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14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए आजम खान, गाजियाबाद की PMLA कोर्ट ने दिया आदेश

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समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान को दो पैन कार्ड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बावजूद राहत नहीं मिली. रामपुर जेल से रिहा होते ही ईडी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया. गाजियाबाद की विशेष पीएमएलए कोर्ट ने आजम खान को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है.

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समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता आजम खान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. इलाहाबाद हाई कोर्ट से आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को दो पैन कार्ड के मामले में जमानत तो मिल गई थी, लेकिन जेल से बाहर आते ही ईडी ने आजम खान को फिर से गिरफ्तार कर लिया. जेल से रिहाई का रास्ता साफ होने के बाद भी, ईडी उन्हें रामपुर से सीधे गाजियाबाद लेकर गई. गाजियाबाद के विशेष पीएमएलए कोर्ट में पेशी के बाद अदालत ने आजम खान को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. हालांकि उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को जेल से रिहा कर दिया गया है.

रिहाई के तुरंत बाद हुई गिरफ्तारी

शनिवार देर शाम रामपुर जेल से आजम खान की रिहाई की खबर सामने आई थी. लेकिन जैसे ही वे बाहर आए, बाहर जवानों के साथ खड़ी ईडी की टीम ने उन्हें अपने साथ ले लिया. ईडी ने आजम खान के खिलाफ 14 अक्टूबर को एक मामला दर्ज किया था, जिसके तहत यह कार्रवाई की गई. रविवार की सुबह करीब 10 बजे ईडी ने उन्हें कोर्ट में पेश किया और कस्टडी की मांग की, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया.

आजम बोले- मुसलमान होने की सजा

गिरफ्तारी के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए आजम खान ने अपना दर्द और गुस्सा जाहिर किया. उन्होंने कहा, "कहने को कुछ नहीं रहा. यह मुसलमान होने की सजा है. मेरी गलती बस इतनी है कि एक मुसलमान ने यूनिवर्सिटी और बच्चों के लिए स्कूल बनाए. यही हमारा गुनाह है." उन्होंने साफ तौर पर इस कार्रवाई को अपने धर्म और शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कामों से जोड़ा.

अब्दुल्ला आजम का झलका दर्द

जेल से रिहा हुए अब्दुल्ला आजम ने भी मीडिया के सामने अपना गुस्सा जाहिर किया. उन्होंने कहा कि उनके परिवार को भैंस, बकरी और मुर्गी चोरी जैसे झूठे मामलों में फंसाया गया. अब्दुल्ला ने भावुक होते हुए कहा, "हम इंसान नहीं, जानवर हैं जो इतनी बेइज्जती और जिल्लत के बाद भी जिंदा हैं." उन्होंने यह भी कहा कि अगर उनके पिता ने रामपुर के बच्चों को पढ़ाने के लिए यूनिवर्सिटी बनाने का ख्वाब नहीं देखा होता, तो शायद उन्हें यह दिन नहीं देखना पड़ता. अब्दुल्ला ने साफ तौर पर कहा कि उन्हें उनके नाम 'अब्दुल्ला' होने की सजा मिल रही है.

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