Aaj Ka UP: यूपी की राजनीति में इन दिनों दो बड़े मुद्दे चर्चा का विषय बने हुए हैं. पहला पंचायत चुनाव का वह संभावित शेड्यूल जो अब धरातल पर उतरता दिख रहा है.दूसरा, वाराणसी में गंगा नदी के बीचों-बीच नाव पर इफ्तार का आयोजन. जहां पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने 25 मार्च को हाई कोर्ट में जवाब दाखिल करने और अप्रैल तक मतदाता सूची के प्रकाशन का दावा किया है. वहीं काशी में हुए इफ्तार विवाद ने नया मोड़ ले लिया है. शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने इस घटना के लिए सरकार द्वारा गंगा को कमाई का जरिया बनाने को जिम्मेदार ठहराया है.
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पंचायत चुनाव: 25 मार्च से शुरू होगा निर्णायक दौर
मंत्री ओम प्रकाश राजभर के अनुसार, पंचायत चुनावों की बाधाएं लगभग दूर हो चुकी हैं. 25 मार्च को सरकार हाई कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करेगी. इसके साथ ही 24 मार्च को होने वाली कैबिनेट बैठक में 'पिछड़ा वर्ग आयोग' के गठन पर मुहर लग सकती है. यह आयोग अगले 3 से 4 हफ्तों में अपनी रिपोर्ट सौंप देगा जिसके आधार पर रोटेशनल आरक्षण तय किया जाएगा.
15 अप्रैल तक वोटर लिस्ट और मतपत्रों की तैयारी
चुनाव की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मतपत्र छपकर जिलों में पहुंच चुके हैं. सरकार का लक्ष्य है कि 15 अप्रैल तक मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन कर दिया जाए. राजभर ने साफ किया कि सर्वे में अधिक समय नहीं लगेगा क्योंकि यह 2011 की जनगणना के आधार पर ही होना है.
गंगा में इफ्तार विवाद: विपक्ष और संतों के तीखे तेवर
वाराणसी में गंगा के बीच नाव पर मुस्लिम युवकों द्वारा इफ्तार करने का वीडियो वायरल होने के बाद बहस छिड़ गई है. आरोप है कि वहां नॉनवेज परोसा गया और हड्डियां गंगा में फेंकी गईं. जहां अखिलेश यादव ने इसे सामान्य बताया और सरकार की नावों से होने वाली गंदगी पर सवाल उठाए. वहीं कांग्रेस ने भी इफ्तार का समर्थन किया.
शंकराचार्य का प्रहार
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने इस विवाद पर सरकार को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा कि जब सरकार ने गंगा में क्रूज और तैरते होटल चलाकर उसे कमाई का जरिया बना दिया तो ऐसी घटनाओं को कैसे रोका जा सकेगा? उन्होंने कहा कि नाविक अब सिर्फ पैसे के लिए नावों पर कुछ भी करने की अनुमति दे रहे हैं जो गंगा की पवित्रता के खिलाफ है.
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