Brij Bhushan Sharan Singh Vrindavan News: महिला पहलवानों के यौन शोषण से जुड़े मामले में अदालत से बरी होने के एक दिन बाद पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह मंगलवार को वृंदावन पहुंचे. यहां उन्होंने गुरु रितेश्वर आनंद महाराज से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया. मीडिया से बातचीत में बृजभूषण सिंह ने कोर्ट के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि न्यायपालिका ने सम्मान के साथ उनके खिलाफ लगे सभी आरोपों को खारिज किया है. उन्होंने कहा, 'मैं पहले भी गुरुदेव भगवान के दर्शन करने आया था और अब जजमेंट होने के बाद भी दर्शन करने आया हूं.' बता दें सोमवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सबूतों के अभाव में उन्हें इस मामले में बरी कर दिया था.
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बृजभूषण शरण सिंह ने क्या कहा?
वृंदावन पहुंचने के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने मीडिया से बातचीत की. उन्होंने अदालत के फैसले पर संतोष जताते हुए कहा कि न्यायपालिका ने उनके ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज कर दिया है. बृजभूषण सिंह पहले भी गुरु रितेश्वर आनंद महाराज के दर्शन के लिए वृंदावन आ चुके हैं. अब कोर्ट से राहत मिलने के अगले ही दिन उनका यहां पहुंचना चर्चा में है. उन्होंने इस मौके पर गुरु से आशीर्वाद लिया और फैसले के बाद अपनी बात मीडिया के सामने रखी.
सोमवार को कोर्ट ने सुनाया था फैसला
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सोमवार, 3 अगस्त 2026 को महिला पहलवानों के यौन शोषण से जुड़े मामले में पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया. वह इस मामले में 20 जुलाई 2023 से नियमित जमानत पर थे. दिल्ली पुलिस की चार्जशीट के आधार पर अदालत ने 10 मई 2024 को उनके खिलाफ आरोप तय किए थे. इसके बाद मामले में ट्रायल शुरू हुआ और करीब साढ़े तीन साल चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया.
जंतर-मंतर से शुरू हुआ था पूरा मामला
इस मामले की शुरुआत जनवरी 2023 में दिल्ली के जंतर-मंतर पर पहलवानों के प्रदर्शन से हुई थी. 18 जनवरी 2023 को पहलवानों ने प्रदर्शन शुरू किया था. इसके बाद 19 जनवरी को बबीता फोगाट ने प्रदर्शनकारी पहलवानों से मुलाकात की और सरकार से बातचीत कराने का भरोसा दिया. इसी दिन पहलवानों ने तत्कालीन खेल मंत्री अनुराग ठाकुर से भी मुलाकात की. 20 जनवरी को विनेश फोगाट ने भारतीय ओलंपिक संघ, प्रधानमंत्री कार्यालय, अनुराग ठाकुर और अमित शाह को ट्वीट कर शिकायत दर्ज कराई थी. 21 जनवरी को अनुराग ठाकुर से बातचीत के बाद पहलवानों ने पहला धरना खत्म कर दिया था.
जांच से लेकर एफआईआर तक ऐसे बढ़ा मामला
23 जनवरी 2023 को खेल मंत्रालय ने शिकायतों की जांच के लिए ओवरसाइट कमेटी बनाई. अप्रैल में समिति ने अपनी रिपोर्ट भारतीय ओलंपिक संघ को सौंप दी. इसके बाद 21 अप्रैल 2023 को छह महिला पहलवानों ने कनॉट प्लेस थाने में शिकायत दी और 23 अप्रैल से जंतर-मंतर पर दोबारा धरना शुरू किया. 25 अप्रैल को पहलवान सुप्रीम कोर्ट पहुंचे. 28 अप्रैल को दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को एफआईआर दर्ज करने की जानकारी दी. छह महिला पहलवानों की शिकायत पर एफआईआर संख्या 78/2023 दर्ज हुई, जबकि एक नाबालिग पहलवान की शिकायत पर पॉक्सो एक्ट के तहत अलग एफआईआर संख्या 77/2023 दर्ज की गई.
चार्जशीट, जमानत और आरोप तय होने के बाद चला ट्रायल
15 जून 2023 को दिल्ली पुलिस ने एफआईआर 78/2023 में बृजभूषण शरण सिंह और तत्कालीन सहायक सचिव विनोद तोमर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की. इसी दिन पॉक्सो मामले में क्लोजर रिपोर्ट भी दाखिल हुई. 7 जुलाई को अदालत ने मामले का संज्ञान लिया और 20 जुलाई 2023 को बृजभूषण सिंह और विनोद तोमर को जमानत मिल गई. इसके बाद 10 मई 2024 को अदालत ने आरोप तय करने का आदेश दिया और 21 मई 2024 को दोनों आरोपियों पर औपचारिक आरोप तय हुए. दोनों ने खुद को निर्दोष बताते हुए मुकदमे का सामना करने का फैसला किया. 26 जुलाई 2024 से अभियोजन पक्ष के गवाहों की गवाही शुरू हुई.
साढ़े तीन साल बाद अदालत के फैसले से मिली राहत
मामले में 26 मई 2025 को पटियाला हाउस कोर्ट की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गोमती मनोचा ने पॉक्सो मामले में दिल्ली पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार की. इसके बाद 25 मई 2026 को अभियोजन पक्ष के अंतिम गवाह की गवाही पूरी हुई. इस दौरान कुल 32 गवाहों से पूछताछ हुई, जबकि 9 गवाहों को अभियोजन ने हटा दिया. 8 जून को दोनों आरोपियों के बयान दर्ज हुए, 9 जून से अंतिम बहस शुरू हुई और 2 जुलाई को अंतिम बहस पूरी हुई. आखिरकार 3 अगस्त 2026 को अदालत ने फैसला सुनाते हुए बृजभूषण सिंह को मामले में बरी कर दिया.
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