सहानरपुर के रवि दलित को उनकी पत्नी राधिका ने प्रेमी के चक्कर में बना दिया 'बकरी', अब वो कह रहे कि शेर बनकर जिऊंगा!

सहारनपुर में न्याय की मांग को लेकर दलित युवक रवि कुमार भूख हड़ताल पर. पत्नी पर बिना तलाक दूसरी शादी और घर में चोरी का लगाया आरोप. रवि ने कहा- "100 दिन बकरी की तरह जीने से अच्छा है एक दिन शेर की तरह जीना."

Ravi Kumar Dalit

राहुल कुमार

07 Jan 2026 (अपडेटेड: 07 Jan 2026, 04:48 PM)

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UP News: भीषण ठंड के बीच सहारनपुर जिलाधिकारी ऑफिस के बाहर आकर एक शख्स ने चटाई बिछाई और भूख हड़ताल पर बैठ गया. शख्स का नाम रवि कुमार दलित है. रवि ने अपनी पत्नी के खिलाफ अब आर-पार की जंग छेड़ दी है. ये कहानी शुरू हुई थी 2 जुलाई 2018 को. जब रवि ने बड़ी उम्मीदों के साथ राधिका के गले में वरमाला डाली थी. रवि को लगा था कि उसका घर बस गया. लेकिन उसे क्या पता था कि वह अपनी ही तबाही को दावत दे रहा था.

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राधिका ने रवि को धोखा नहीं दर्द दिया!

राधिका घर में पत्नी बनकर आई थी. लेकिन उसकी नजरों में रवि के लिए प्यार नहीं, बल्कि उसके जेवरों और मेहनत की कमाई पर लालच था. आरोप है कि एक रात जब सब सो रहे थे तब राधिका अपने आशिक संग भाग गई. राधिका सिर्फ फरार ही नहीं हुई बल्कि अपने साथ अलमारी में रखे सोने-चांदी के जेवर और वो नकदी भी ले गई थी. लेकिन ये तो सिर्फ शुरुआत थी. असली खेल तो तब हुआ जब राधिका ने रवि पर दहेज उत्पीड़न का केस दर्ज करा दिया. सालों तक रवि अदालतों के चक्कर काटता रहा. वकीलों की फीस भरता रहा. आखिरकार सच की जीत हुई और वह बेगुनाह साबित हुआ. 

राधिका के अवैध संबंध थे दीपक से, दोनों को हुआ बेटा

अगस्त 2023 में रवि को पता चला कि राधिका ने बिना तलाक लिए दीपक नाम के युवक के साथ घर बसा लिया है. आज उसका एक बच्चा भी है. अपनी पत्नी की शिकायत रवि ने मुख्यमंत्री पोर्टल से लेकर एसएसपी की दहलीज तक की लेकिन बदले में उसे मिली सिर्फ दिलासा. रवि अब अपनी पत्नी के खिलाफ करवाई की मांग को लेकर ही भूख हड़ताल पर बैठ गया है.   

'बकरी नहीं, शेर बनकर मरूंगा'

माता-पिता को खो चुके और गंभीर बीमारी से जूझ रहे रवि का हौसला अब भी फौलादी है. भूख हड़ताल पर बैठे रवि ने प्रशासन को खुली चेतावनी देते हुए संविधान की दुहाई दी है. 

रवि ने कहा, "पुलिस ने आरोपियों से हाथ मिला लिया है. मेरी चोरी हुई चीजें आज तक बरामद नहीं हुईं हैं. अब बहुत हो चुका 100 दिन बकरी की तरह घुट-घुट कर जीने से अच्छा है कि मैं हक के लिए लड़ते हुए एक दिन शेर की तरह मर जाऊं. जब तक न्याय नहीं, तब तक अन्न का एक दाना भी हलक से नीचे नहीं उतरेगा." रवि ने चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक उसे न्याय नहीं मिलेगा तब तक वह अपनी भूख हड़ताल खत्म नहीं करेगा.