OBC होते हुए बनवाया ST सर्टिफिकेट, सिद्धार्थनगर में 16 साल बाद गई प्रधानाचार्य सुनैना गौड़ की नौकरी, पूरे वेतन की होगी रिकवरी

अनिल तिवारी

• 09:31 AM • 06 Nov 2026

Siddharthnagar News: सिद्धार्थनगर में फर्जी अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र बनवाकर नौकरी पाने वाली प्रधानाचार्य सुनैना गौड़ को बर्खास्त कर दिया गया है. जांच में उनका जाति प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया था. अब इस मामले में उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट से भी राहत नहीं मिली है.

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Siddharthnagar News: उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी पाने वाली एक प्रधानाचार्य को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है. बेसिक शिक्षा अधिकारी शैलेश कुमार ने यह कार्रवाई प्राथमिक विद्यालय उटिया में तैनात सुनैना गौड़ के खिलाफ की है. आरोप है कि उन्होंने 30 जुलाई 2010 को फर्जी अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी हासिल की थी. 

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शिकायत मिलने के बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर मामले की जांच कराई गई थी. जांच में सामने आया कि सुनैना गौड़ की जाति उत्तर प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग श्रेणी में आती है. इसके बाद जिलाधिकारी की समिति ने जुलाई 2026 में उनका जाति प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया था. शिक्षिका ने इस फैसले के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था, लेकिन उन्हें वहां से राहत नहीं मिली है. 

अब बीएसए ने उनकी सेवा समाप्त करने के साथ ही नियुक्ति की तारीख से अब तक मिले पूरे वेतन की रिकवरी करने का आदेश दिया है. इसके अलावा खंड शिक्षा अधिकारी को उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश भी दिए गए हैं.

फर्जी प्रमाण पत्र से मिली नौकरी

जांच में पता चला कि सुनैना गौड़ मूल रूप से ऐसी जाति से ताल्लुक रखती हैं, जो उत्तर प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की श्रेणी में आती है. हालांकि उन्होंने इसको नजरंदाज करको अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र बनवाया और उसके आधार पर शिक्षा विभाग में नौकरी ले ली.

इस मामले की शिकायत मिलने के बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर आधिकारिक जांच कराई गई थी. जांच में जाति प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया था. इसके बाद जिलाधिकारी की समिति ने जुलाई 2026 में इस प्रमाण पत्र को निरस्त कर दिया था.

हाईकोर्ट से भी नहीं मिली राहत

जाति प्रमाण पत्र निरस्त होने के बाद सुनैना गौड़ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील की थी. हालांकि अदालत से उन्हें कोई राहत नहीं मिली है. इसके बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी शैलेश कुमार ने उनकी सेवा समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया है.

पूरे वेतन की होगी रिकवरी

बीएसए ने सुनैना गौड़ को 30 जुलाई 2010 को नियुक्ति मिलने से लेकर अब तक दिए गए पूरे वेतन की रिकवरी करने के निर्देश दिए हैं. इसके साथ ही खंड शिक्षा अधिकारी को उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का आदेश भी दिया गया है.

इस कार्रवाई के बाद अब शिक्षिका को नौकरी से हटाने के साथ ही उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी.

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