Azamgarh Murder Case: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ के अहरौला क्षेत्र के शंभूपुर गांव में पत्नी और दो पुजारियों की हत्या के बाद बच्चों को बंधक बनाने वाले अरविंद सिंह की कहानी की कई परतें अब सामने आ रही हैं. घटना के दौरान पुलिस के साथ मुठभेड़ में अरविंद की मौत हो गई, जबकि उसके एक बेटे ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. अरविंद के बचपन के दोस्त आशुतोष सिंह ने यूपी Tak से बातचीत में अरविंद के व्यवहार, नशे की आदत और 2018 में बड़े भाई की हत्या के बाद उसके जीवन में आए बदलावों के बारे में जानकारी दी है.
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बड़े भाई की हत्या के बाद बदल गया अरविंद
अरविंद सिंह के बचपन के दोस्त आशुतोष के मुताबिक साल 2018 में उसके बड़े भाई सुनील सिंह की हत्या के बाद अरविंद पहले जैसा नहीं रहा था. इस घटना के बाद वह धीरे-धीरे लोगों से दूरी बनाने लगा और गांव में भी उसका मेल-जोल कम हो गया. दोस्त का कहना है कि अरविंद का सामाजिक दायरा लगातार सिमटता गया और वह ज्यादातर अपने घर तक ही सीमित रहने लगा था. परिवार के लिए सुनील सिंह की हत्या पहले से ही एक बड़ा सदमा थी. इसी पुराने घटनाक्रम का असर अरविंद के व्यवहार पर पड़ने की बात उसके दोस्त ने बताई है.
गांजे की लत और बढ़ती तन्हाई का दावा
आशुतोष सिंह ने बातचीत में दावा किया कि बड़े भाई की हत्या के बाद अरविंद गांजा पीने लगा था. उसके मुताबिक अरविंद के जीवन में अकेलापन बढ़ता गया और वह लोगों से मिलने-जुलने से बचने लगा. दोस्त ने बताया कि अरविंद को घर में आने वाले बाहरी लोगों को लेकर भी शक रहता था. उसके व्यवहार में ऐसी बेचैनी दिखाई देने लगी थी कि परिवार के लोग भी कई बार डर जाते थे. हालांकि, घटना के समय अरविंद नशे में था या नहीं, इसकी पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आधिकारिक जांच के बाद ही हो सकेगी. इसलिए नशे से जुड़ी बातों को फिलहाल दावों के तौर पर ही देखा जा रहा है.
पूजा-पाठ से नाराजगी की बात आई सामने
इस मामले में पूजा-पाठ को लेकर अरविंद की नाराजगी भी अहम कड़ी मानी जा रही है. परिवार के मुताबिक, घर में लगातार तीन दिनों से महामृत्युंजय जाप कराया जा रहा था. बताया गया है कि यह पूजा अरविंद की पत्नी बबीता सिंह ने कराई थी. परिवार की ओर से कहा गया कि बड़े भाई की मौत और घर के माहौल को देखते हुए पंडितों ने पूजा कराने की सलाह दी थी. वहीं, अरविंद को पूजा-पाठ पसंद नहीं था और वह इससे चिढ़ता था. इसी वजह से धार्मिक अनुष्ठान को लेकर उसके नाराज होने की बात सामने आई है, हालांकि इस नाराजगी के पीछे की पूरी वजह जांच का विषय है.
पूजा के दौरान आधार कार्ड मांगने पर बढ़ा विवाद
शंभूपुर गांव में मंगलवार शाम घर के अंदर महामृत्युंजय जाप चल रहा था. इसी दौरान अरविंद घर पहुंचा और वहां मौजूद पुजारियों से सवाल-जवाब करने लगा. जानकारी के मुताबिक उसने पंडितों से पूछा कि वे उसके घर क्यों आए हैं. इसके बाद उसने उनसे आधार कार्ड मांग लिया. इसी बात को लेकर विवाद बढ़ गया और देखते ही देखते स्थिति हिंसक हो गई. आरोप है कि अरविंद ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें उसकी पत्नी बबीता सिंह और पूजा कराने आए दो पुजारियों की मौत हो गई. इसके बाद वह अपने बच्चों को लेकर घर के अंदर चला गया और खुद को कमरे में बंद कर लिया.
लाइसेंसी रिवॉल्वर का कनेक्शन
अरविंद के बड़े भाई सुनील सिंह की हत्या के बाद उनकी लाइसेंसी रिवॉल्वर अरविंद को ट्रांसफर होने की बात भी सामने आई है. पुलिस जांच के मुताबिक, मंगलवार की घटना में इसी हथियार का इस्तेमाल किया गया. हालांकि, हथियार के लाइसेंस, उसके ट्रांसफर और इस्तेमाल से जुड़े सभी कानूनी पहलुओं की पुष्टि आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर होना बाकी है. परिवार की ओर से सुनील सिंह की हत्या से जुड़े मामले और अदालत में चल रही सुनवाई का भी जिक्र किया गया है. इस तरह वर्तमान घटना का संबंध परिवार के पुराने विवाद और पहले हुए नुकसान से भी जुड़ता दिखाई देता है.
बच्चों को बंधक बनाकर घर में बंद हो गया आरोपी
पत्नी और दो पुजारियों की हत्या के बाद अरविंद अपने तीन बच्चों को लेकर घर के अंदर चला गया. उसने खुद को कमरे में बंद कर लिया और बच्चों को बाहर भेजने से इनकार कर दिया. घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस और अधिकारी मौके पर पहुंचे और पूरे घर की घेराबंदी कर दी गई. पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालना थी, क्योंकि अरविंद के पास लाइसेंसी रिवॉल्वर थी. अधिकारियों ने जल्दबाजी से बचते हुए बातचीत के जरिए स्थिति को संभालने की कोशिश की, ताकि बच्चों को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे.
पुलिस ने बातचीत से सुलझाने की कोशिश की
पुलिस ने करीब सात घंटे तक अरविंद से बातचीत की और उसे बच्चों को सुरक्षित बाहर भेजने के लिए समझाया. अधिकारियों की कोशिश थी कि बिना गोलीबारी के बंधक संकट को खत्म किया जाए. इसी बीच अचानक घर के अंदर से फायरिंग की आवाज सुनाई दी. इसके बाद पुलिस को आशंका हुई कि आरोपी बच्चों की जान को खतरे में डाल सकता है. पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए स्टन ग्रेनेड और टियर गैस का इस्तेमाल किया. इसके बाद दरवाजा तोड़कर टीम घर में दाखिल हुई, जहां अरविंद ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी.
जवाबी कार्रवाई में अरविंद की मौत
वाराणसी जोन के एडीजी नवीन अरोड़ा के मुताबिक, पुलिस टीम के घर में पहुंचते ही अरविंद ने करीब चार-पांच राउंड फायर किए. उसके पास छह राउंड की लाइसेंसी रिवॉल्वर थी. जवाब में पुलिस ने भी तीन-चार राउंड फायर किए, जिसमें अरविंद घायल हो गया. उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन बाद में उसकी मौत हो गई. वहीं, गोली लगने से घायल उसके करीब 10 साल के बेटे को भी अस्पताल भेजा गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. पुलिस ने बाकी दोनों बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया.
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