पीलीभीत में वोटर लिस्ट की गड़बड़ी पर चुनाव आयोग का एक्शन, SDM मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी हुए सस्पेंड

संतोष शर्मा

• 12:10 PM • 02 Nov 2026

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में मतदाता सूची में गड़बड़ी के मामले में चुनाव आयोग ने सख्त रुख अपनाया है. आयोग ने SDM रैंक के दो अधिकारियों मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का निर्देश दिया है.

Pilibhit Voter List News

Pilibhit Voter List News (Photo: Representational)

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Pilibhit Voter List News: उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में मतदाता सूची में गड़बड़ी के मामले में चुनाव आयोग ने सख्त रुख अपनाया है. आयोग ने SDM रैंक के दो अधिकारियों मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का निर्देश दिया है. साथ ही कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार के खिलाफ दर्ज FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 198 जोड़ने को कहा है. आयोग ने जिले की सभी चार विधानसभा सीटों की वोटर लिस्ट का दोबारा सत्यापन कराने का भी आदेश दिया है.

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सदर विधानसभा की वोटर लिस्ट में मिली थी गड़बड़ी

यह मामला पीलीभीत की सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में सामने आई गड़बड़ी से जुड़ा है. चुनाव आयोग ने निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी को तत्काल निलंबित करने का निर्देश दिया है. आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसकी अनुमति के बिना दोनों अधिकारियों को बहाल नहीं किया जाएगा. इस मामले में मतदाता पंजीकरण केंद्र पर तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार के खिलाफ पहले से FIR दर्ज है. इस FIR में दोनों अधिकारी भी नामजद हैं. अब आयोग ने अनिल कुमार के खिलाफ दर्ज मुकदमे में BNS की धारा 198 जोड़ने को कहा है.

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जिले की चारों विधानसभा सीटों की होगी जांच

सदर विधानसभा की वोटर लिस्ट में गड़बड़ी सामने आने के बाद आयोग ने पूरे जिले की मतदाता सूचियों की जांच कराने का फैसला किया है. इसके तहत पीलीभीत के जिला निर्वाचन अधिकारी को जिले की सभी चार विधानसभा सीटों की वोटर लिस्ट का दोबारा सत्यापन कराने का निर्देश दिया गया है. आयोग ने इस पूरी प्रक्रिया की रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर सौंपने को कहा है. यानी अब जिले की चारों सीटों की मतदाता सूचियों की दोबारा जांच की जाएगी.

तीन दिन में देनी होगी कार्रवाई की रिपोर्ट

चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के मामले में दोषी पाए गए कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी है. इसके लिए तीन दिन की समयसीमा तय की गई है. वहीं, चारों विधानसभा सीटों की मतदाता सूची के पुन: सत्यापन की रिपोर्ट एक सप्ताह में देनी होगी. अब जांच के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि गड़बड़ी के पीछे किन लोगों की भूमिका थी और दोबारा सत्यापन में क्या तथ्य सामने आते हैं.

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