उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले से एक खौफनाक खबर सामने आ रही है. अहरौला थाना क्षेत्र स्थित शंभूपुर गांव के एक घर में पूजा-पाठ चल रहा था. इस दौरान घर में कुछ पंडित भी मौजूद थे. तभी अचानक शुरू हुई गोलियों की तड़तड़ाहट से हर कोई कांप उठा. पूजा के दौरन हुए मामूली विवाद ने ऐसा भयानक रूप लिया कि तीन लोगों की जान चली गई. इस खौफनाक घटना को अंजाम देने वाला कोई और नहीं उसी घर का एक शख्स अरविंद सिंह था.
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आरोपी अरविंद सिंह ने आपा खोते हुए अपनी पत्नी और दो पुरोहित पंडितों पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी. खूनी खेल को अंजाम देने के बाद आरोपी अब अपने दो मासूम बच्चों, तीन लाइसेंसी हथियारों और 40 से ज्यादा जिंदा कारतूसों के साथ कमरे में खुद को बंद किए बैठा है. पूरे गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है और हर कदम फूंक-फूंक कर रखा जा रहा है. फिलहाल इस खौफनाक घटना के पीछे की असली वजह अभी भी बहुत साफ नहीं हो पाई है
आधार कार्ड मांगने पर शुरू हुआ विवाद
मिली जानकारी के अनुसार, शंभूपुर गांव में अरविंद सिंह के घर पर धार्मिक पूजा-पाठ का आयोजन किया गया था. शाम के समय जब अरविंद बाजार से घर लौटा तो उसने पूजा करा रहे पंडितों से उनका आधार कार्ड मांगना शुरू कर दिया. इसी बात को लेकर बहस शुरू हुई और देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि अरविंद ने आपा खो दिया.
आरोपी ने पिस्टल से ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी जिसकी चपेट में आने से उसकी पत्नी बबीता और पूजा करा रहे दो पंडितों की मौत हो गई. मृतकों में पंडित महेंद्र पाठक नाम के पुरोहित भी शामिल हैं. घटना के बाद पूजा में शामिल अन्य पंडित जान बचाकर मौके से फरार हो गए.
2 साल पहले हुई थी भाई की हत्या
इस खूनी वारदात के पीछे पारिवारिक कलह और पुरानी घटना जुड़ी होना बताया जा रहा है. लगभग दो साल पहले अरविंद के भाई गुड्डू सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. परिवार के लोग भाई की आत्मा की शांति के लिए घर पर पूजा का आयोजन कराना चाहते थे.
बताया जा रहा है कि अरविंद इस पूजा के पूरी तरह खिलाफ था और उसने घर पर पूजा कराने से सख्त मना किया था. इसके बावजूद परिजनों ने पूजा का आयोजन रखा जिससे वह भारी तनाव और गुस्से में था.
अभी भी कमरे में बच्चों के साथ है आरोपी
घटना के बाद से शंभूपुर गांव पुलिस छावनी में तब्दील हो चुका है. स्थिति बेहद नाजुक और तनावपूर्ण बनी हुई है. खबर लिखे जाने तक आरोपी अरविंद सिंह अपने दोनों बच्चों को कमरे में बंद कर अंदर मौजूद है. उसके पास परिवार के तीन लाइसेंसी हथियार और करीब 40 से अधिक जिंदा कारतूस मौजूद हैं.
स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस और स्थानीय ग्रामीण सतर्कता से उससे बातचीत कर बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने और उसे सरेंडर कराने का प्रयास कर रहे हैं. पुलिस कोई भी जोखिम नहीं लेना चाहती. इसलिए मौके पर मौजूद मीडियाकर्मियों और ग्रामीणों को घटनास्थल से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सख्त हिदायत दी गई है.
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और फॉरेंसिक टीम मौके पर मौजूद हैं. पुलिस का कहना है कि पहली प्राथमिकता बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालना है जिसके बाद पूरी स्थिति और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
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