कांवड़ में मां को बैठाकर 260 किमी पैदल सफर पर निकला परिवार, ऐसे बेटे-बहू की हर कोई कर रहा तारीफ

अनिल भारद्वाज

• 05:46 PM • 04 Aug 2026

सहारनपुर में कांवड़ यात्रा के दौरान दिखा श्रवण कुमार जैसा नजारा. हरिद्वार से चंडीगढ़ तक मां को कांवड़ में बैठाकर 260 किमी पैदल सफर तय कर रहा है परिवार. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.

Saharanpur News

Saharanpur News

Google CTA

कांवड़ यात्रा के दौरान वैसे तो आपने आस्था और भक्ति के एक से बढ़कर एक रंग देखे होंगे. लेकिन उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से एक ऐसी अनोखी और भावुक कर देने वाली तस्वीर सामने आई है जिसने हर किसी का दिल जीत लिया. कलयुग के इस दौर में जहां लोग बुजुर्ग माता-पिता की अनदेखी करते नहीं थकते.वहीं चंडीगढ़ का एक परिवार अपनी वृद्ध मां को बाकायदा कांवड़ में बैठाकर 260 किलोमीटर का पैदल सफर तय कर रहा है.

यह भी पढ़ें...

बेटे-बहू, पोते और भतीजे का यह समर्पण सहारनपुर से गुजरते वक्त लोगों के बीच कौतूहल और प्रेरणा का केंद्र बना हुआ है. जो भी इस दृश्य को देख रहा है वह रास्ते में रुककर इस श्रवण कुमार रूपी बेटे और संस्कारी बहू को नमन कर रहा है.

मां के लिए श्रवण कुमार बन गए बहू-बेटे

हरिद्वार से गंगाजल लेकर चंडीगढ़ जा रहे इस परिवार ने अपनी इस यात्रा को 'श्रवण कुमार कांवड़' का नाम दिया है. 260 किलोमीटर लंबी इस कठिन यात्रा में पूरे परिवार का आपसी तालमेल देखने लायक है. कांवड़ के एक तरफ जहां मां विराजमान हैं.वहीं दूसरी तरफ संतुलन बनाकर परिवार के सदस्य इसे कंधों पर उठाए हुए हैं.

कभी बेटा राजकुमार और बहू पूजा मिलकर कांवड़ उठाते हैं तो कभी बेटा और भतीजा. परिवार की भांजी और अन्य सदस्य भी साथ में रास्ते भर जयकारे लगाते हुए माँ की सेवा में जुटे हैं.

मां-बाप से बढ़कर दुनिया में कुछ नहीं

यूपी Tak से बातचीत करते हुए कांवड़ ला रहे बेटे राजकुमार ने बताया कि 'मेरा नाम राजकुमार है. मैं हरिद्वार से जल लेकर चंडीगढ़ जा रहा हूं. यह 260 किलोमीटर का सफर है और इसे श्रवण कुमार कांवड़ बोलते हैं. पिछले 3-4 साल से मैं मां की वजह से कांवड़ लेने नहीं जा पा रहा था तो इस बार सोचा कि माताजी को ही साथ ले चलूं. आज के समय में लोग मां-बाप की सेवा नहीं करते. लेकिन सच तो यही है कि दुनिया में माता-पिता के प्यार और सेवा से बढ़कर कुछ नहीं है. बस भोलेनाथ की कृपा है और हम खुशी-खुशी आगे बढ़ रहे हैं.'

भगवान मेरे बेटे-बहू को सुख-शांति दे

कांवड़ की टोकरी में बैठकर यात्रा का आनंद ले रहीं वृद्ध माता जैदी ने अपने बेटे और बहू के इस अप्रतिम प्रेम पर खुलकर आशीर्वाद दिया. उन्होंने कहा 'मेरा नाम जैदी है. मेरा बेटा और बहू अपनी खुद की इच्छा से मुझे कांवड़ में बैठाकर लाए हैं. यह मुझसे बहुत प्यार करते हैं इसीलिए लेकर आए हैं. मुझे बहुत अच्छा लग रहा है. भगवान मेरे बेटे-बहू को सुख-शांति दे. मैं यात्रा का पूरा आनंद ले रही हूं.' 

वहीं सास को कंधे पर उठाने वाली बहू पूजा ने कहा कि जो सोच उनके पति की है, वही सोच उनकी भी है. सासू मां को कांवड़ में घुमाना उनके लिए गर्व और अपार खुशी की बात है. सहारनपुर की सड़कों से जब यह 'श्रवण कुमार कांवड़' गुजरी तो भोले के जयकारों के साथ-साथ हर जुबान पर इस परिवार के संस्कारों और मां-बाप के प्रति समर्पण की ही चर्चा रही.

ये भी पढ़ें: मुजफ्फरनगर में देर रात आपस में ही भिड़ गए कावड़िए, बीच सड़क ऐसा हंगामा देख पुलिस भी रह गई दंग!