उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर में एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है. इलाके की पहचान और जिला केसरी व ब्लॉक केसरी रह चुके पहलवान ब्रह्मानंद यादव की बेखौफ बदमाशों ने निर्मम हत्या कर दी. गांव की सड़क पर ही बदमाशों ने पहले पहलवान की आंखों में मिर्च पाउडर झोंका और फिर टांगी, कुदाल व लाठी-डंडों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया.
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पुरानी चुनावी रंजिश में हुई इस हत्या के बाद से पूरे इलाके में भारी तनाव और रोष का माहौल है. परिजनों ने पुलिस प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए शव को सड़क पर रखकर जमकर विरोध-प्रदर्शन किया.
आंखों में मिर्ची झोंकी फिर टांगी और कुदाल से किया वार
घटना के वक्त ब्रह्मानंद यादव अपनी बुलेट मोटरसाइकिल पर जानवरों के लिए चारा लेने जा रहे थे. जैसे ही वह गांव में विरोधियों के घर के सामने पहुंचे पहले से घात लगाए हमलावरों ने उनकी आंखों में मिर्च का पाउडर फेंक दिया. आंखों में जलन के कारण जब तक ब्रह्मानंद संभल पाते, हमलावरों ने उन पर टांगी, कुदाल और लाठी-डंडों से जानलेवा हमला कर दिया. जब परिजन और अन्य लोग बचाने के लिए दौड़े तो आरोपियों ने कट्टे से हवाई फायरिंग कर उन्हें भी डरा दिया और करीब आधे घंटे तक घायल पहलवान के पास किसी को भटकने नहीं दिया.
2022 के प्रधानी चुनाव की रंजिश बनी वजह
पारिवारिक सूत्रों और ग्रामीणों के अनुसार इस खूनी वारदात के पीछे साल 2022 के ग्राम पंचायत चुनाव की रंजिश है. 2022 के प्रधानी चुनाव में ब्रह्मानंद यादव की भाभी मैदान में उतरी थीं और उन्होंने जीत दर्ज की थी. इस हार से नाराज पाटीदार पक्ष के राजेश यादव, सुरेंद्र यादव और करिया यादव के परिवार में रंजिश पनप गई.
इस विवाद को लेकर दोनों पक्षों के बीच पहले भी मारपीट हुई थी और सदर कोतवाली में मुकदमा भी दर्ज कराया गया था. लेकिन यह रंजिश खत्म नहीं हुई और अंततः पहलवान की जान ले ली गई.
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
घटना के बाद ग्रामीणों और परिजनों का गुस्सा पुलिस-प्रशासन पर फूट पड़ा. परिजनों का कहना है कि घटना के करीब 2 घंटे बाद तक पुलिस मौके पर नहीं पहुंची. अगर पुलिस 15-20 मिनट के भीतर आ जाती और समय पर अस्पताल पहुंचाया जाता तो पहलवान की जान बचाई जा सकती थी. ग्रामीणों ने कहा कि सरकार जीरो टॉलरेंस की बात करती है. लेकिन जमीनी स्तर पर पुलिस तंत्र पूरी तरह विफल साबित हुआ है.
गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि की मांग
परिजनों ने साफ कहा कि जब तक पुलिस कप्तान खुद आरोपियों की आधिकारिक गिरफ्तारी और जेल भेजने की पुष्टि नहीं करते, तब तक वे सिर्फ आश्वासनों पर भरोसा नहीं करेंगे.
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
अखाड़े में बड़े-बड़े धुरंधरों को पटखनी देने वाले ब्रह्मानंद जिंदगी की इस आखिरी जंग में हार गए। करीब 8 साल पहले उनकी शादी हुई थी. अपने पीछे वह पत्नी, एक छोटी बेटी और एक बेटा छोड़ गए हैं. चार भाइयों का यह परिवार एक साथ मिलकर खेती-बाड़ी और पशुपालन का काम करता था. ब्रह्मानंद का पार्थिव शरीर जब विहर घाट के लिए रवाना हुआ तो हर आंख नम थी. ग्रामीणों और क्षेत्रीय लोगों ने सरकार से मांग की है कि हत्यारों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए, मामले की निष्पक्ष जांच हो और पीड़ित परिवार व अनाथ हुए बच्चों की पढ़ाई-लिखाई के लिए ज्यादा से ज्यादा आर्थिक मदद दी जाए.
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