अखिलेश यादव वो कर गए जो शायद BJP भी नहीं कर पाई, सपा चीफ के एक कदम से भाजपा कैंप में मची भागमभाग!

UP Political News: यूपी तक के खास शो 'आज का यूपी' में देखें अखिलेश यादव और घायल बीजेपी विधायक अनुपमा जायसवाल की मुलाकात की पूरी इनसाइड स्टोरी. जानें कैसे अखिलेश ने बीजेपी को दी अपनों के साथ खड़े होने की सीख और सीएम योगी का इस पर क्या रहा एक्शन.

Akhilesh Yadav

कुमार अभिषेक

30 Apr 2026 (अपडेटेड: 30 Apr 2026, 08:45 AM)

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यूपी तक का खास शो 'आज का यूपी' राज्य की राजनीतिक सरगर्मी और ताजा हलचलों का सबसे सटीक विश्लेषण पेश करता है. आज के इस अंक में हम उत्तर प्रदेश की तीन बड़ी खबरों पर चर्चा करेंगे. पहली खबर, अखिलेश यादव का बीजेपी विधायक अनुपमा जायसवाल से मेदांता अस्पताल में मिलना और उसके बाद बीजेपी खेमे में मची 'भागमभाग' की इनसाइड स्टोरी. दूसरी खबर, कैसे समाजवादी पार्टी अपने कार्यकर्ताओं के लिए लड़ने और उनके साथ खड़े होने के मामले में महारत रखती है और तीसरी खबर इस पूरे घटनाक्रम के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का वह अहम कदम और सक्रियता, जिसे सार्वजनिक चर्चाओं में उतनी जगह नहीं मिली.

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पुतला दहन के दौरान झुलसीं बीजेपी विधायक का हाल जानने अखिलेश पहुंचे मेदांता

उत्तर प्रदेश की सियासत में तस्वीरें अक्सर शब्दों से ज्यादा बोलती हैं. बहराइच से बीजेपी विधायक और पूर्व मंत्री अनुपमा जायसवाल, जो अखिलेश यादव और राहुल गांधी के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान अपना ही पुतला फूंकते समय गंभीर रूप से झुलस गई थीं, उनसे मिलने जब सपा प्रमुख अखिलेश यादव लखनऊ के मेदांता अस्पताल पहुंचे, तो राजनीतिक गलियारों में भूचाल आ गया.

हैरानी की बात यह है कि अनुपमा जायसवाल उसी अखिलेश यादव का पुतला जलाते वक्त घायल हुई थीं, लेकिन उनकी सुध लेने वाले पहले बड़े राजनीतिक चेहरे अखिलेश ही थे. इस मुलाकात की तस्वीर ने बीजेपी के भीतर ऐसी खलबली मचाई कि उसके तुरंत बाद बीजेपी के दिग्गज नेताओं का अस्पताल पहुंचने का तांता लग गया. अखिलेश की इस 'शिष्टाचार भेंट' ने बीजेपी को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि अपनों के संकट के समय सबसे पहले खड़ा होना कितना जरूरी है.

बीजेपी में मची खलबली, अखिलेश के बाद लगा दिग्गजों का तांता

अखिलेश यादव की मुलाकात की तस्वीर जैसे ही वायरल हुई, बीजेपी के उन नेताओं की भी नींद खुली जो अब तक सिर्फ फोन पर हालचाल ले रहे थे. अखिलेश के जाने के बाद दोनों डिप्टी सीएम (केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक) के साथ प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह एक साथ मेदांता पहुंचे. इसके अगले दिन दयाशंकर सिंह और ओम प्रकाश राजभर जैसे बड़े चेहरे भी अस्पताल में नजर आए. हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना और अपर्णा यादव पहले ही मिल चुके थे, लेकिन अखिलेश की सक्रियता ने बीजेपी के 'संकट प्रबंधन' को कटघरे में खड़ा कर दिया. कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा आम हो गई कि जिसकी मुखालफत में विधायक झुलसीं, उसी ने सबसे पहले इंसानियत और बड़प्पन दिखाया.

क्या है सीएम योगी का मौन एक्शन और सपा का कार्यकर्ता प्रेम

इस पूरे घटनाक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भूमिका सबसे निर्णायक लेकिन पर्दे के पीछे रही. जैसे ही अनुपमा जायसवाल के घायल होने की खबर आई, सबसे पहले सीएम योगी ने ही उन्हें फोन किया. जब विधायक ने बताया कि वह सरकारी अस्पताल में हैं और उन्हें काफी जलन हो रही है, तब मुख्यमंत्री ने तुरंत उन्हें मेदांता अस्पताल शिफ्ट करने और पूरी चिकित्सा व्यवस्था मुफ्त और उच्च स्तरीय करने के आदेश दिए. भले ही सीएम अस्पताल नहीं गए, लेकिन विधायक की जान बचाने और उनके इलाज का पूरा इंतजाम उनके कार्यालय द्वारा ही किया गया.

वहीं, दूसरी ओर यह घटना समाजवादी पार्टी की उस परंपरा को भी रेखांकित करती है जहां नेता अपने कार्यकर्ताओं के लिए पुलिस और प्रशासन से भिड़ जाते हैं. चाहे मनीष जगन अग्रवाल के लिए अखिलेश का थाने पहुंचना हो या पुराने दौर में मुलायम सिंह यादव का अपने कार्यकर्ताओं के लिए जेल जाना, सपा की यह 'लड़ाकू' छवि ही उसे कैडर स्तर पर मजबूत बनाती है, जिसे अब बीजेपी भी एक सीख के तौर पर देख रही है.

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