उत्तर प्रदेश का सहारनपुर जिला उस समय भारी सियासी संग्राम का केंद्र बन गया, जब रात के अंधेरे में कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन अपने समर्थकों के साथ सदर बाजार थाने के भीतर धरने पर बैठ गईं. डीआईजी ऑफिस में पुलिस अधिकारियों के साथ इकरा हसन की तीखी नोकझोंक हुई, जिसके वीडियो सोशल मीडिया और सियासी गलियारों में जमकर वायरल हो रहे हैं. इस दौरान थाने की बिजली गुल होने पर माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया.
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क्या है पूरा मामला?
इस पूरे विवाद की शुरुआत शामली के कांधला थाना क्षेत्र के जसाला गांव के रहने वाले युवक मोनू कश्यप की हत्या से जुड़ी है. पुलिस के मुताबिक, मोनू कश्यप हत्याकांड में दो लोगों (दोस्तों सचिन और शुभम) को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिन्होंने प्रेमिका से बात न कराने की नाराजगी में वारदात से पहले साथ बैठकर शराब पी और फिर मोनू की पिटाई कर उसकी हत्या कर दी. इसी मामले में न्याय और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग को लेकर सपा सांसद इकरा हसन पीड़ित बुजुर्ग महिला (मृतक मोनू कश्यप की मां) के साथ डीआईजी ऑफिस पहुंची थीं.
डीआईजी ऑफिस में विवाद और 151 के तहत चालान
अधिकारियों से मुलाकात के दौरान डीआईजी ऑफिस परिसर में पार्किंग और विरोध प्रदर्शन को लेकर विवाद की स्थिति बन गई. आरोप है कि पुलिस ने न्याय की गुहार लगाने आए पीड़ित पक्ष के लोगों पर ही धारा 151 के तहत शांति भंग का चालान कर उन्हें जेल भेज दिया. वहीं, इस दौरान महिला पुलिसकर्मियों ने सांसद इकरा हसन को महिला थाने पहुंचाया, जहां उन्हें करीब 10 मिनट तक बैठाए रखा गया. पुलिस का आरोप था कि वहां पर सरकारी काम में बाधा डालने और हंगामे जैसी स्थिति पैदा की गई, जिस पर भड़ककर इकरा हसन ने सदर बाजार थाने में अपना धरना शुरू कर दिया.
'आप मार दो गोली हमें, चढ़ा दो फांसी पर...' पुलिस पर जमकर बरसीं इकरा
बातचीत के दौरान सपा सांसद इकरा हसन एसपी सिटी वियोम बिंदल पर बुरी तरह भड़क गईं. उन्होंने पुलिस अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा, "आप अपनी तानाशाही के हिसाब से कार्रवाई कर रहे हैं और हर आदमी को कमजोर समझ रखा है आपने. क्या करोगे? गोली चला दोगे? दे दो, हद कर दी है. अब या तो हमें जेल भेजें या उन्हें रिहा करें, हम तैयार हैं जाने को. आप अपनी तानाशाही की हद पार करो. इस जनता की ही तनख्वाह मिलती है आपको, इनकी नौकरी पर हो आप, हम आपकी नौकरी पर नहीं हैं. आप मार दो गोली हमें, चढ़ा दो फांसी पर, हम डरने वाले नहीं हैं. प्रोटोकॉल तो छोड़िए, आप में इंसानियत तक नहीं है."
धरने के दौरान जब एक महिला पुलिसकर्मी इकरा हसन को पानी पिलाने आई, तो उन्होंने पानी को हाथ लगाने से साफ मना कर दिया. इकरा ने आरोप लगाया कि उन्हीं महिला पुलिसकर्मियों ने उनके साथ बदतमीजी की, उन्हें धकियाया और उनके ऊपर हाथ उठाया. इकरा ने कहा, "अकेले में तो बेइज्जती करते हैं. ये गंदा पानी पी के कहां जाएंगे? ना, इनके उसका नहीं पीना हमें."
'यह राम राज्य है?' भावुक होकर कानून व्यवस्था पर उठाए सवाल
धरने पर बैठी इकरा हसन ने सरकार की कानून व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा, "यह सरासर तानाशाही थी कि उन्हीं लोगों को जो अपनी गुहार लगाने आए, उन्हीं को आपने जेल में बिठा दिया. अगर आज पीड़ित की भी नहीं सुनी जाएगी तो सुनेगा किसकी ये प्रशासन? यह यहां की कानून व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है. जो सरकार बार-बार कानून व्यवस्था की दुहाई देती है, आज ये कानून व्यवस्था उनके सामने है. यह राम राज्य है? यह राम राज्य है जिसमें पिछड़े समाज के लोग या जो शोषित समाज है, उनसे जो लोग आ रहे हैं उनके साथ ये दुरुपयोग हो रहा है? यह महिला कोई मुसलमान महिला नहीं थी (उनके लिए तो अलग ही कानून चल रहे हैं), कश्यप समाज से थीं और हमेशा भाजपा को वोट देते आए हैं, उनके साथ यह हुआ है आज."
इकरा ने आगे कहा कि उन्हें अपनी कोई पीड़ा नहीं है, बल्कि उस मां की पीड़ा है जिसके बच्चे की बेरहमी से हत्या हुई और उसके बावजूद उसे इतना बेइज्जत किया गया कि वो रोती हुई दफ्तर से बाहर निकली.
आश्वासन के बाद देर रात खत्म हुआ धरना
सांसद इकरा हसन अपने समर्थकों के साथ देर रात तक थाने में डटी रहीं. पुलिस अधिकारियों की तरफ से जब वहां पर शांति भंग के आरोप लगाए गए, तो इकरा ने सबूत मांगते हुए दावा किया कि वहां महज पांच से सात लोग ही थे और उनके पास पूरे घटनाक्रम का एक-एक वीडियो मौजूद है.
उन्होंने साफ कह दिया था कि जब तक पीड़ित परिवार के लोगों को रिहा नहीं किया जाएगा, तब तक वो वहां से नहीं हटेंगी. अंत में भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच पुलिस अधिकारियों के काफी मान-मनौव्वल और पीड़ित परिवार के लोगों को छोड़े जाने के आश्वासन के बाद इकरा हसन ने अपना धरना खत्म किया.
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