UP News: नए साल (2026) के शुरुआत में ही उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़े उलटफेर और नई बिसात बिछने के संकेत मिल गए हैं. यूपी Tak के खास शो 'आज का यूपी' में हम सूबे की तीन बड़ी खबरों का विश्लेषण करेंगे. पहली मकर संक्रांति के बाद योगी सरकार के मंत्रिमंडल में बड़े फेरबदल की सुगबुगाहट और बीजेपी का नया ओबीसी प्लस हिंदुत्व फॉर्मूला. दूसरी, सपा चीफ अखिलेश यादव का पीडीए दांव और उसमें सवर्णों को जोड़ने की नई 'पीडीए प्लस' रणनीति. तीसरी, बसपा चीफ मायावती और कांग्रेस के बीच गठबंधन की अंदरूनी खिचड़ी, जो यूपी के सियासी समीकरणों को पूरी तरह बदल सकती है.
ADVERTISEMENT
मकर संक्रांति के बाद योगी मंत्रिमंडल में हो सकता है बड़ा फेरबदल
साल 2026 की शुरुआत के साथ ही उत्तर प्रदेश बीजेपी में बड़े संगठनात्मक और प्रशासनिक बदलाव की पटकथा लिख दी गई है. खरमास खत्म होते ही यानी मकर संक्रांति के बाद यूपी में मंत्रिमंडल विस्तार की पूरी संभावना है. माना जा रहा है कि कई पुराने मंत्रियों को संगठन में भेजा जाएगा और नए चेहरों को कैबिनेट में जगह मिलेगी. चर्चा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने जीरो टॉलरेंस और हार्डकोर हिंदुत्व के एजेंडे पर कायम रहेंगे. वहीं नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के जरिए बीजेपी पिछड़ों (OBC) को साधने की कोशिश करेगी.
हाल ही में हुए पुलिस अधिकारियों के साथ दो दिवसीय मंथन से साफ है कि 2027 के लिए कानून व्यवस्था ही योगी सरकार का सबसे बड़ा चुनावी हथियार होगा.
अखिलेश यादव की 'पीडीए प्लस' रणनीति, क्या सवर्णों को साथ लाएगी सपा?
समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव 2026 में अपने पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के नारे को नया विस्तार देने जा रहे हैं. बीजेपी के भीतर ब्राह्मणों की कथित नाराजगी को भांपते हुए अखिलेश अब 'पीडीए प्लस' यानी सवर्णों (विशेषकर ब्राह्मणों) को प्रमुखता दे रहे हैं. अयोध्या से लेकर बलिया तक के ब्राह्मण चेहरों को पार्टी में आगे किया जा रहा है. बिहार के बदलते समीकरणों का असर यूपी पर भी दिख सकता है. राज्यसभा सीटों और आगामी पंचायत चुनावों को लेकर सपा और कांग्रेस के रिश्तों में खटास आने के संकेत मिल रहे हैं.
मायावती का सेमीफाइनल और कांग्रेस का सीक्रेट ऑफर
2026 को बीएसपी के लिए वजूद बचाने का साल माना जा रहा है. बसपा सुप्रीमो मायावती इस साल कुछ बड़े और कड़े फैसले ले सकती हैं. सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे ने मायावती को गठबंधन का ऑफर भेजा है. कांग्रेस के भीतर एक खेमा मानता है कि सपा के बजाय बसपा के साथ जाने से दलित-मुस्लिम समीकरण ज्यादा मजबूत होगा. संगठन को धार देने के लिए मायावती अपने उत्तराधिकारी आकाश आनंद को यूपी की सड़कों पर उतार सकती हैं.
इस साल होने वाले 10 राज्यसभा सीटों के चुनाव और पंचायत चुनाव यह तय करेंगे कि 2027 के फाइनल में कौन किसके साथ खड़ा होगा.
यहां देखें वीडियो रिपोर्ट:
ADVERTISEMENT









