Jalaun Drug Factory: उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में नशे का एक बड़ा अवैध कारोबार चल रहा था, जिसके खिलाफ कार्रवाई हुई है. डीआरआई और यूपी एटीएस की संयुक्त टीम ने उरई के एरी रामपूरा गांव में चल रही एक सिंथेटिक ड्रग फैक्ट्री पर छापा मारा है. छापेमारी के दौरान टीम ने भारी मात्रा में मेफेड्रोन ड्रग्स बरामद किया है. इसके साथ ही ड्रग्स बनाने में इस्तेमाल होने वाले कई खतरनाक केमिकल बरामद किए हैं. जानकारी के मौके से मौके से 1102 किलो से ज्यादा ड्रग्स और केमिकल को जब्त किया गया है साथ ही दो आरोपियों को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है.
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गांव में पकड़ी गई अवैध लैब
यह अवैध लैब एरी रामपूरा गांव में बहुत चुपचाप और गुप्त तरीके से चलाई जा रही थी. सूत्रों के मुताबिक रामपुर गांव दूर-दराज का बेहद सुनसान इलाका है. जानकारी के मुताबिक जांच एजेंसियों इस ड्रग्स के अवैध कारोबार की जानकारी लंबे समय से थी, लेकिन उन्हें इसकी सटीक लोकेशन नहीं मिला पा रही थी, जिसके कारण कार्रवाई करने में देरी हुई है. हालांकि बुधवार सुबह मुखबिर से पक्की सूचना मिलने के बाद डीआरआई और एटीएस की टीम ने छापा मारकर दो लोगों को पकड़ लिया है.
1102 किलो ड्रग्स और केमिकल जब्त
छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने मुख्य आरोपी के घर से 15.44 किलो तैयार मेफेड्रोन ड्रग्स बरामद किया है. इसके अलावा मौके पर बनी अवैध लैब से करीब 184 किलो अधूरा बना हुआ ड्रग्स भी जब्त किया गया है. वहीं अलग-अलग जगहों पर छापेमारी में 582.2 किलो केमिकल और अन्य सामग्री मिली है. इस तरह टीम ने कुल 1102.88 किलो ड्रग्स और केमिकल जब्त किया है. मौके से ड्रग्स बनाने वाली मशीनें भी बरामद की गई हैं.
कार्रवाई में दो आरोपी हुए गिरफ्तार
पुलिस की इस बड़ी कार्रवाई में जिन दो आरोपियों को पकड़ा गया है उनकी पहचान महाराष्ट्र के रहने वाले संतोष और जालौन के स्थानीय निवासी हेमेंद्र के रूप में हुई है. ये दोनों मिलकर इस अवैध फैक्ट्री को चला रहे थे और ड्रग्स तैयार कर रहे थे. डीआरआई ने इस पूरे ऑपरेशन को लेकर एक आधिकारिक नोट भी जारी किया है.
मास्टरमाइंड की तलाश कर रहीं एजेंसियां
जांच एजेंसियों का कहना है कि यह अवैध फैक्ट्री एक बड़े इंटरस्टेट ड्रग नेटवर्क का हिस्सा है. इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की बारीकी से जांच की जा रही है. मास्टरमाइंड की तलाश के लिए पकड़े गए दोनों आरोपियों से लगातार पूछताछ हो रही है. केंद्रीय और राज्य स्तर की एजेंसियां अब यह पता लगा रही हैं कि यहां तैयार किए गए ड्रग्स को कहां-कहां सप्लाई किया जाता था और इस काले कारोबार में और कौन-कौन शामिल है.
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