Vedika Score 482 in CBSE 10th: लर्निंग डिसेबिलिटी यानी सीखने की अक्षमता के बावजूद नोएडा की वेदिका ने वो कर दिखाया है जो बड़े-बड़े तीस मार खां भी शायद ना कर पाएं. सीबीएसई के 10वीं बोर्ड में वेदिका ने 500 में से 482 मार्क्स स्कोर किए हैं. बता दें कि वेदिका को एआई जैसे टेक्निकल सब्जेक्ट में 100 में से पूरे 99 नंबर मिले हैं. वेदिका की यह कामयाबी उन तमाम बच्चों के लिए एक मिसाल है जो शारीरिक या मानसिक चुनौतियों की वजह से खुद को कमतर समझते हैं.
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चुनौतियों को मात देकर पाई सफलता
वेदिका को डिस्ग्राफिया (Dysgraphia) नाम की समस्या है जिसमें लिखने और स्पेलिंग में काफी कठिनाई होती है. अपनी चुनौतियों को शेयर करते हुए वेदिका ने बताया कि 'मुझे सबसे ज्यादा दिक्कत लिखने में ही होती है. मैं खुद को एक औसत छात्रा मानती थी और मुझे उम्मीद थी कि शायद 75% तक अंक आएंगे. लेकिन जब मैंने देखा कि मार्क्स 90s में हैं तो मैं दंग रह गई.' वेदिका ने अपनी इस सफलता के लिए हर दिन 5 से 6 घंटे की कड़ी मेहनत की थी. वेदिका ने अपनी सफलता का श्रेय स्कूल के शिक्षकों के सहयोग को दिया.
AI सब्जेक्ट में कटे सिर्फ 1 नबंर
आज के दौर के सबसे टेक्निकल सब्जेक्ट आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) में वेदिका का प्रदर्शन शानदार रहा. उन्होंने इस विषय में 99 अंक प्राप्त किए. वेदिका का कहना है कि उन्होंने इस विषय के लिए जी-तोड़ मेहनत की थी. उन्होंने पॉजिटिव प्रेशर को भी जरूरी बताया और कहा कि थोड़ा सा तनाव भविष्य में बेहतर करने के लिए प्रेरित करता है.
डॉक्टर मां ने शेयर किया अनुभव
वेदिका की मां मृणाल भार्गव एक डॉक्टर हैं. उन्होंने बताया कि एक डॉक्टर होने के बावजूद शुरुआत में वे वेदिका की इस समस्या को भांप नहीं पाई थीं. उन्होंने कहा कि 'समाज में ऐसे बहुत से बच्चे हैं जिन्हें बेलो एवरेज कहकर लेबल कर दिया जाता है. जबकि असल में उन्हें लर्निंग डिसेबिलिटी होती है. ऐसे बच्चों का आत्मविश्वास तब बढ़ता है जब स्कूल और बोर्ड उन्हें विशेष सुविधाएं प्रदान करते हैं.' उन्होंने गर्व से कहा कि आज वेदिका पूरी तरह से आत्मनिर्भर हो गई है. क्योंकि उसे अपनी कमजोरी का पता है और वह उस पर काम करना जानती है.
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