UP Political News: यूपी Tak का खास शो आज का यूपी राज्य की राजनीतिक और सामाजिक हलचलों का सटीक विश्लेषण लेकर आता है. आज के अंक में हम तीन बड़ी खबरों पर चर्चा करेंगे. पहली खबर, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और योगी सरकार के बीच दिख रही नरमी और इसके पीछे की 'ट्रैक टू डिप्लोमेसी' का विश्लेषण है. दूसरी खबर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और आरएसएस (RSS) के बीच बढ़ती समन्वय बैठकों का सिलसिला, जिसमें सीएम ने संघ के दर पर पहुंचकर कई अहम सवालों के जवाब दिए हैं. तीसरी खबर 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर संघ और बीजेपी की साझा रणनीति को लेकर है जिसमें संघ अब ड्राइविंग सीट पर नजर आ रहा है.
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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और योगी सरकार में बढ़ रहीं नजदीकियां?
ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के तेवर पिछले कुछ दिनों से बदले-बदले नजर आ रहे हैं. लखनऊ पहुंचने पर न तो प्रशासन ने उन्हें रोका और न ही कोई हो-हल्ला हुआ. बल्कि, कुछ शर्तों के साथ उनके शंखनाद कार्यक्रम को मंजूरी भी दे दी गई. हाल ही में एक मौलाना द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मां पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी पर शंकराचार्य का यह कहना कि 'योगी की मां मेरी भी मां हैं', दोनों के बीच कम होती कड़वाहट की ओर इशारा करता है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि काशी प्रांत के संघ नेता पर्दे के पीछे से पैचअप कराने में जुटे हैं ताकि सरकार और संतों के बीच किसी भी नकारात्मक नैरेटिव को खत्म किया जा सके.
संघ के दर पर सीएम योगी, समन्वय बैठकों का दौर जारी
पिछले एक महीने के भीतर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पांच अलग-अलग जगहों (गोरखपुर, लखनऊ, मथुरा-आगरा मंडल, प्रयागराज और कानपुर) पर संघ की समन्वय बैठकों में हिस्सा लिया है. यह पहली बार है जब मुख्यमंत्री इतनी सघनता से संघ के कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं और स्वयंसेवकों के तीखे सवालों का सामना कर रहे हैं. इन बैठकों में शंकराचार्य मामले से लेकर जमीनी फीडबैक तक पर चर्चा हुई. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि शंकराचार्य के खिलाफ दर्ज मामलों में सरकार की कोई भूमिका नहीं थी. संघ की यह सक्रियता बताती है कि वह अब सरकार और संगठन के कामकाज पर पैनी नजर रख रहा है.
मिशन 2027! संघ के कंधे पर बीजेपी की चुनावी नैया?
2025 के संसदीय चुनावों में उत्तर प्रदेश में बीजेपी के खराब प्रदर्शन के बाद अब संघ ने कमान संभाल ली है. हरियाणा और महाराष्ट्र के परिणामों ने यह साबित कर दिया है कि संघ और बीजेपी का साथ ही जीत की गारंटी है. यही कारण है कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले संघ अब निर्णायक भूमिका में है. यूजीसी (UGC) को लेकर सवर्णों की नाराजगी और अन्य सामाजिक मुद्दों पर संघ और बीजेपी मिलकर रणनीति तैयार कर रहे हैं. ऐसा प्रतीत होता है कि 2027 का रास्ता तय करने के लिए बीजेपी पूरी तरह से संघ के मार्गदर्शन और जमीनी नेटवर्क पर निर्भर है.
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