Aaj Ka UP: यूपी तक का खास शो 'आज का यूपी' राज्य की राजनीतिक सरगर्मी और सामाजिक विमर्श का एक महत्वपूर्ण मंच है. इस शो के माध्यम से हम राज्य की तीन सबसे बड़ी खबरों का विश्लेषण करते हैं. आज के अंक में सबसे प्रमुख चर्चा 2027 के चुनाव से पहले तेज हुए 'दलित विमर्श' की है जिसमें राहुल गांधी द्वारा कांशीराम को 'भारत रत्न' देने की मांग और अखिलेश यादव का मुंबई से मायावती के लिए भेजा गया 'सॉफ्ट' संदेश शामिल है.साथ ही बाराबंकी में चंद्रशेखर आजाद रावण और करणी सेना के बीच उपजा विवाद और इसके जरिए चंद्रशेखर की 2027 के लिए बढ़ती सियासी महत्वाकांक्षाओं का विश्लेषण किया गया है.
ADVERTISEMENT
1. दलित वोट बैंक की जंग: मायावती के लिए अखिलेश का 'सॉफ्ट' मैसेज
2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए दलित वोट बैंक सभी राजनीतिक दलों के केंद्र में आ गया है.हाल ही में मुंबई दौरे पर गए समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने बसपा सुप्रीमो मायावती को लेकर एक बड़ा और सकारात्मक संदेश दिया है. अखिलेश ने कहा कि वह बहुजन समाज के साथ हमेशा खड़े हैं और मुश्किल वक्त में उनके (मायावती) साथ दिखाई देंगे.
अखिलेश ने 2019 के गठबंधन को याद करते हुए कहा कि उनका सपना मायावती को 'प्रधानमंत्री' बनाना था. लेकिन भाजपा और अन्य ताकतों ने इस सपने को सफल नहीं होने दिया. राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अखिलेश का यह बयान बसपा कैडर को लुभाने और दलित वोट बैंक में अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने की एक सोची-समझी रणनीति है ताकि 2027 में दलित वोट इंडिया गठबंधन की ओर मजबूती से मुड़ सके.
2. राहुल गांधी का 'कांशीराम दांव': भारत रत्न की मांग और कांग्रेस का पुराना समीकरण
कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी दलितों को अपने पाले में लाने के लिए सक्रिय हो गए हैं.लखनऊ यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने दलित राजनीति के पुरोधा मान्यवर कांशीराम को 'भारत रत्न' देने के लिए प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है. कांग्रेस की यह कोशिश दलित-मुस्लिम समीकरण को पुनर्जीवित करने की है जो कभी पार्टी का सबसे मजबूत आधार हुआ करता था. राहुल गांधी जानते हैं कि यदि दलित वोट बैंक सपा-कांग्रेस गठबंधन के साथ सहज हो जाता है तो 2027 की राह आसान हो जाएगी. इस दौड़ में भाजपा भी पीछे नहीं है और 15 मार्च के बाद से सत्ताधारी दल ने भी कांशीराम के सम्मान में कई कार्यक्रम आयोजित कर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है.
3. चंद्रशेखर आजाद का तीखा अंदाज: करणी सेना को जवाब और 2027 की दावेदारी
आज की तीसरी बड़ी खबर नगीना से सांसद और भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद रावण से जुड़ी है. बाराबंकी दौरे के दौरान करणी सेना द्वारा उनके विरोध की घोषणा पर चंद्रशेखर ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया. उन्होंने मंच से हुंकार भरते हुए कहा, 'हम चमड़ा उतारना भी जानते हैं, उसका जूता बनाना भी जानते हैं और समय आने पर मारना भी जानते हैं.'
चंद्रशेखर ने स्पष्ट कर दिया है कि वे 2027 का चुनाव पूरी शिद्दत के साथ लड़ेंगे और उन्होंने बाराबंकी सदर सीट पर अपनी दावेदारी भी ठोक दी है. हालांकि, चंद्रशेखर का यह बढ़ता प्रभाव सपा और कांग्रेस के लिए चिंता का सबब बन सकता है. वे जिन सीटों पर दावेदारी कर रहे हैं, वहां मुख्य मुकाबला भाजपा बनाम इंडिया गठबंधन के बीच होता है. ऐसे में चंद्रशेखर का अलग लड़ना विपक्षी वोटों में बिखराव पैदा कर सकता है.
ADVERTISEMENT









