उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में हुए सनसनीखेज ट्रिपल मर्डर और उसके बाद चले 7 से 8 घंटे के खौफनाक रेस्क्यू ऑपरेशन ने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया है. अपने ही मासूम बच्चों को ढाल बनाकर 40 से 50 कारतूसों और दो असलाहों के साथ कमरे में बंद अरविंद सिंह आखिरकार पुलिस एनकाउंटर में ढेर हो गया. लेकिन इस वारदात में पत्नी, दो महंतों, एक मासूम बच्चे और खुद अरविंद समेत कुल 5 जिंदगियों का अंत हो गया.
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हर कोई यह सोचकर हैरान है कि जो पिता अपने बच्चों से साए की तरह प्यार करता था, उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ता था, उसने अचानक अपनी पत्नी और दो पुजारियों की हत्या कर अपने ही जिगर के टुकड़ों को बंधक क्यों बनाया? क्या अरविंद सिंह सच में किसी मानसिक बीमारी से जूझ रहा था, किसी अंधविश्वास व साए की आगोश में था, या फिर इस खूनी खेल की पटकथा साल 2018 में लिखे गए उसके परिवार के काले इतिहास से जुड़ी थी?
क्या है पूरा मामला
घटना वाले दिन घर में 5 दिनों का एक विशेष पूजा-पाठ चल रहा था. अरविंद के मानसिक अवसाद और अजीब हरकतों से परेशान होकर उसकी पत्नी बबीता ने पारिवारिक पुरोहित के कहने पर यह पूजा रखवाई थी. पुरोहित का दावा था कि अरविंद पर उसके मृत भाई का साया है और पूजा से उसकी मानसिक हालत सुधर जाएगी.
मंगलवार को अरविंद मार्केट से लौटकर घर पहुंचा. उसने पूजा कर रहे दोनों महंतों से उनका आधार कार्ड मांगा. जब पत्नी बबीता ने इस बात का विरोध किया तो अरविंद ने सीधे रिवॉल्वर निकाल ली. पत्नी को बचाने के प्रयास में अरविंद ने पहली गोली बबीता पर चला दी और फिर दोनों महंतों को भी गोलियों से भून डाला.
8 घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन
वारदात को अंजाम देने के बाद अरविंद ने घर में मौजूद 40 से 50 कारतूस और दो लाइसेंसी हथियारों के साथ खुद को बच्चों समेत एक कमरे में बंद कर लिया.गांव के प्रधान के मुताबिक, अरविंद अपने बच्चों को बेइंतहा प्यार करता था। वह जहां भी जाता, बच्चों को साथ लेकर जाता था. जब पुलिस ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया तो अरविंद ने अंधाधुंध फायरिंग की. पुलिस ने 7-8 घंटे की मशक्कत के बाद एनकाउंटर में अरविंद को ढेर कर दिया. लेकिन इस दौरान एक मासूम बच्चे की भी जान चली गई.
साल 2018 का वो मंजर जिसने हिला दी अरविंद की दिमागी हालत
अरविंद सिंह के इस हिंसक व्यवहार के पीछे साल 2018 की एक दर्दनाक घटना बताई जा रही है. अरविंद का बड़ा भाई सुनील सिंह मुंबई में बालासाहेब ठाकरे का पीआरओ रह चुका था और परिवार आर्थिक व राजनीतिक रूप से काफी मजबूत था. 12 अक्टूबर 2018 को एक भंडारे के दौरान कुछ लोगों ने सुनील सिंह की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी.
साल 2015 में अरविंद की पत्नी बबीता ने पड़ोसियों पर रेप का केस दर्ज कराया था जिसमें उन्हें 20-20 साल की सजा हुई थी. इसी रंजिश के चलते केस की सुनवाई से ठीक पहले सुनील सिंह की हत्या कर दी गई थी.
भाई की मौत के बाद अरविंद पूरी तरह टूट गया था. वह डिप्रेशन में रहने लगा, काम-धंधा छोड़ दिया और भांग का नशा करने लगा. भाई की हत्या पूजा के दौरान हुई थी. इसलिए अरविंद को भगवान और पूजा-पाठ से सख्त चिढ़ हो गई थी.
अरविंद के पास कहां से आए हथियार?
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठा कि एक दिमागी रूप से अस्वस्थ व्यक्ति के पास इतने हथियार और कारतूस कहां से आए? जांच में सामने आया कि ये दोनों लाइसेंसी असलहे अरविंद के दिवंगत भाई सुनील सिंह के नाम पर थे. सुनील की हत्या के बाद जब प्रशासनिक प्रक्रियाओं के तहत अरविंद का मानसिक संतुलन कुछ सामान्य दिखा तो ये असलहे नियम के तहत अरविंद के नाम पर ट्रांसफर कर दिए गए थे.
क्या रोकी जा सकती थी यह बड़ी वारदात?
इस पूरे मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली और पारिवारिक एंगल को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं. पूजा शुरू होने से पहले सोमवार को भी अरविंद ने घर में पूजा-पाठ का कड़ा विरोध किया था और पत्नी से झगड़ा किया था. इस बात की सूचना डायल 112 पुलिस को दी गई थी. लेकिन पुलिस और स्थानीय लोगों ने मामला शांत करा दिया. अगर पुलिस सोमवार को ही कड़ा कदम उठाती या अरविंद के मानसिक संतुलन को देखते हुए हथियार जब्त कर लेती तो शायद 5 जिंदगियां बचाई जा सकती थीं.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मृतक सुनील सिंह की पत्नी ने दावा किया है कि बबीता का पड़ोसियों से अफेयर था जिसके चलते 2015 का विवाद शुरू हुआ था और उसी रंजिश में सुनील की जान गई थी. फिलहाल, पुलिस इस पूरे मामले के सभी पहलुओं, कॉल डिटेल्स और फॉरेंसिक साक्ष्यों की जांच कर रही है.
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