गोरखपुर ग्रामीण सीट पर अखिलेश यादव किस पर खेलेंगे दांव, निषाद चेहरे पर करेंगें भरोसा या किसी और को देंगे मौका?
गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा सीट पर 2027 के चुनाव को लेकर अभी से टिकट की दावेदारी तेज हो गई है. मौजूदा समय में यहां बीजेपी के विपिन सिंह विधायक हैं और पार्टी में उनकी उम्मीदवारी मजबूत मानी जा रही है.
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Gorakhpur Rural Assembly Seat: गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा सीट पर 2027 के चुनाव को लेकर अभी से टिकट की दावेदारी तेज हो गई है. मौजूदा समय में यहां बीजेपी के विपिन सिंह विधायक हैं और पार्टी में उनकी उम्मीदवारी मजबूत मानी जा रही है. वहीं, समाजवादी पार्टी और इंडिया गठबंधन में टिकट के लिए कई नाम सामने आ रहे हैं. इस सीट पर निषाद समुदाय के मतदाताओं की अच्छी संख्या को देखते हुए सपा के टिकट को लेकर जातीय समीकरणों की चर्चा भी तेज है. बसपा की ओर से भी निषाद समुदाय के किसी उम्मीदवार को मैदान में उतारने की अटकलें हैं.
बीजेपी में विपिन सिंह की दावेदारी मजबूत
2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के विपिन सिंह ने गोरखपुर ग्रामीण सीट पर जीत दर्ज की थी. उन्होंने सपा के विजय बहादुर यादव को हराया था. विपिन सिंह को गोरखनाथ मंदिर और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का करीबी माना जाता है. ऐसे में चर्चा है कि बीजेपी उन्हें दोबारा मौका दे सकती है. हालांकि, पार्टी में टिकट मांगने वालों की कमी नहीं है. सुधीर सैनी, पूर्व राज्यसभा सांसद जयप्रकाश निषाद और होशिला सिंह समेत कई नाम दावेदारी के तौर पर सामने आ रहे हैं. इसके बावजूद मौजूदा विधायक होने और गोरक्षपीठ से नजदीकी के कारण विपिन सिंह की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है.
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गोरक्षपीठ का प्रभाव और निषाद वोटरों का समीकरण
गोरखपुर की राजनीति में गोरक्षपीठ का प्रभाव अहम माना जाता है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर भी हैं. उनसे पहले उनके गुरु और गुरु के गुरु भी राजनीति में सक्रिय रहे हैं. दूसरी तरफ, गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में निषाद समुदाय के मतदाताओं की संख्या भी अच्छी-खासी बताई जाती है. ऐसे में विपक्षी दलों के लिए यह जातीय समीकरण महत्वपूर्ण हो जाता है. चर्चा है कि सपा निषाद मतदाताओं को ध्यान में रखकर इसी समुदाय के किसी नेता को टिकट दे सकती है.
सपा की ओर से कई दावेदार
समाजवादी पार्टी में इस सीट से टिकट के कई दावेदार बताए जा रहे हैं. पिछली बार पार्टी ने विजय बहादुर यादव को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा. अब रामनगीना साहनी, रविंद्र निषाद, काजल निषाद, सुधीर साहनी और मनोरंजन यादव जैसे नाम चर्चा में हैं. काजल निषाद अभिनेत्री हैं और गोरखपुर लोकसभा सीट से चुनाव भी लड़ चुकी हैं. वहीं, अंशुमान सिंह का नाम भी दावेदारी में सामने आया था. कुछ दिन पहले गोरखपुर के एक कार्यक्रम में नगीना साहनी के साथ विवाद और मारपीट की घटना के बाद सपा ने अंशुमान सिंह को पार्टी से निष्कासित कर दिया था. इस कार्रवाई के बाद उनकी दावेदारी पर विराम लग गया है.
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रामनगीना साहनी और अन्य नेताओं के नाम
दावेदार कार्यक्रम में चर्चा के दौरान राम नगीना साहनी, काजल निषाद और अन्य नेताओं की सक्रियता भी चर्चा में है. ऐसे में अंतिम फैसला सपा नेतृत्व और गठबंधन की रणनीति पर निर्भर करेगा. पार्टी निषाद समुदाय से उम्मीदवार उतारती है या किसी दूसरे जातीय समीकरण पर दांव लगाती है, यह देखना दिलचस्प होगा.
बसपा भी निषाद उम्मीदवार पर खेल सकती है दांव
गोरखपुर ग्रामीण सीट पर बसपा की भूमिका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. 2022 के चुनाव में पार्टी ने निषाद समुदाय के दारा सिंह निषाद को उम्मीदवार बनाया था. इस बार भी चर्चा है कि बसपा किसी निषाद चेहरे को मैदान में उतार सकती है. इसके अलावा एक मुस्लिम नेता का नाम भी चर्चा में है, जो सपा में रहकर चुनाव की तैयारी कर रहा है, लेकिन बसपा से टिकट पाने की कोशिश की बात भी कही जा रही है. फिलहाल, ये सभी संभावित दावेदारों के नाम हैं. 2027 के चुनाव में बीजेपी से विपिन सिंह को दोबारा मौका मिलता है या नहीं और सपा-बसपा किस जातीय समीकरण के साथ उतरती हैं, इसका फैसला आने वाले समय में होगा.
