यूपी की क्षत्रिय पॉलिटिक्स में एक्टिव हुए बृजभूषण और धनंजय सिंह, राजा भैया ने बनाई दूरी... 2027 किसके लिए खतरे की घंटी?

UP News: यूपी तक के शो 'आज का यूपी' में देखें बृजभूषण सिंह और धनंजय सिंह की जुगलबंदी का विश्लेषण. जानें क्यों रोए संजय निषाद और क्या है 2027 का नया सियासी समीकरण.

Brijbhushan Sharan Singh and Raja bhaiya

कुमार अभिषेक

24 Mar 2026 (अपडेटेड: 24 Mar 2026, 09:54 AM)

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UP News: यूपी Tak का खास शो आज का यूपी राज्य की राजनीतिक हलचलों का सबसे सटीक विश्लेषण लेकर आता है. आज के अंक में हम उत्तर प्रदेश की तीन बड़ी और प्रभावकारी खबरों का विश्लेषण कर रहे हैं. पहली खबर जौनपुर से है जहां बृजभूषण शरण सिंह और धनंजय सिंह की जुगलबंदी ने 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए नए सियासी समीकरणों के संकेत दिए हैं. दूसरी खबर में हम चर्चा करेंगे कैबिनेट मंत्री संजय निषाद के छलके आंसुओं की, जिसके पीछे की सियासी कहानी और निषाद समाज की आरक्षण की मांग बेहद गहरी है. वहीं तीसरी खबर में क्षत्रिय राजनीति के बदलते स्वरूप और दिग्गजों के बीच की दूरियों पर विश्लेषण किया गया है. 

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बृजभूषण और धनंजय की जुगलबंदी, 2027 के लिए खतरे की घंटी?

जौनपुर में आयोजित 'बैस क्षत्रिय एकता मंच' के कार्यक्रम में यूपी की राजनीति के दो बाहुबली चेहरे बृजभूषण शरण सिंह और धनंजय सिंह एक साथ नजर आए. दिलचस्प नजारा तब दिखा जब धनंजय सिंह खुद गाड़ी ड्राइव कर बृजभूषण के सारथी बने. मंच से बृजभूषण ने एक बार फिर अपने पुराने अंदाज में कहा, 'दबदबा था, दबदबा है और रहेगा.' उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उनके दबदबे की पूरी कहानी धनंजय सिंह को पता है. यह जुगलबंदी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों ही नेता फिलहाल भाजपा के साथ होते हुए भी एक तरह की दूरी पर हैं. जानकारों का मानना है कि यदि अवध और पूर्वांचल के ये दो दिग्गज एक साथ आते हैं, तो 2027 में भाजपा के लिए राहें मुश्किल हो सकती हैं. 

मंच पर क्यों फूट-फूटकर रोए कैबिनेट मंत्री संजय निषाद?

गोरखपुर के एक कार्यक्रम में यूपी सरकार के मंत्री डॉ. संजय निषाद का भावुक रूप देखने को मिला. वह मंच पर ही फफक-फफक कर रो पड़े. उनके इन आंसुओं के पीछे का सियासी दर्द गहरा है. संजय निषाद लंबे समय से निषाद, मल्लाह और बिंद समाज को अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा दिलाने की मांग कर रहे हैं, जिस पर कोई ठोस प्रगति नहीं दिख रही है. इसके अलावा, चर्चा यह भी है कि वह सरकार में अपनी पार्टी की तवज्जो और आगामी मंत्रिमंडल विस्तार में अन्य मंत्रियों की तुलना में कम हिस्सेदारी मिलने से आहत हैं. उन्होंने समाज की बेटियों के साथ हो रही घटनाओं और आरक्षण के मुद्दे को अपने दर्द की मुख्य वजह बताया.

यूपी की क्षत्रिय पॉलिटिक्स और राजा भैया की दूरी

आज का यूपी शो में इस बात पर भी गौर किया गया कि जहां एक ओर बृजभूषण और धनंजय सिंह की नजदीकियां बढ़ रही हैं, वहीं प्रदेश के सबसे बड़े क्षत्रिय चेहरों में शुमार राजा भैया ने इन आयोजनों से दूरी बना रखी है. गोंडा की राष्ट्रकथा हो या जौनपुर का एकता मंच, राजा भैया की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही. क्या यह क्षत्रिय राजनीति के भीतर किसी नए गुटबंदी का संकेत है? बृजभूषण और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच के रिश्तों की तल्खी भी इस पूरे घटनाक्रम में एक अहम पहलू बनकर उभरी है, जो आने वाले समय में प्रदेश की सियासत को नया मोड़ दे सकती है. 

यहां देखें पूरा शो 

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