ओमान में जहाज हमले में चली गई देवरिया के सूरज यादव की जान, मां और दादी का रो-रोकर बुरा हाल

राम प्रताप सिंह

24 Sep 2026 (अपडेटेड: 24 Sep 2026, 02:52 PM)

देवरिया के 23 वर्षीय सूरज यादव की ओमान में एक जहाज पर हुए हवाई हमले में मौत हो गई. परिवार की आर्थिक मदद और छोटे भाइयों के भविष्य के लिए वह डेढ़ महीने पहले ओमान गए थे. हादसे की खबर से गांव में मातम पसरा है.

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घर की तंगहाली दूर करने और अपने छोटे भाइयों के सुनहरे भविष्य का सपना लेकर महज डेढ़ महीने पहले ओमान गए देवरिया के 23 साल के सूरज यादव की एक भीषण हादसे में जान चली गई. ओमान के पूर्वी तट पर एक जहाज पर हुए अचानक हवाई हमले में सूरज उसकी चपेट में आ गए. जैसे ही इस अनहोनी की खबर देवरिया जिले के गौरीबाजार स्थित उनके गांव करमाजीतपुर पहुंची परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. जिस बेटे के सिर पर सेहरा सजने का सपना पूरा परिवार देख रहा था, उसकी अचानक मौत की खबर से पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है.

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गरीबी से लड़ने ओमान गया था सूरज

गौरीबाजार थाना क्षेत्र के करमाजीतपुर गांव के रहने वाले ओम प्रकाश यादव के चार बेटों में सूरज सबसे बड़े थे. परिवार की माली हालत ठीक नहीं थी. इसलिए 12वीं की पढ़ाई पूरी करते ही सूरज ने जिम्मेदारियों का बोझ अपने कंधों पर उठा लिया. करीब 1 माह 10 दिन पहले ही वह उम्मीदों का नया सवेरा देखने फ्लाइट से ओमान रवाना हुए थे. लेकिन किसे पता था कि चंद दिनों में ही यह उम्मीदें हमेशा के लिए खामोश हो जाएंगी.

मस्कट से घर के लिए निकले पिता

घटना की सूचना मिलते ही सूरज के घर में चीख-पुकार मच गई. मां पुष्पा देवी, दादी पाना देवी और दादा रमा यादव का रो-रोकर बुरा हाल है. सूरज के पिता ओम प्रकाश यादव भी मस्कट में नौकरी करते हैं और घटना की जानकारी मिलते ही वह भी तुरंत गांव के लिए रवाना हो गए हैं. घर पर सूरज के तीन छोटे भाई सन्नी, समीर और साहिल अपने बड़े भाई के जाने के सदमे में हैं. घटना की जानकारी मिलते ही गौरीबाजार थाना पुलिस भी परिजनों को ढांढस बंधाने और जानकारी जुटाने पहुंची है.

परिजनों का छलका दर्द

चाचा अवधेश यादव व राजेश यादव ने बताया कि 'सूरज बेहद होनहार और जिम्मेदार लड़का था. 12वीं पास करते ही उसने परिवार की तंगहाली दूर करने के लिए विदेश जाने का फैसला किया था. हमें क्या पता था कि जिस बेटे को हमने कमाकर घर संभालने भेजा था, वह इस तरह हमें छोड़कर चला जाएगा.' वहीं मां पुष्पा देवी ने कहा कि 'मेरा बेटा पूरे परिवार का सहारा था... छोटे भाइयों की पढ़ाई का जिम्मा उठाने गया था, भगवान ने सब कुछ छीन लिया.'

23 साल के सूरज की असमय मौत से पूरे गांव को शोक का माहौल है. अब पूरे गांव की निगाहें सरकार पर टिकी हैं कि कब तक सूरज का पार्थिव शरीर उसके पैतृक गांव पहुंचता है.

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