Panchayat Chunav Update: उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों सबसे बड़ा सवाल यही है कि पंचायत चुनाव कब होंगे? क्या आरक्षण की नई व्यवस्था लागू होगी या पुराने ढर्रे पर ही चुनाव होंगे? इन तमाम सवालों को लेकर यूपी Tak ने उत्तर प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर से खास बातचीत की. हमारे सवालों का जवाब देते हुए मंत्री राजभर ने कई बड़े दावे किए. राजभर ने कहा कि यूपी में पंचायत चुनाव समय पर ही होंगे. वहीं, पंचायत चुनाव के शेड्यूल को लेकर हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद ओपी राजभर ने कहा कि आगामी 25 मार्च को सरकार अदालत में अपना जवाब दाखिल कर देगी.
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कब होंगे चुनाव और क्या है तैयारी?
ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि लोगों के मन में यह आशंका है कि SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) और बोर्ड परीक्षाओं के चलते चुनाव टाले जा सकते हैं, जोकि भ्रम और गलत है. उन्होंने कहा कि मतपत्र छपकर जिलों में पहुंच चुके हैं और 15 अप्रैल तक मतदाता सूची का प्रकाशन कर दिया जाएगा.
कब होगा पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन?
पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन पर मंत्री राजभर ने कहा कि इसका गठन जल्द ही हो जाएगा. सर्वे में लगने वाले समय पर उन्होंने कहा कि कोई नया सर्वे नहीं होगा बल्कि 2011 की जनगणना के आधार पर ही रोटेशनल आरक्षण की व्यवस्था बनाई जाएगी. उन्होंने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में ज्यादा से ज्यादा एक से डेढ़ महीने का समय लगेगा.
गौरतलब है कि यूपी में पंचायत चुनाव टलने का मुख्य कारण ट्रिपल टेस्ट की कानूनी अनिवार्यता है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार, ओबीसी आरक्षण लागू करने से पहले एक समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन करना जरूरी है. यूपी में पिछले आयोग का कार्यकाल समाप्त हो चुका था. सरकार ने हाई कोर्ट में हलफनामा देकर स्वीकार किया है कि वह पहले नए समर्पित आयोग का गठन करेगी और उसकी रिपोर्ट के आधार पर ही सीटों का आरक्षण तय किया जाएगा. इस सर्वे और डेटा जुटाने की प्रक्रिया में समय लगने के कारण चुनाव टल गए हैं.
पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट ने सरकार की लगाई फटकार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम सुनवाई के दौरान प्रदेश सरकार को फटकार लगाते हुए स्पष्ट किया है कि चुनावों को किसी भी कीमत पर टाला नहीं जाना चाहिए. कोर्ट ने सरकार से स्टेटस रिपोर्ट मांगते हुए पूछा है कि चुनाव का पूरा शेड्यूल क्या है. दरअसल 26 मई को पंचायतों का कार्यकाल खत्म हो रहा है. लेकिन ओबीसी आरक्षण के निर्धारण में हो रही देरी के कारण सरकार की मंशा पर सवाल उठ रहे थे. कोर्ट के इस दखल के बाद अब शासन स्तर पर हलचल तेज हो गई है और माना जा रहा है कि सरकार को जल्द ही चुनावी कार्यक्रम पेश करना होगा.
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