हुआ, तो मुलायम सिंह यादव ने उसे 'लक्ष्मी' कहकर पुकारा था. हॉस्पिटल पहुंचने पर नेताजी उसे गोद में लेकर झूम उठे थे. कार्यक्रमों के दौरान भी अदिति हमेशा नेताजी की गोदी में ही नजर आती थीं.

मेदांता अस्पताल का वो आखिरी आशीर्वाद

साल 2022 में जब मुलायम सिंह यादव की तबीयत बेहद नासाज थी और उन्होंने मेदांता अस्पताल में अंतिम सांसें ली थीं, तो उनके निधन से ठीक दो दिन पहले अदिति उनसे मिलने अस्पताल पहुंची थीं. सैफई के प्रधान रामफल वाल्मीकि के अनुसार, उस वक्त भावुक नेताजी ने अदिति को अपने नजदीक बैठाया, उसके सिर पर हाथ फेरा और कहा था- खूब पढ़ना बेटा, नाम रोशन करना.

पढ़ाई में ब्रिलियंट और स्पोर्ट्स में भी कमाया नाम

अदिति यादव बेहद होश्यार, पढ़ी-लिखी, समझदार और फोकस्ड मानी जाती हैं. उन्होंने लखनऊ के लामा गर्ल्स कॉलेज से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की. साल 2020 में जब उन्होंने 12वीं कक्षा पास की, तो उनके 98% अंक आए थे. इसके बाद वह उच्च शिक्षा के लिए लंदन चली गईं. उन्होंने यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन से 'पॉलिटिक्स और इंटरनेशनल रिलेशंस' में ग्रेजुएशन किया है.

पढ़ाई के अलावा वह स्पोर्ट्स में भी काफी आगे रही हैं:

घुड़सवारी: मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने घुड़सवारी में कई मेडल्स जीते हैं.

बैडमिंटन: वह बैडमिंटन में स्टेट लेवल से लेकर नेशनल लेवल तक खेल चुकी हैं और ख्याति प्राप्त की है.

क्या अदिति यादव बनेंगी अखिलेश की सियासी उत्तराधिकारी?

अदिति यादव की राजनीतिक सक्रियता को देखकर साल 2022 से ही यह चर्चा तेज है कि क्या वही अखिलेश यादव की उत्तराधिकारी होंगी?

2022 का मैनपुरी उपचुनाव: नेताजी के निधन के बाद जब मैनपुरी लोकसभा सीट पर उपचुनाव हुआ और उनकी मां डिंपल यादव चुनावी मैदान में उतरीं, तब 20 साल की उम्र में अदिति पहली बार सक्रिय रूप से चर्चा में आईं. उन्होंने हर जनसभा में भाग लिया और महिलाओं के बीच जाकर किसी को अम्मा तो किसी को चाची-काकी कहकर गले लगाया.

2024 का लोकसभा चुनाव: इस चुनाव में अदिति ने अपने पिता अखिलेश यादव के लिए कन्नौज में जमकर प्रचार किया. कन्नौज में उनकी नुक्कड़ सभाएं काफी चर्चा में रहीं. इन सभाओं में उनके साथ 'निधि यादव' भी नजर आती थीं, जिन्हें एक मेंटोर के तौर पर रखा गया है ताकि अदिति सियासी ककहरे को पढ़ और समझ सकें.

पार्लियामेंट का वो वाकया: 3 अप्रैल 2025 को अदिति यादव ने पहली बार अपनी मां डिंपल यादव के साथ संसद (पार्लियामेंट) के अंदर कदम रखा था, जिसके बाद उनके पॉलिटिक्स में आने की अटकलें और तेज हो गई थीं.

खुद अखिलेश यादव ने इंटरव्यू में क्या कहा?

एक कार्यक्रम के दौरान जब अखिलेश यादव से अदिति के पॉलिटिकल डेब्यू और उनकी सक्रियता को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इसे सहर्ष स्वीकार किया. अखिलेश यादव ने कहा, "सीखना चाहिए. यह जो जेंजी है, इसको भी समझना चाहिए कि हमारे देश का यह लोकतंत्र का स्ट्रक्चर है कैसा और सियासत कैसे चलती है. बेटी को राजनीति का पता होना चाहिए, हमने मना नहीं किया. उसे गांव-गांव जाने की छूट दी है ताकि लोगों से जनसपर्क करके उनका दर्द समझें. यह बहुत जरूरी है. मैं उनको वक्त देता हूं और गाइड भी करता हूं."