Akhilesh Yadav: देशभर में इन दिनों LPG यानी रसोई गैस को लेकर हाहाकार मचा हुआ है. जगह-जगह पर गैस एजेंसी के बाहर लोगों की लंबी लाइन नजर आ रही है. हालांकि बीजेपी ये दावा कर रही है कि इस तरह की झूठी खबरों को फैलाकर आम जनता के बीच पैनिक क्रिएट किया जा रहा है. बीजेपी के इन दावों से इतर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव लगातार बीजेपी पर निशाना साध रहे हैं. हाल ही में उन्होंने LPG को लेकर बीजेपी पर हमला करते हुए कहा कि सरकार और उनसे जुड़े लोग कालाबाजारी कर रहे हैं. ऐसे में अब उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को LPG के लिए लाइन में लगे लोगों की भीड़ दिखाने की जिम्मेदारी सौंप दी है.
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'जहां भी लाइन लगी होगी और लाइन दिखाएंगे'
अखिलेश यादव ने कहा कि 'सरकार की जिम्मेदारी बनती है LPG को उपलब्ध कराना. इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार और उनसे जुड़े लोग गैस की किल्लत पैदा कर कालाबाजारी कर रहे हैं. इस दौरान उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी के कार्यकर्ता अब सड़कों पर उतरेंगे. जहां-जहां भी गैस एजेंसियों के बाहर जनता की लंबी लाइनें लगी होंगी सपा कार्यकर्ता वहां जाकर उन लाइनों को जनता और मीडिया के सामने दिखाएंगे.'
LPG शॉर्टेज को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार एक्टिव हैं अखिलेश यादव
वहीं 13 मार्च को भी LPG शॉर्टेज का मुद्दा उठाते हुए अखिलेश यादव ने एक्स हैंडल पर लिखा कि 'अगर भाजपावाले कह रहे हैं कि ‘गैस’ की कोई कमी नहीं है तो विश्व की सबसे बड़ी पार्टी का दावा करनेवाले उनके मंत्री, सांसद, विधायक, पार्षद और करोड़ों कार्यकर्ता और उनके unregistered संगी-साथी (अपने पुराने इतिहास को दोहराते हुए) Underground क्यों हो गये हैं. वो भूमिगत ठिकानों से निकलें और जनता के बीच जाकर गैस एजेंसियों से गैस दिलवाएं. अब क्या जनता भाजपाइयों के घरों का घेराव करे या उनके कार्यालयों, प्रतिष्ठानों या फिर (भाजपा का झंडा उतारी हुई) उनकी गाड़ियों का. सच तो ये है कि किल्लत जितनी बढ़ती है, भाजपा उतना ही उसे नकारने का झूठ बढ़ा देती है. कोरोना में ऑक्सीजन गैस से लेकर, आज खाने व अन्य तरह की गैस हो या फिर खाद की किल्लत सबके बारे में भाजपाइयों की यही चाल रहती है. भाजपा आपदा में कालाबाज़ारी ढूंढ लेती है. भाजपा की ग़लतियों का ख़ामियाज़ा जनता क्यों भुगते? सत्ताधारी भाजपा और झूठी सेवा का ‘शताब्दीय’ दावा करनेवाले उनके अनरजिस्टर्ड संगी-साथी भूख से तड़प रहे लोगों के लिए मुफ़्त भोजनालय चलाएं, नहीं तो नज़र न आएं.
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