Opinion: 9 साल की योगी सरकार, एकजुट NDA, विकास यात्रा पर सामूहिक गर्व, एक मंच से दिए गए कई संदेश

योगी सरकार के 9 साल. उत्तर प्रदेश में 2017 से शुरू हुई राजनीतिक यात्रा ने पूरे किए नौ वर्ष. कानून-व्यवस्था, विकास और एनडीए की अटूट एकजुटता बनी सरकार की सबसे बड़ी पहचान.

CM Yogi

यूपी तक

19 Mar 2026 (अपडेटेड: 19 Mar 2026, 06:22 PM)

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उत्तर प्रदेश में 19 मार्च 2017 को शुरू हुई राजनीतिक यात्रा अब नौ वर्षों का पड़ाव पार कर चुकी है. यह किसी भी सरकार के लिए एक लंबा समय होता है, जिसमें उसके कामकाज, नीतियों और नेतृत्व की दिशा को परखने का पर्याप्त अवसर मिलता है. इन नौ वर्षों के बाद जब हम वर्तमान स्थिति को देखते हैं, तो कुछ बदलाव स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं, जिन पर गंभीरता से विचार करना आवश्यक है. साथ ही बुधवार को जब योगी सरकार अपने 9 साल के लेखे-जोखे को पब्लिक के सामने रख रही थी तब कई संदेश भी एक साथ दिए गए. इस संदेश में एनडीए की एकजुटता, विकास यात्रा पर सामूहिक गर्व जैसी भावना शामिल है.

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राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में एक स्थिरता 

बीते 9 वर्षों में राज्य की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में एक स्थिरता आई है. लंबे समय तक उत्तर प्रदेश की पहचान राजनीतिक अस्थिरता, कानून-व्यवस्था की चुनौतियों और विकास की धीमी गति से जुड़ी रही. ऐसे में जब कोई सरकार लगातार नौ वर्षों तक काम करती है, तो यह अपने आप में एक संकेत है कि व्यवस्था में कुछ बुनियादी परिवर्तन हुए हैं.

बेहतर कानून-व्यवस्था बनी पहचान

कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर सरकार ने लगातार सख्ती का रुख अपनाया. यह नीति समय के साथ एक पहचान के रूप में स्थापित हुई है. इसके समानांतर बुनियादी ढांचे और निवेश को लेकर भी सरकार ने सक्रियता दिखाई. एक्सप्रेस-वे, औद्योगिक परियोजनाएं और निवेश के प्रयासों ने उत्तर प्रदेश को एक नए परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करने की कोशिश की है.

हालांकि किसी भी सरकार के मूल्यांकन में केवल उपलब्धियों की सूची पर्याप्त नहीं होती. यह देखना भी जरूरी होता है कि सरकार के भीतर और उसके राजनीतिक ढांचे में किस प्रकार की स्थिति बनी हुई है. इसी संदर्भ में नौ वर्ष पूरे होने पर जो सबसे महत्वपूर्ण पक्ष सामने आता है, वह है राजनीतिक और संगठनात्मक एकजुटता.

भारतीय राजनीति में यह सामान्य अनुभव है कि समय के साथ सरकारों के भीतर मतभेद उभरने लगते हैं. नेतृत्व को लेकर असहमति, निर्णयों पर सवाल और गठबंधन के भीतर खींचतान जैसे तत्व अक्सर दिखाई देते हैं. कई बार यह स्थिति सरकार की कार्यक्षमता को भी प्रभावित करती है.

एकजुट NDA का संदेश

उत्तर प्रदेश के वर्तमान परिदृश्य में इस प्रकार के संकेत बहुत सीमित दिखाई देते हैं. नौ वर्ष पूरे होने के अवसर पर जिस प्रकार मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, पार्टी संगठन और गठबंधन के अन्य घटक एक साथ नजर आए, वह केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं था. यह उस आंतरिक स्थिति का संकेत भी था, जिसमें सरकार और संगठन के बीच एक प्रकार की सामंजस्यपूर्ण समझ बनी हुई है.

इस एकजुटता के पीछे कई कारण हो सकते हैं. पहला कारण नेतृत्व की शैली है. जब निर्णय स्पष्ट होते हैं और प्रशासनिक स्तर पर उनका क्रियान्वयन सुनिश्चित होता है, तो स्वाभाविक रूप से नेतृत्व के प्रति भरोसा बनता है. दूसरा कारण राजनीतिक लक्ष्य की स्पष्टता है. यदि सरकार और संगठन दोनों यह समझते हैं कि उन्हें किस दिशा में आगे बढ़ना है, तो मतभेदों की संभावना कम हो जाती है.

यह भी ध्यान देने योग्य है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और विविधतापूर्ण राज्य में राजनीतिक एकजुटता बनाए रखना आसान नहीं होता. यहां सामाजिक, क्षेत्रीय और राजनीतिक विविधताएं बहुत व्यापक हैं. ऐसे में यदि एक सरकार लंबे समय तक अपने ढांचे को एक साथ बनाए रखती है, तो यह उसकी राजनीतिक क्षमता को दर्शाता है.

नौ वर्षों के इस पड़ाव पर एक और पहलू महत्वपूर्ण है. यह समय केवल उपलब्धियों को गिनाने का नहीं, बल्कि आगे की दिशा तय करने का भी होता है. सरकार जब दसवें वर्ष में प्रवेश कर रही है, तो उसके सामने अपेक्षाएं भी उसी अनुपात में बढ़ती हैं. जनता का भरोसा बनाए रखना और उसे और मजबूत करना, यह चुनौती आगे भी बनी रहेगी.

स्थिरता और सामंजस्य

अंततः किसी भी सरकार की सफलता केवल उसके निर्णयों या योजनाओं से नहीं तय होती. यह इस बात से भी तय होती है कि वह अपने भीतर कितनी स्थिरता और सामंजस्य बनाए रख पाती है. उत्तर प्रदेश में नौ वर्षों के बाद जो तस्वीर सामने आई है, उसमें यह तत्व स्पष्ट रूप से दिखाई देता है.

इस पूरे परिदृश्य को एक वाक्य में समझना हो, तो कहा जा सकता है कि यह केवल शासन का नहीं, बल्कि एक संगठित राजनीतिक संरचना का उदाहरण है. जब सरकार के नौ वर्ष पूरे होने पर सभी घटक एक साथ खड़े दिखाई देते हैं, तो यह संकेत देता है कि आगे की यात्रा के लिए आधार मजबूत है. यही इस पड़ाव का सबसे महत्वपूर्ण संदेश है.

लेखक: लेखक डॉ. शब्द प्रकाश, दिल्ली विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर.

Disclaimer: यहां व्यक्त विचार लेखक की व्यक्तिगत राय हैं.