शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के आश्रम में क्या स्विमिंग पुल, गोपनीय कक्ष और महिलाएं हैं? आप खुद देख लीजिए एक एक कोना

Ashram inside Video: वाराणसी के श्री विद्या मठ और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर लगे आरोपों की यूपी तक ने की पड़ताल. क्या वाकई आश्रम में पांच मंजिलें और स्विमिंग पूल है? जानें आश्रम में लगी लिफ्ट और 'रहस्य लोक' के दावों के पीछे का असली सच.

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संतोष शर्मा

• 03:53 PM • 26 Feb 2026

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Ashram inside Video: वाराणसी का श्री विद्या मठ इन दिनों चर्चाओं में है. शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर लगे गंभीर आरोपों के बाद आश्रम के भीतर के पांच मंजिला इमारत और स्विमिंग पूल जैसे दावों पर सवाल उठ रहे हैं. यूपी Tak की टीम ने आश्रम के मीडिया प्रभारी संजय पांडे के साथ मिलकर इन सभी आरोपों की पड़ताल की है. आखिर पर्दे के पीछे क्या है? क्या वाकई वहां कोई आलीशान सुविधाएं हैं या सच्चाई कुछ और है?

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पांच मंजिला इमारत और स्विमिंग पूल का सच

लेखिका भूमिका द्विवेदी और अन्य द्वारा लगाए गए आरोपों में कहा गया था कि आश्रम पांच मंजिला है और ऊपर स्विमिंग पूल बना है. वहीं जब इसे लेकर सवाल किया गया तो आश्रम के मीडिया प्रभारी संजय पांडे ने अंदर का एक एक कोना दिखाते हुए कहा कि 'मठ केवल तीन मंजिला है (बेसमेंट को जोड़कर चार). वहीं जिसे स्विमिंग पूल कहा जा रहा है वह दरअसल ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी के लिए फिजियोथेरेपी के उद्देश्य से बनाया गया एक छोटा जलाशय था. वर्तमान में इसका उपयोग केवल पुरानी धार्मिक पुस्तकों और दस्तावेजों को रखने के लिए किया जाता है.

आश्रम में लिफ्ट का रहस्य

आश्रम में एक छोटी लिफ्ट होने की बात भी सामने आई थी. इसे लेकर उन्होंने कहा कि यह लिफ्ट स्वर्गीय स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी के लिए लगवाई गई थी. क्योंकि 99 वर्ष की आयु में उनका शरीर भारी था और वे चलने-फिरने में असमर्थ थे.उनके ब्रह्मलीन होने के बाद अब यह लिफ्ट उपयोग में नहीं है.

'रहस्य लोक' और सुरक्षा के इंतजाम

आश्रम के कुछ हिस्सों में मीडिया के प्रवेश को लेकर उठ रहे सवालों पर प्रबंधन का कहना है कि ऊपर की मंजिलों पर वेदपाठी बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं. उनकी सुरक्षा और एकाग्रता को ध्यान में रखते हुए वहां हर किसी का प्रवेश वर्जित है. आश्रम में आने वाले हर व्यक्ति का रिकॉर्ड रजिस्टर में दर्ज किया जाता है और वहां एक छोटा दवाखाना भी मौजूद है. संजय पांडे का कहना है कि ये सभी आरोप पूरी तरह से निराधार और राजनीति से प्रेरित हैं. उनके अनुसार, शंकराचार्य जी द्वारा राम मंदिर के पक्ष में गवाही देने, गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित कराने और वर्तमान में 'गौ रक्षा' के लिए उठाई जा रही आवाज से कुछ लोग असहज हैं. इसलिए इस तरह के षड्यंत्र रचे जा रहे हैं.